त्वचा के अनुरूप ही करें देखभाल

त्वचा के अनुरूप ही करें देखभाल

त्वचा बाह्म संपर्क में अधिक रहती है इसलिए यह हर मौसम में प्रभावित होती है चाहे सर्दी, गर्मी या बरसात क्यों न हो। इसी प्रकार मौसम के बाद वातावरण के प्रभाव भी सीधा त्वचा पर पड़ता है तेज धूप, आंधी, खुश्क हवा, प्रदूषण आदि भी त्वचा पर सीधा प्रभाव डालते हैं। हवा, प्रदूषण आदि भी त्वचा पर सीधा प्रभाव डालते हैं। अगर हम अपनी त्वचा की सही देख रेख नहीं करेंगे तो त्वचा धीरे-धीरे निस्तेज, ढीली, दागदार, झुर्रियों से भरपूर होती जाएगी और हम अपनी उम्र से कहीं बड़े लगने लगेंगे। इसलिए त्वचा की देखरेख करना हमारा कर्तव्य है ताकि हम अपनी त्वचा को मौसम और वातावरण के अनुसार दमकता हुए बनाए रख सकें। त्वचा मुख्यरूप से 4 भागों में बांटी जाती है जैसे प्राकृतिक त्वचा, तैलीय, खुश्क और मिश्रित त्वचा। हर रूप की त्वचा की देखभाल कुछ अलग तरीके से की जाती है पर पहले हमें जानना होगा कि हमारी त्वचा का सही रूप क्या है।

प्राकृतिक त्वचा:- प्राकृतिक त्वचा वो होती है जो दाग धब्बों, मुंहासों से रहित, साफ-सुंदर, स्वस्थ, मुलायम, चमकदार होती है। यह त्वचा सबसे उत्तम त्वचा होती है। इसकी पहचान है लचीलापन और ताजगी।

तैलीय त्वचा:- तैलीय त्वचा चिकनी और चमकदार होती है पर रोमछिद्र ऐसी त्वचा में थोड़े-बड़े होते हैं और ब्लैक हेडस इस त्वचा पर होते हैं। इन सब कारणों से त्वचा पर मुंहासे शीघ्र आते हैं। तैलीय त्वचा कुछ मोटी और सख्त होती है। प्राकृतिक त्वचा से एकदम भिन्न लगती है।

खुश्क त्वचा:- खुश्क त्वचा बहुत पतली और पारदर्शी होती है। इसकी ऊपरी परत खुश्क और पतली होने के कारण अक्सर जल्दी से झड़ जाती है और त्वचा में खिंचाव बना रहता है। इस त्वचा पर झुर्रियों और ढीलापन का प्रभाव जल्दी आता है जिससे इंसान अपनी उम्र से बड़ा दिखता है। ऐसी त्वचा तेज धूप बर्दाश्त नहीं कर पाती। जल्दी लाल दिखने लगती हैं। ऐसी त्वचा वालों को साबुन से चेहरा कम से कम धोना चाहिए।

मिश्रित त्वचा:- ऐसी त्वचा वालों को 'टी जोन' त्वचा वाले भी कहते हैं क्योंकि इनके चेहरे का कुछ भाग तैलीय और कुछ भाग खुश्क या प्राकृतिक त्वचा वाला होता हैं जैसे माथा, नाक, ठोड़ी का भाग और गाल, आंखों के आस पास त्वचा खुश्क होती है। इस प्रकार की त्वचा की सफाई विशेष तरीके से करनी चाहिए।

आइए देखें इनकी देखभाल किस तरह से की जाए ताकि त्वचा स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बनी रहे।

प्राकृतिक त्वचा और देखभाल:- ऐसा नहीं है कि अगर आपकी त्वचा प्राकृतिक है तो उसे देखभाल की आवश्यकता नहीं। अगर हम उसकी उचित देखभाल नहीं करेंगे तो ऐसी त्वचा शीघ्र ही खुश्क हो सकती है। इसलिए इस त्वचा को भी सफाई और सुरक्षा की आवश्यकता होती है। गर्मियों में स्किन टॉनिक का प्रयोग करें और सर्दियों में माइश्चराइजर का प्रयोग अवश्य करें ताकि आपकी प्राकृतिक त्वचा की नमी वातावरण और प्रदूषण चुरा न ले।

तैलीय त्वचा और देखभाल:- तैलीय त्वचा नाम से ही पता चलता है कि त्वचा की ग्रंथियां बहुत चुस्ती से रोमछिद्रों से तेल को निकालती रहती हैं। ऐसी त्वचा वाले गुनगुने पानी से दिन में दो बार अवश्य चेहरा धोएं। साबुन के लिए मेडिकेटिड साबुन का ही प्रयोग करें। मेकअप कम से कम करें। अगर कभी करना भी पड़े तो समारोह से आते ही मेकअप साफ कर लें। चेहरा धोने के बाद एस्ट्रिंजेंट लोशन लगा लें। ऐसी त्वचा को मसाज की आवश्यकता नहीं होती और न ही स्क्रब की। कभी कभी भाप या ओजोन लें। उसके बाद पैक लगाना न भूलें नहीं तो रोमछिद्र अधिक खुल जाएंगे। तैलीय त्वचा के लिए खीरा पैक, नींबू पैक, वैज पील पैक लगाएं। पानी अधिक पिएं, तले भोज्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें। चेहरे पर संतरे टमाटर, नींबू, खीरे आदि का रस लगा सकते हैं। चाहें तो चेहरे पर अंडे की सफेदी का लेप भी लगा सकते हैं।

खुश्क त्वचा और देखभाल:- खुश्क त्वचा पर एस्ंिट्रजेंट का प्रयोग न करें। त्वचा पर माश्चराइजर का खुला प्रयोग करें। चेहरे को बार-बार नहीं धोना चाहिए नहीं तो प्राकृतिक नमी खत्म हो जाएगी और त्वचा अधिक खुश्क व बेजान लगेगी। ऐसी त्वचा पर साबुन का कम प्रयोग करें। अगर करना भी पड़े तो ग्लिसरीन युक्त साबुन प्रयोग में लाएं।

त्वचा की दैनिक सफाई के लिए क्लीजिंग मिल्क का प्रयोग करें। खुश्क त्वचा के लिए कच्चा दूध, शहद, केला, पपीता, बादाम रोगन और पील आफ मास्क का प्रयोग करना चाहिए। पानी खूब पिएं। तेज धूप और ठंडी हवाओं से त्वचा को बचा कर रखें।

मिश्रित त्वचा और देखभाल:-

मिश्रित त्वचा की सुरक्षा करना थोड़ा मेहनत का काम है। तैलीय त्वचा की देखभाल तैलीय त्वचा अनुसार करनी पड़ती है और खुश्क त्वचा की देखभाल खुश्क त्वचा के अनुसार करनी पड़ती है।

विशेष ध्यान रखने के अतिरिक्त खान-पान व रहन सहन का भी ध्यान रखना पड़ता है। दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी कम से कम पिएं। पेट साफ रखें। रेशेदार फल सब्जियां खाएं। हरी सब्जियां, दूध और दूध से बने उत्पाद (दूध डबल टोंड होना चाहिए) खाएं। 7 से 8 घंटे की नींद लें। प्रात: ताजी हवा में सैर करें। हो सके तो प्राणायाम भी करें। मानसिक तनाव से दूर रहें। त्वचा की सफाई पर विशेष ध्यान दें।

- सुनीता गाबा

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