जब लड़की अधिक लंबी हो...

जब लड़की अधिक लंबी हो...

माया की लंबाई अच्छी हैै, यह बचपन में ही स्पष्ट हो गया था। जैसे-जैसे माया यौवन की दहलीज पर कदम रख रही थी, वैसे-वैसे ही उसकी लंबाई ने उसकी सुंदरता को और बढ़ा दिया। वह अपनी सखियों में सर्वाधिक लंबी है। जब चलती है तो सखियां ईर्ष्या से जल भुन जाती हैं। इकहरे बदन की माया को कब अपनी लंबाई पर गर्व हो गया, इसका अहसास ही नहीं रहा।

रिश्तेदार, मिलने वाले, सखियां आदि जब भी चर्चा करते, माया के लिए अच्छी लम्बाई का रिश्ता देखने हेतु चिन्ता व्यक्त करते।

अध्ययन पूर्ण होने पर माया के रिश्ते की बात चलने लगी। प्रारंभ में बहुत अच्छे रिश्ते आए किंतु लड़के की लंबाई माया से कम होने से बात नहीं बनी। माया हर बार यह संकेत दे रही थी कि शादी करेगी तो अपने से अधिक लम्बे लड़के से ही। माता पिता की दुलारी बेटी माया के ब्याह में बार-बार योग्य रिश्ता मिलने पर लंबाई बीच में आ गई। रिश्ते देखते-देखते माया की उम्र 29 वर्ष हो गई। माया जिस लंबाई पर गर्व करती थी, वही उसकी शादी में सबसे बड़ा रोड़ा बन गई।

सुनीता की लंबाई 5 फुट सात इंच है। शिक्षा पूरी कर सरकारी विद्यालय में व्याख्याता बन गई है। सुनीता के लिए आने वाले रिश्तों में सुनील का रिश्ता आया जो स्वयं कॉलेज में प्राध्यापक है, अच्छे घर से है किंतु लंबाई 5 फुट 5 इंच है। सुनीता ने लम्बाई को महत्त्व नहीं देते हुए शादी के लिए अपनी स्वीकृति दे दी। आज सुनीता सही समय पर विवाह कर खुशहाल जीवन जी रही है। सुनीता एवं सुनील के प्रेम के मध्य लंबाई का कोई स्थान नहीं है।

रेखा की लंबाई 5 फुट 6 इंच है। अपनी लंबाई पर गर्व करते हुए रेखा अक्सर कहती, 'जोड़ी वही अच्छी लगती है जिसमें लड़के की लंबाई लड़की से अधिक हो।' 25 वर्ष की आयु तक रेखा के लिए सही जोड़ीदार देखते-देखते घर में निराशा आने लगी। रेखा ने परिस्थितियों से समझौता कर प्रवीन जो अच्छे व्यवसायी है एवं लंबाई 5 फुट 5 इंच है, से रिश्ते को स्वीकृति दी।

अनामिका ने एम. बी. ए. किया है। सौभाग्य से लंबाई 5 फुट 7 इंच पाई है। जब रिश्ते की बात चली तो रोहित जो पशु चिकित्सक हैं किंतु हैं कद के छोटे, मात्र 5 फुट 5 इंच। अनामिका के परिवार वालों ने रिश्ते को सही ठहराया। अनामिका ने भी अपनी स्वीकृति दे दी।

आज ऐसे अनगिनत उदाहरण देखें जा सकते हैं। योग्य वर की तलाश में लंबाई को महत्त्व दिया जाता रहा है। जोड़ी वही जंचती है जिसमें वर की लंबाई वधू से अधिक हो। आज युवतियां सर्वगुण सम्पन्न होने के साथ लड़के की लंबाई भी अच्छी चाहती हैं। ऐसी जोडिय़ां जिनमेंं वधू लंबी है, उन्हें देखकर वह मजाक बनाती हैं, उपहास करती हैं। माना कि वर की लंबाई वधू से अधिक होनी चाहिए किंतु केवल इसी आधार पर रिश्ता नहीं कर आप कहीं भूल तो नहीं कर रही हैं?

