अब विवाह से नहीं डरती युवतियां

अब विवाह से नहीं डरती युवतियां

आजकल लड़कियां जहां बड़े होते-होते एक तरफ अपने कैरियर की ओर पूरा ध्यान लगाकर रखती हैं और अपना एक वर्चस्व कायम करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ विवाह को लेकर भी उनके मन में कुछ सपने पनपते हैं। कुछ जिज्ञासाएं होती हैं तो कुछ आशंकाएं भी होती हैं मसलन शादी के बाद उनके जीवन में कितना परिवर्तन हो जाएगा, दूसरे परिवार में जाकर उन्हें रहना होगा और उसी अनुसार स्वयं को ढालना पड़ेगा, क्या यह सब इतना सहज होगा आदि? तरह-तरह के सवाल उनके मन में उमड़ते रहते हैं।

एक सुखद परिवर्तन यह है कि आज की युवतियों को विवाह के लिए उनके माता-पिता भी बाध्य नहीं करते। वे इस संबंध में उनकी सलाह लेते हैं। उनकी पसंद-नापसंद का ख्याल रखते हैं। अपनी बेटियों को अब कोई भी माता-पिता बेडिय़ों में बंधी नहीं देखना चाहते। वे चाहते हैं कि जिस लाड़ प्यार से उन्होंने अपनी बेटी को पाला है, उसी तरह से ससुराल में भी उसका मान-सम्मान हो। विवाह जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर उसका निर्णय सर्वोपरि हो न कि वे उस पर अपनी मर्जी थोपें।

आजकल की युवतियों की मानसिक स्थिति में बदलाव आया है। अब वे विवाह जैसे मुद्दे पर बेझिझक अपने परिवार वालों से बात कर सकती हैं न कि शरम की पोटली बनी रहती हैं। यह उनके भविष्य का प्रश्न है जिसे उनके माता-पिता भी बखूबी समझते हैं। अब आगे जाकर सभी कुछ उन्हें एडजस्ट नहीं करना है। वे पढ़ी-लिखी हैं, कमाऊ हैं तो उनके जीवनसाथी को भी बराबर एडजस्ट करना पड़ेगा। विवाह सिर्फ एक बंधन नहीं, एक रिश्ता है जो बाकी रिश्तों की तरह निभाया जाना चाहिए न कि जबरदस्ती झेला जाना चाहिए।

आजकल के पति-पत्नी के बीच में दोस्ताना व्यवहार ही उनके दांपत्य जीवन को आगे बढ़ाने का मूल-मंत्र है। यदि उनके बीच में टिपिकल पति-पत्नी की तरह का व्यवहार चल रहा है तो उनके विवाह का भविष्य अधिक नहीं हो सकता। युवतियों को यह परखना भी जरूरी हो गया है कि कौन उन्हें किस तरह आगे निभायेगा?

अब तक हमारे समाज में लड़की देखने की प्रथा कायम है यानी लड़की को देखने के लिए पूरा परिवार चला आता है। उस पर सबकी निगाहें टिकी होती हैं। सवालों के तीर भी सभी उस पर छोड़ते रहते हैं। कितनी पढ़ी है? क्या कमाती है? घर का कुछ काम-काज आता है या नहीं। सभी उसके पीछे हाथ धोकर पड़ जाते हैं।

कोई उसे शोपीस की तरह निहारता है तो कोई उसका इंटरव्यू जारी रखता है। लड़की देखना न हुआ, 'हौव्वा हो गया। जरूरी नहीं है कि एक बार में ही बात बन जाएÓ यानी फिर वही दिखाना। जब लड़की देखने-दिखाने का प्रोग्राम बन सकता है, उसका इंटरव्यू किया जा सकता है तो भला लड़कों का क्यों नहीं?

आमतौर पर युवतियों को इस देखने दिखाने से ही जलन होती है, इसलिए वे विवाह से दूर ही रहना चाहती हैं मगर समाज का यही चलन है कि विवाह जरूर हो तो आजकल की लड़कियां लड़कों के इंटरव्यू लेने से भी नहीं चूकती या इसे उनकी शादी पूर्व मुलाकात कह लीजिए जिसमें वे एक-दूसरे के साथ बैठकर आने वाले समय में अपनी-अपनी उम्मीदें आमने-सामने रखते हैं।

सबसे महत्त्वपूर्ण चीज होती है विवाह में दहेज। लड़की कितनी पढ़ी-लिखी हो, कितना भी क्यों न कमाती हो, समाज में उसकी शादी बगैर लेन-देन के नहीं हो सकती। यह अलग बात है कि वह कोर्ट मैरिज या लव मैरिज कर ले, उसमें ऐसा न हो मगर सामाजिक प्रक्रिया के अनुसार उसके घर रिश्ते आने वालों की मांगें भी कुछ न कुछ जरूर होंगी। वैसे भी ज्यादा पढ़ी-लिखी और समझदार लड़की को हर माता-पिता अच्छे घर में ही ब्याहने की सोचेंगे। वे किसी गरीब को तो अपनी लड़की देंगे नहीं।

ऊंचे घरों में दहेज की ऊंची ही बोलियां लगती हैं। महंगाई के साथ-साथ दहेज भी बढ़ता जा रहा है। आज जबकि वह भी बराबर कमाती है, इसके बावजूद भी दहेज की मांग उसके माता-पिता से की जायेगी तो वह विवाह से दूर भागेगी ही मगर कैरिअरिस्ट युवतियां परिस्थितियों का सामना करने से हिचकिचाती नहीं हैं, इसलिए आजकल सभी माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ाते हैं। दहेज तो हर वर्ग में मांगा जाता है। लड़की को नहीं पढ़ाएंगे, तब भी उसे कोई ऐसे ही स्वीकार नहीं करेगा। कम से कम पढ़-लिखकर वह इन सामाजिक कुरीतियों से लडऩे में सक्षम तो हो जायेगी।

हालांकि सब कुछ सही चलते हुए भी युवतियों के मन में यह आशंका जरूर बनी रहती है कि नये घर में जाकर क्या वे एडजस्ट कर पाएंगी। किसका स्वभाव किस तरह का होगा? क्या वे उसी अनुसार स्वयं को ढाल पायेंगी? अचानक उन पर कितनी सारी जिम्मेदारियां आ जायेगी। क्या वे उन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा सकंेगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो क्या होगा? आजकल की युवतियों की सोच में काफी बदलाव आया है। अब वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मजबूत हैं। यह सब सोच-सोचकर वह विवाह से परे नहीं भागती बल्कि पहले अपने कैरियर को बनाकर थोड़ी देर से ही सही, विवाह भी करती हैं क्योंकि शादी के बाद कैरियर मुश्किल से ही बनाया जा सकता है।

विवाह तो बाद में भी किया जा सकता है। कैरियर से तनावमुक्त होकर विवाह की परिस्थितियों पर काबू पाया जा सकता है। अब युवतियां अकेले रहने के बजाय विवाह को महत्त्व देने लगी हैं। अब वे परिस्थितियों का खुलकर सामना कर सकती हैं।

- शिखा चौधरी

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