वह नहीं सुनते आपकी

वह नहीं सुनते आपकी

पत्नियों को यह शिकायत रहती है कि उनके पति बदल गए हैं। अब वे पहले जैसे नहीं रहे हैं। अब वे उनकी बात बिल्कुल नहीं सुनते। बहरहाल, यदि आप चाहती हैं कि आपके पति आपकी बात सुनें और आपका दांपत्य जीवन पहले जैसा सुखी रहे तो ध्यान दें कुछ बातों पर:-

अपने मन की कोई भी बात कहने से पहले उनका मूड देख लें। यदि उनका मूड किसी कारण खराब है तो आपकी बातें उन्हें बुरी लग सकती हैं। उस समय उनसे कोई भी बात डिस्कस न करें।

बात करते समय सहज रहने की कोशिश करें। बातें सिर्फ कहने के लिए नहीं होती। उनमें अपनापन व प्यार भी झलकना चाहिए। जो बात कहनी है सीधे कहें। बेवजह बात को घुमाएं नहीं अन्यथा आपकी बात सुनने में उनकी रूचि समाप्त हो सकती है।

हो सके तो बात करने से पहले उचित समय व उचित स्थान देख लें। कहीं भी और कभी भी बात शुरू न करें।

किसी एक बात के पीछे हाथ धोकर न पड़ें। इससे बात का महत्त्व कम हो सकता है।

उनके साथ बैठें तो कुछ और बात भी कहें। अपनी फरमाइश पर अक्सर जिद न करें और उन्हें भी उस मुद्दे पर कुछ कहने का अवसर दें।

बोलते समय यह न भूलें कि आप उनसे कुछ कह रही हैं और कुछ मनवाना चाहती हैं, इसलिए आप अपनी बोलचाल पर नियंत्रण रखें।

जो भी कहें, स्वयं कहें। किसी अन्य का सहारा न लें।

अपनी बात मनवाने के लिए उनकी तुलना किसी और से न करें। हो सकता है कि इससे बात बिगड़ जाए।

गलती हर किसी से हो सकती है, इसलिए किसी काम के समय पर पूरा न होने पर उन्हें खरी-खोटी न सुनायें और न ही उनकी बात को अनसुना करें।

कुछ काम ऐसे भी हैं जिन्हें आप उनके बिना कर सकती हैं। इस तरह के कार्यों के लिए उन पर निर्भर न रहें।

उनसे कुछ जबरदस्ती उगलवाने की कोशिश न करें क्योंकि आपका ऐसा व्यवहार उनके दिल को चोट पहुंचा सकता है और ऐसा करने से तनाव भी पैदा होता है।

अपनी बात मनवाने के लिए हर बात पर जीने-मरने व जाने की धमकी न दें और न ही बार-बार रोएं। नोंक झोंक या आपसी तकरार में मुंह फुलाकर न बैठें। हमेशा यही उम्मीद न रखें कि वही आपको मनाएंगे।

दूसरों के सामने उनकी कमियां उजागर न करें। उनके बोलने या उनकी भाषा अथवा उच्चारण में कमी का मजाक न बनायें।

जब भी वे कहीं जाने की जल्दी में हों या देर सबेर थके हारे घर लौटें तो उस समय अपनी मांगों का चि_ा खोलकर न बैठें।

- बबीता

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