आज की नारी यूं तो आधुनिक बनने का प्रयास करती है, पुरूषों से आगे निकलने की होड़ में लगी हुई है किंतु मानसिकता आज भी वही है कि पति अधिक पढ़ा लिखा हो, अधिक लंबा हो, अधिक आयु वाला हो। यह मानसिकता दर्शाती है कि आज भी नारी स्वभावत: आश्रित ही रहना चाहती है। परिवर्तन के इस युग में जहां सब कुछ बदल रहा है तो ऐसा क्यों न हो कि हमारी इस मानसिकता में बदलाव आए।

जिसे जीवन साथी चुनना है, उसके चयन का आधार लंबाई हो तो बाकी गुणों में समझौता करना ही होगा। ऐसा भी हो सकता है कि वर केवल कद में ऊंचा हो, बाकी सब गुणों में निम्न स्तर का हो। सोचिए वर की लंबाई बहुत अच्छी है तो जोड़ी तो वाकई जंच जाएगी किंतु ऊंचे कद का वर बेरोजगार है, क्रोधी स्वभाव का है, व्यसनी है, चंचल चित्त वाला है, भले घर का नहीं है तो क्या हो।

दूसरी ओर वर की लंबाई कम है किंतु सुंदर, सुशील, अच्छे पद पर कार्यरत, अच्छे घर से है। समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त है और अपने से अधिक लंबी लड़की को योग्यता के आधार पर चयन करने को राजी है तो ऐसी स्थिति में वधू-पक्ष में परिवार जनों को अत्यन्त सावधानी, कुशलता से वधू को राजी करना उसके जीवन को संवार देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण ही नहीं, आवश्यक कदम होगा।

ऐसे माता पिता अपनी पुत्री पर अपने विचार जबरदस्ती न थोपते हुए उसे कुछ ऐसे बेमेल जोड़ों से मिलवाएं जिनका वैवाहिक जीवन सफल हो और जिन्होंने लंबाई को महत्त्व न देकर यह कदम उठाया हो। ऐसे जोड़ों से बात करने पर यह तथ्य निश्चित रूप से उभर कर सामने आएगा कि ऐसे जोड़ों में भी वधू ने अवश्य चाहा होगा कि वर की लंबाई अच्छी हो। हो सकता है उन्हें भी यह निर्णय करने में अति कठिनाई हुई हो। यह भी हो सकता है बहुत मजबूरी में उन्होंने यह निर्णय लिया हो। आज अपने उसी निर्णय पर उन्हें पछताना न पड़ा हो एवं अपनी नादानी पर हंसी आती हो।

सच पूछो तो समझौता सफल वैवाहिक जीवन का आधार है। शादी से पूर्व प्रत्येक नवयौवना की कल्पना विशिष्ट होती है। उसके सपनों का राजकुमार सर्व गुण संपन्न होता है। प्रत्येक माता-पिता चाहते हैं कि उनकी पुत्री का जीवनसाथी ऐसा हो जिसे देखकर सब सराहें।

शादी जीवन भर का सौदा है और रिश्ता देखते समय जीवन को सफल करने वाले गुणों को प्रमुखता दी जानी चाहिए न कि सुन्दरता व लंबाई आदि को। एक व्यक्ति किसी भी हाल में सर्वगुण सम्पन्न नहीं हो सकता। इतिहास गवाह है कि विभिन्न विशिष्ट गुणों की चाहत पूरी करने के लिए द्रौपदी के लिए भी एक वर में सम्पूर्ण गुण नहीं मिले थे।

वाकई सभी गुण एक व्यक्ति में नहीं मिलते। समझौता तो करना ही होता है, फिर यह समझौता लंबाई से ही क्यों न कर लिया जाए। इसमें बुराई क्या है। केवल अपनी सोच को बदल कर ही जिंदगी को खुशहाल बनाया जा सकता है। तो अवसर हाथ से न जाने दीजिए। ऐसा न हो कि समय हाथ से निकल जाए।

- गायत्री देवी प्रजापति

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