ऐसे बनाएं महिलाएं अपना आकर्षक व्यक्तित्व

ऐसे बनाएं महिलाएं अपना आकर्षक व्यक्तित्व

आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में अपने आपको जीवन के हर दौड़ में प्रतिस्थापित करना चुनौतीपूर्ण व कठिन होता है लेकिन उच्चकोटि के व्यक्तित्व के धनी लोग सरलता से अपने बहुमुखी व्यक्तित्व के कारण लोगों व समाज में आसानी से अपना सम्मानजनक स्थान बना लेते हैं व जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलतापूर्वक आगे निकल जाते हैं। कैसा हो हमारा व्यक्तित्व? हम अपने व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास कैसे कर सकते हैं?

व्यक्तित्व से अभिप्राय है कि मनुष्य का समग्र आचरण जो किसी व्यक्ति के आदर या तिरस्कार का कारण बनता है। हमारा व्यक्तित्व आकर्षक बने, इसके लिए सरसता पहली सीढ़ी है। व्यक्तित्व का विकास सिर्फ बाहरी दिखावट पर ध्यान देने से नहीं होता। इसके लिये विविध पक्षों में एकता व समायोजन आवश्यक है। बाहरी परिधान एवं रहन सहन तो व्यक्तित्व का एक अंग मात्र हैं। हमारे आचार, विचार, व्यवहार एवं हमारा आत्मविश्वास हमारे बहुमुखी व्यक्तित्व को सम्पूर्णता प्रदान करते हैं। वास्तव में आकर्षक व्यक्तित्व के लिये हमें सरस व जीवंत होना आवश्यक है, साथ ही व्यक्तित्व में लचीलापन भी होना चाहिये जिससे लोग हमारी ओर खिंचे चले आएं। हमें उन लोगों का आदर व सम्मान करके अपनी ओर आकर्षित करना चाहिये जो हमारे सम्पर्क में आते हैं। समय विशेष पर किन्हीं कारणों से होने वाली हमारी खराब मन:स्थिति का प्रभाव मिलने वालों पर नहीं होने देना चाहिये। परिस्थितियां चाहे जितनी विषम हो जायें, अपना सन्तुलन बनाए रखते हुए तनावग्रस्त न हों क्योंकि इससे कार्य क्षमता प्रभावित होती है और हम दूसरों पर अपना प्रभाव छोडऩे में असफल रहते है। मानसिक तनाव व असन्तुलन की स्थिति से बचने के लिये अपने दैनिक कार्यों एवं प्राथमिकताओं को तय करें जिससे उन्हें समय पर तनाव रहित वातावरण में पूरा किया जा सके। कार्यक्षमता व आत्मविश्वास बढ़ाने के लिये कुछ रूचियां विकसित करें जैसे-प्रात: कालीन भ्रमण, आराम करना, मनोरंजक गतिविधियां, अच्छा साहित्य पढऩे की आदत डालना। मादक व उत्तेजक पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें।

किसी भी कार्य में दूसरों द्वारा सुझाए गए सुझावों का सम्मान करें किंतु वही करना चाहिए जो हमें अच्छा या उचित लगता हो, हमारी क्षमतानुसार हो। हमेशा प्रसन्न रहें एवं अपने सम्पर्क में आने वालों के साथ प्रसन्नतापूर्वक रहें व किसी की निंदा कभी नहीं करें।

अपनी विद्या, बुद्धिबल व धन आदि का घमंड न कर हमेशा शिष्ट व्यवहार को अपनाएं एवं मृदुभाषी बनें। यदि कोई भी महिला इन सुझावों को अमल में लाती है तो इसमें कोई शक नहीं कि उसका व्यक्तित्व निर्माण व विकास दूसरों की तुलना में बेहतर होगा।

क्यों न आज से ही हम अपने व्यक्तित्व निर्माण व विकास की प्रक्रिया को सन्तुलित बनाकर सभ्य समाज में अपना उच्च स्थान बनाने का रास्ता तैयार करें।

- नरेंद्र गढिय़ा

कई कारणों से बढ़ रहा है पथरी का खतरा

आधुनिक जीवन शैली के चलते कई ऐसे कारण बढ़ गए हैं जो पथरी के खतरे को बढ़ा रहे हैं। अधिक देर तक कुर्सी पर बैठे रहने, काम के दबाव, पानी कम पीने एवं पेशाब को रोकने के कारण पथरी का खतरा बढ़ गया है। धूम्रपान, नशापान एवं साफ्ट ड्रिंक्स पथरी के खतरे को बढ़ा रहे हैं। चूना पत्थर वाले इलाके के पानी में कैल्शियम की मात्रा, फास्ट फूड की बहुलता के कारण पथरी का खतरा बढ़ गया है। दवाओं के अधिक सेवन एवं व्यायाम की कमी के कारण भी पथरी की शिकायत लोगों में बढ़ी है। गोली के रूप में कैल्शियम एवं पान, गुटके व तम्बाकू आदि में चूने के उपयोग के कारण पथरी विकसित होने का खतरा बढ़ा है। तेज गर्मी के कारण शरीर के द्वारा पानी का खर्च बढ़ा जबकि तुलना में सेवन किए गए पानी की मात्र नहीं बढ़ी। यह भी पथरी बनने के खतरे को बढ़ा रहा है।

- सीतेश कुमार द्विवेदी

Share it
Top