महत्त्वाकांक्षा का शिकार होती युवतियां

महत्त्वाकांक्षा का शिकार होती युवतियां

महत्त्वाकांक्षा रखना और पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना बुरा नहीं है लेकिन इसके लिए जो रास्ता अपनाया जाता है वो अक्सर गलत होता है। पुरूषों से होड़ करती, उन्हें नीचा दिखाने का प्रयत्न करतीं या उन्हें अपने प्रेमजाल में फंसाकर उंगलियों पर नचाने की ख़्वाहिश रखती ये युवतियां भूल जाती हैं कि पुरुष साइकोलॉजी कैसी है?

उच्च महत्त्वाकांक्षा दरअसल एक मानसिक रोग है। पहले भी था, आज भी है। औरतों में यह ज्यादा तबाही लाता है। पहले जब राजा महाराजाओं के जमाने थे, उच्च महत्त्वाकांक्षाओं को लेकर रानी महारानियां षडयंत्र रच कर सत्ता हथियाना चाहती थी। राजा के दिल पर एकछत्र राज्य कर दूसरी रानियों को कमतर बनाये रखने के लिए छल प्रपंच रचा करती या उन्हें मरवा देतीं।

आज उच्च महत्त्वाकांक्षा लिए युवतियां पुरूषों को अपनी सीढ़ी बना रही हैं अपनी जवानी और रूप प्रतिभा के जाल में फंसाकर। वे प्रतिभा का दुरूपयोग करने से नहीं चूकती।

महत्त्वाकांक्षाओं के आगे आज इन युवतियों के लिए चरित्र गौण हो गया है। अपनी बहनों का हश्र देखकर भी वे कुछ सीखने समझने को तैयार नहीं।

देर रात तक क्लबों में शराब पीकर पराए मर्दों के साथ आलिंगनबद्ध होकर नाचना, उन्हें किस करके उनका एनिमल जगाना, फिर सती सावित्री का ढोंग रचाकर उन्हें सीखचों के पीछे बंद कराने के लिए ज़मीन आसमान एक कर पब्लिसिटी बटोरना, टी वी में इंटरव्यू देना अपनी फोटो छपवाकर लोगों की सहानुभूति प्राप्त करना, ये युवतियां सारी संस्कृति दूषित कर रही हैं जिसका खमियाजा कुछ निरीह लड़कियों को भुगतना पड़ रहा है। ये भटकी युवतियां पुरूष मानसिकता के साथ खिलवाड़ करने पर तुली हैं जिसका समाज पर जो असर पड़ रहा है आगे चलकर और भी प्रलयंकारी होगा।

औरत-औरत ही रहेगी, वो लाख ऊंची छलांगें लगाने की कोशिश कर ले। अभिसारिका बनकर वो कभी मेनका का रूप धरती है, कभी स्टिंग ऑपरेशन में जुट जाती है। अब उसका यही रूप ज्यादा मुखर हो रहा है। यह कैसी नारी मुक्ति की उड़ान है। ये कैसा सशक्तिकरण है पुरूषों को सुधारने के लिये। पहले क्या उन्हें स्वयं नहीं सुधरना होगा। बेटे को अच्छे संस्कार एक अच्छी मां ही दे सकती है। महत्त्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए हर तरह से समझौता करने वाली घटिया मानसिकता रखने वाली स्त्री नहीं।

अपराधी को सजा देते हुए कानून ऐसी स्त्रियों को भी न बख़्शे, तभी पूर्ण न्याय होगा। ऐसी स्त्रियों को जिन्होंने पुरुष को अपराध के लिये उकसाया था और अब अपने को प्रताडि़त घोषित करती हैं सजा मिलनी चाहिए।

- उषा जैन 'शीरीं'

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