अकेलेपन को हंस कर काट सकती हैं आप

अकेलेपन को हंस कर काट सकती हैं आप

आज जीवन का ढर्रा कुछ इस तरह का बन गया है कि अकेलापन कई औरतों की नियति बनकर रह गया है, अब वे इसे चाहे हंस कर लें या रोकर।

अपनी जिंदगी अपने ख्वाबों की तरह ही जी जा सकती तो क्या बात थी, लेकिन हकीकत कई बार तल्ख होती है और हालात बहुत कुछ अनचाहा झेलने को विवश कर देते है। औरत का अनब्याहा रहना, विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा होना उसे अकेले रहने पर मजबूर कर सकता है या फिर स्वेच्छा से वह अकेली रहना पसंद कर सकती है। कई बार घर का मनमुटाव भी अकेले रहने का कारण हो सकता है।

अकेली औरत को लेकर हमारे यहां आम धारणा यही है कि घर में तन्हाई के नाग उसे डसते हैं। उसका जीना दुश्वार हो सकता है। वह जिंदगी के सभी सुखों से वंचित, मासिक यातनाओं से पूर्ण जीवन गुजारती है। उसे परिवार वाले लिफ्ट नहीं देते, न अपने घर बुलाते हैं और न ही उसके घर बोर होने जाते हैं।

लेकिन यह सच नहीं क्योंकि आज वक्त बदल गया है। आज की अकेली औरत अगर चाहे तो एक संपूर्ण जीवन जी सकती है। बस जरूरत है थोड़ी सी सूझ बूझ, सजग चेतना, विचारशीलता, कल्पना की उड़ान और खुले दिमाग की। अकेले रहने के भी अनेक फायदे हैं, यह मानकर चलें तो यह सोच अकेले रहने वाले के लिए स्टैपिंग स्टोन होगी परंतु अपने लिए दिल में जरा भी बेचारगी का ख्याल आया तो यह नकारात्मक सोच आपकी हर खुशी लील जायेगी, फिर लोगों को आपको धर दबाते देते नहीं लगेगी। वे तो इसके लिए तैयार ही बैठे होते हैं।

सोचें अपने ढंग से अपना जीवन गुजारना कितनों को नसीब होता है। लोगों के विपरीत कमेंट्स व तानों की रत्ती भर परवाह न करें। हो सकता है कि वे नहीं, उनकी ईष्र्या बोल रही हो। आपका अच्छा खाना, पहनना, जिम्मेदारियों से मुक्त होना उनके कलेजे में टीस उपजाता है।

आप अकेली रहती हैं तो किताबों को साथी बनाइये। सच मानिये ऐसा सुसंस्कृत साथी आपको और नहीं मिलेगा। अच्छी किताबें बड़ी नेमत हैं। उनमें ज्ञान का भंडार है जो आपको समय काटने के साथ दिमाग भी रोशन करता है।

साथ ही पालतू जानवर भी बहुत अच्छी कंपनी देते हैं इनके साथ आपकी हंसने-बोलने की ललक तो पूरी होती ही है, भावों को भी इजहार होने का मौका मिलता है।

'ए थिंग ऑफ ब्यूटी इज जाय फार एवर'। कवि वडर््सवर्थ ने कितनी सुंदरता से इस सत्य को मुखरित किया है। प्रकृति की छटा, उसकी सुंदरता को अपने बगीचे में कैद कर लें, बागवानी से अच्छा पास टाइम नहीं, फूलों की देखभाल करते हुए उसकी सुंदरता को मन में बसायें, मन का संसार सौंदर्यमय हो उठेगा। किसी जरूरतमंद अनाथ बच्चे को गोद लेने का विचार भी कर सकती हैं। इससे मिलने वाला सुख संतोष आपकी अपनी जागीर होगी।

संगीत से अगर आपको कुदरती तौर से प्यार है तो बेहतर, लेकिन अगर पेड़ पौधे जानवर तक संगीत के जादू से अप्रभावित नहीं रहते तो आप तो फिर भी इंसान हैं। संगीत का तन मन दोनों पर कितना अनुकूल असर होता है, आज यह बात सभी जानते हैं। टी.वी. भी लिमिट में देखना बुरा नहीं। इससे अच्छा मनोरंजन हो सकता है। अच्छी फिल्में देखी जा सकती हैं, दोस्तों के साथ थिएटर में जा कर अकेले टी.वी. पर। कंप्यूटर भी अकेलेपन का अच्छा साथी है। ज्ञान का भंडार है। आप चैट करके या स्काइप पर बात करके अपना अकेलापन दूर कर सकते हैं।

अकेले होने पर अपने को सबसे अलग या बहिष्कृत समझने की गलती कभी न करें। आप भी जीवन धारा के साथ-साथ हैं। अपने विवेक को काम में लाते हुए आप जिसे चाहें दोस्त बनायें, जिसकी भी कंपनी आपको भली लगे। न किसी का शोषण करें, न होने दें। कभी-कभी तन्हाई में खुशनुमा यादों की महफिल सजाती रहें।

अगर आपको सचमुच अकेले जीने की तर्ज आती है, आपका जीवन एक खुशनुमा नगमा बन जायेगा और आप अपने पर तरस खाने वालों से फख्र से कह सकेंगी - मेरे लिए फिक्रमंद न हों, मैं सचमुच बहुत मजे में हूं।

- उषा जैन 'शीरीं'

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