क्या हो बहू का पहनावा?

क्या हो बहू का पहनावा?

नई नवेली दुल्हन रेणुका कल ही ब्याह कर ससुराल में आई थी। सुबह उठकर वह गाउन में ही किचन में चली आई। उसने हाथों की चूडिय़ां भी उतार रखी थी। सभी ज्वैलरी भी उतार रखी थी। उसे इस रूप में देखकर उसकी सास चौंक गई। ये क्या हुलिया बना रखा है। यह ससुराल है, तुम्हारा मायका नहीं। तुम्हें इतना नहीं पता कि शादी के बाद हाथों को नंगा नहीं रखते। सारी चूडिय़ां ही निकाल दी। यह गाउन सिर्फ सोने के लिए होता है। इसे पूरे घर में पहनकर नहीं घूम सकती।' कहते हुए उसकी सास ने पूरा घर सिर पर उठा लिया।

रेणुका के साथ जो हुआ, वह किसी एक परिवार की बात नहीं है। आमतौर पर हर परिवार में दुल्हन आने के बाद ये समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। शादी के शुरूआती समय में हर नवेली दुल्हन को इन समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है। उसकी मनमर्जी झगड़े का सबब बन सकती है। वह क्या पहने क्या नहीं, यह सब ससुराल वाले ही निर्धारित करते हैं, खासकर सास।

बहू ने सिर पर पल्ला रखा है या नहीं? साड़ी पहनी हैं या नहीं? चूडिय़ां पहनी हैं या नहीं, चूडिय़ां भी दो-चार नहीं बल्कि पूरा हाथ भरा होना चाहिए। सिंदूर लगाया है या नहीं? बिंदी लगाई है या नहीं। चटख रंग की साड़ी पहनी है या कुछ सफेद काला तो नहीं पहन लिया? गाउन पहनकर कमरे से बाहर तो नहीं निकल रहीं? मेहमानों के सामने बिना मेकअप तो नहीं निकल आई। इन सब बातों का ख्याल ससुराल में रखा जाता है। बेटियों के लिए भले ही घर में कोई कायदे-कानून न बने हों मगर बहू के घर में आते ही उसके लिए नियम बना दिये जाते हैं। वह क्या पहनेगी? कैसे रहेगी? किससे बात करेगी? किससे घूंघट करेगी? किस समय उठेगी? कब सोएगी आदि सवालों के जवाब में एक लम्बी लिस्ट उसके घर में आने से पूर्व ही तैयार कर ली जाती है। अगर उसने इन्हें मानने में जरा भी आनाकानी की तो फिर गृहयद्ध छिड़ जाता है। उसे ताने मारे जाने लगते हैं। इतना ही नहीं, उसके माता-पिता और खानदान को भी इस झगड़े में घसीट लिया जाता है। दरअसल बहू के विषय में यही माना जाता है कि चटख रंग की साड़ी पहने हुए, गज भर का सिंदूर माथे में लगाए हुए, चूडिय़ों से भरे हुए हाथ या फिर चूड़ा पहने हुए, सिर पर पल्लू रखे हुए वह आपके सामने हो। यही आदर्श बहू की छवि है। कहीं-कहीं तो घूंघट का भी चलन है। बहू घूंघट न करे तो बखेड़ा खड़ा हो जाता है। आधुनिक परिवारों में बहुओं को सलवार-कमीज पहनने की इजाजत मिलने लगी है मगर वे भी चटख-मटक रंग के हों।

ससुरालवालों को यह भी सोचना चाहिए कि आने वाली बहू का व्यवहार एवं स्वभाव कैसा होगा? इसलिए उसके ऊपर तानाकशी करके इस रिश्ते को बिगाड़ा न जाये बल्कि अपनी पसंद और नापसंद से उसे अलग से अवगत करायें। मेहमानों और रिश्तेदारों के बीच उसे कुछ न कहें। उसे भी अपनी बेटी मानकर चलें। उस पर इतने सारे कायदे-कानून एक साथ थोपेंगे तो वह आपके परिवार के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाएंगी। इससे घर में तनाव बढ़ेगा। व्यर्थ के झगड़े होंगे। वह साड़ी पहने या सूट, घूंघट निकाले या नहीं, चटख रंग पहने या हलके रंग, इन बातों पर घर में व्यर्थ का विवाद खड़ा न करें। इससे आपकी छवि भी उसकी नजरों में खराब हो जायेगी। वह आपका दिल से मान-सम्मान नहीं कर पाएगी। जब आप अपनी बेटी पर ज्यादा टोका टाकी नहीं कर सकते तो फिर बहू को तो और भी ज्यादा अपनेपन की जरूरत होती है वरना वह ससुराल को अपना घर कैसे मानेगी?

बहू को भी अपने नये रिश्तों और परिवार को ध्यान में रखकर चलना चाहिए। उसके संसार में अब काफी कुछ बदल गया है। उसे इन सबको खुशीपूर्वक अपनाना चाहिए। शादी का मतलब और सुहाग की निशानियों को स्वीकार करना होगा।

आजकल संयुक्त परिवार रहे ही कहां? सभी एकल रहना पसंद करते हैं। सास-ससुर के साथ आपको कितने दिन रहना है? आप कुछ दिन उनकी इच्छानुसार ओढ़-पहन लेंगी तो आपका कुछ नुकसान तो नहीं होगा, उल्टे आप उनके मन को भा ही जायेंगी। उनके सामने उनकी पसंदानुसार ही रहें। अगर आपके ससुराल का माहौल अत्याधुनिक नहीं है तो आप वहां जींस,स्कर्ट आदि पहनकर अपना मजाक न उड़वायें। समय के अनुसार चलें। जिंदगी में आने वाले बदलावों को स्वीकार करें।

-शिखा चौधरी

Share it
Top