पर सुख में दुखी न हों

पर सुख में दुखी न हों

सड़क के किनारे बहुत से पेड़ थे- उनमें से तीन पेड़ साथ-साथ थे- नीम, कीकर तथा पीपल। ये तीनों पेड़ साथ-साथ होने के बावजूद भी खूब फल फूल रहे थे। उन तीनों में काफी मित्रता थी। अपने दु:ख सुख की बात करते रहते थे पर लगता है मन के किसी कोने में एक दर्द छिपा हुआ था।

कीकर कई दिन से आदमी की नीति को देख कर परेशान था। आखिर में उसने एक दिन नीम से कह ही डाला कि मेरी समझ में यह नहीं आता कि लोग दातुन और लकड़ी के लिए हमारे अंग-भंग करते हैं और पूजा के लिये पीपल की तरफ चल पड़ते हैं।

नीम भी मन ही मन इस बात से दु:खी था। उसने भी तपाक से कीकर की हां में हां मिलाई और कहा, 'हां भाई मैं भी यह देखकर परेशान होता हूं। जब आदमी ने अपने मुंह का जायका बदलना हो तो मेरी निबौलियां तोड़ता है और खा लेता है। दवाइयों के लिए मेरी छाल को छीला जाता है। मेरी पत्तियों को तोड़ कपड़ों में कीड़े न लगे, इसके हेतु प्रयोग किया जाता है। कभी मुझे धूप-छांव में सुखा कर अलग अलग तरीके से प्रयोग में लाया जाता है पर दूसरी ओर पीपल के पत्ते रात्रि में तेज़ हवा चलने पर लोगों को सांय-सांय की आवाज से डराते रहते हैं। फिर भी उसकी ही पूजा करते हैं।

अभी कीकर और नीम बातें कर ही रहे थे कि सामने से दो आदमी आए और पीपल की पूजा कर आगे बढ़ गए। उनके जाते ही नीम और कीकर ने पूछा कि लोग तुम्हारे सामने पूजा के समय तुम्हारी प्रशंसा में क्या कहते हैं, कौन से मंत्र पढ़ते हैं? पीपल बोला, 'पता नहीं, आज उन्होंने कोई मंत्र नहीं पढ़े। लगता है शायद तनाव में थे। तनावग्रस्त होकर वे कह रहे थे कि दुनिया में कैसे-कैसे लोग है जो अपने पड़ोसी की समृद्धि पर खुश नहीं होते। अधिकतर लोग पर सुख पीड़ा का भार ढोते रहते हैं।

- नीतू गुप्ता

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