बेफिक्र रहें गर्भावस्था में

बेफिक्र रहें गर्भावस्था में

गर्भावस्था होता तो एक नाजुक दौर है पर साथ ही एक औरत की जिंदगी के बहुत ही महत्त्वपूर्ण व न भूलने वाले पल होते हैं। नौ महीने के हर पल को वह महसूस करती है जब उसके अन्दर एक नन्हा सा बच्चा अपना रंग रूप ले रहा होता है।

कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौर में खिल उठती हैं क्योंकि वे स्वस्थ व अच्छा महसूस करती हैं। इस दौर में महिला जितनी खुश रहती हैं उसका प्रभाव शिशु पर अच्छा पड़ता है। अगर आप भी इस नाजुक दौर की ओर कदम बढ़ा रही हैं तो अपने स्वास्थ्य के प्रति कुछ एहतियात बरतें ताकि आप एक स्वस्थ शिशु की मां बनने का गौरव पा सकें:-

- नियमित चेकअप करवाएं। अपनी डॉक्टर से समय-समय पर चेकअप करवाती रहें। प्राय: चेकअप गर्भधारण करने के पश्चात हर मास होते हैं पर 7 मास के पश्चात् यह साप्ताहिक क्रम में होते हैं।

- अपनी डॉक्टर से बिना पूछे किसी भी दवाई का सेवन न करें चाहे वह दवाई सिर दर्द की हो या मल्टीविटामिन। सिर्फ आपकी डॉक्टर ही आपको निश्चित तौर पर बता सकती है कि आपकी आवश्यकता क्या है। खुद अपनी डॉक्टर न बनें।

- इस अवस्था में आपका वजन बढ़ता है क्योंकि आपका शिशु आपके अंदर बढ़ रहा होता है, इसलिए समय-समय पर वजन की जांच की जाती है ताकि बच्चे की बढ़ोत्तरी का पता चलता रहे। सामान्यत: प्रारम्भिक 3 महीनों में वजन 1 किलो से अधिक नहीं बढ़ता। उसके पश्चात के 3 महीनों में 3 किलो और बाद में हर महीने 2 किलो की दर से बढ़ता है पर यह दर हर मां में भिन्न होती है। अपनी डॉक्टर से परामर्श लेते रहें और उसके परामर्शानुसार अपनी डाइट को आवश्यकता होने पर बढ़ाएं ताकि आपके शिशु का स्वास्थ्य व वजन सही रहे।

- गर्भावस्था में सही डाइट लेना बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे मां व शिशु दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। जो महिलाएं सही आहार का सेवन नहीं करती, उन्हें व उनके शिशु को बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आपके भोजन में निम्न का होना बहुत आवश्यक है।

- दूध में कैल्शियम होता है जो मजबूत हडिड्यों के लिए बहुत आवश्यक है इसलिए मिल्क शेक, दही, चीज़ आदि का सेवन करें।

- प्रोटीन के अच्छे स्रोतों मछली, अण्डे, चीज़ आदि का सेवन करें।

- सब्जियों में आयरन और विटामिन होते हैं। सब्जियों को सलाद के रूप में भी लें। बीन्स, गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी सब्जियों पालक आदि का सेवन करें।

- प्रतिदिन अनाज का सेवन करें। ब्राउन ब्रेड का सेवन करें क्योंकि इसमें विटामिन बी होता है।

- विटामिन सी युक्त फलों का सेवन करें। प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी भी अवश्य पिएं।

- आवश्यकता से अधिक भोजन न लें। इसके अतिरिक्त जंक फूड जैसे पैटीज, पीज़ा, कुकीज, चिप्स आदि का सेवन कम करें। काफी का सेवन भी कम करें।

- धूम्रपान से दूर रहें। धूम्रपान से गर्भपात होने की संभावना बढ़ जाती है। शिशु पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। अल्कोहल का सेवन भी न करें क्योंकि इससे बच्चे के मस्तिष्क पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है।

- इस समय आप जितना एक्टिव रहेंगी आप अच्छा महसूस करेंगी। इसलिए सैर करें, व्यायाम करें। शारीरिक व मानसिक रूप से एक्टिव रहें।

- इस समय बहुत कसे वस्त्र न पहनें। इससे आप स्वयं को कम्फर्टेबल महसूस नहीें करेंगी।

- बहुत ऊंची एड़ी के सेंडिल या चम्पल न पहनें। ये आपके लिए खतरनाक हो सकते हैं।

- अपने दांतों की तरफ भी ध्यान दें। आप किसी दंत विशेषज्ञ से सलाह लें। कैल्शियम की अतिरिक्त मात्रा की आवश्यकता होने पर वह आपको उसे लेने की सलाह देगा।

- स्टे्रच माक्र्स से छुटकारा पाने के लिए आप पहले से ही हल्के हाथों से अपने पेट की बेबी आयल या ऑलिव आयल से मसाज करें।

- अपने पैरों को आराम दें। बहुत देर तक खड़ी न रहें। जो काम आप बैठ कर-कर सकती हैं, उन्हें बैठ कर करें। अगर आपके पैरों या टांगों में सूजन है तो तुरन्त अपनी डॉक्टर को बताएं।

- कोई भी मेडिकल चेकअप जैसे एक्सरे आदि डॉक्टर के परामर्श के बिना न कराएं। अधिक एक्सरे बच्चे में बर्थ डिफेक्ट व कैंसर की संभावना को बढ़ाते है।

- सबसे जरूरी है इस अवस्था में खुश रहना व तनाव मुक्त रहना।

- सोनी मल्होत्रा

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