दांपत्य जीवन में संकट के मोड़

दांपत्य जीवन में संकट के मोड़

कहा जाता है कि पुरूष बेवफा होते हैं और विवाह के पश्चात् भी वह अपनी इस आदत से बाज नहीं आते पर ऐसा केवल पुरूष ही नहीं करते।

आज स्त्रियां भी एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर बनाने से पीछे नहीं हटती। हां, पुरूषों की संख्या जरूर महिलाओं से ज्यादा है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता पर पुरूष आखिर अपने वैवाहिक जीवन को स्वयं ही संकट के मोड़ पर क्यों ले आते हैं?

बहुधा पति भी विवाह संबंध बनाए रखने के लिए उतने ही इच्छुक होते हैं जितनी पत्नी पर कभी-कभी दांपत्य जीवन में ऐसे मोड़ आ जाते हैं जब पुरूष भटक जाता है। अगर दांपत्य जीवन के इन संकट बिंदुओं को समझ लिया जाए तो विवाह को टूटने से बचाया जा सकता है। वैवाहिक जीवन में अलगाव का खतरा न मंडराए, इसके लिए तनाव की अवधियों के बीच के समय खुल कर बातचीत और घनिष्ठता से अपने संबंधों को सुदृढ़ बनाएं। आइए जानें दांपत्य जीवन के संकट मोड़ों को:-

उत्तरदायित्व पडऩे पर:-जैसे ही व्यक्ति को घर के खर्चों की व्यवस्था के लिए जुटना पड़ता है उसकी सारी उमंग उत्साह खत्म हो जाता है और अगर ऐसे में किसी कारणवश कोई मुश्किल आन पड़े जैसे अचानक नौकरी का छूट जाना या अन्य कोई तो व्यक्ति और आहत हो जाता है।

ऐसे समय में अगर पत्नी से उलाहना, ताने सुनने पड़ जाएं तो आपस में तनाव पनपने लगता है और एक दूसरे के प्रति स्नेह व प्यार कम होने लगता है। अगर आपके दांपत्य पर भी ऐसा संकट मंडरा रहा है तो अपने पति की सकारात्मक ढंग से हिम्मत बढ़ाएं न कि उनकी आलोचना करें या उनके आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाएं।

दांपत्य में ऊब की स्थिति:- जब आपके रिश्तों में बोझिलपन आने लगे, तब भी स्थिति गंभीर हो सकती है। कई बार पत्नियां बच्चों में इतनी व्यस्त रहती हैं कि पति के लिए उनके पास समय ही नहीं बचता। ऐसी स्थिति में दोनों के बीच दूरी आने लगती है और अगर इस बीच अगर आपके पति को बाहर किसी की हमदर्दी मिल गई तो संबंध बनते देर नहीं लगेगी। इसलिए बच्चे के पालन-पोषण में व्यस्तता के बावजूद अपने पति से घनिष्ठता बनाए रखें।

आपस में दूरी बढऩा:- जब आपस में दूरी बढऩे लगती है तो पति-पत्नी एक दूसरे को हमराज बनाना छोड़ देते हैं और नए हमराजों की तलाश करते हैं और नए हमराजों से दोस्ती प्रेम प्रसंगों का रूप ले लेती है, इसलिए सदैव एक दूसरे के हमराज बने रहने की कोशिश करें।

सेक्स संबंधों में नीरसता:- सेक्स वैवाहिक जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता है और जब तक ये संबंध सरस रहेंगे, वैवाहिक जीवन में घनिष्ठता व साहचर्य रहेगा। इन संबंधों में नीरसता आपके बीच दूरी ला सकती है।

एक दूसरे को समय न देना:- आज पति-पत्नी दोनों ही बाहर काम करने जाते हैं। सारा दिन तो एक दूसरे से अलग रहते हैं और अगर घर वापिस लौट कर भी दोनों एक दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते तो आपस में प्रेम कम होने लगता है।

कई बार पत्नियां अपने कैरियर को लेकर इतनी व्यस्त रहती हैं कि घर, पति व बच्चों तक को परवाह नहीं करती। ऐसे में अक्सर परिणाम तलाक तक पहुंच जाता है। कैरियर तो बन जाता है पर उस समय उनके साथ खुशी बांटने वाला कोई नहीं होता। पति भी ऐसी गैर जिम्मेदार पत्नियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं रखते।

दांपत्य संबंधों को सृदृढ़ बनाने के लिए जरूरी है वे बदलाव जिनसे संबंध सुधर सकते हैं। उन्हें स्वयं में लाने की कोशिश करें। अगर आपके पति को आपसे कोई शिकायत है तो उनकी शिकायत को सुनिए और उनका स्पष्टीकरण करने की भी कोशिश कीजिए।

शिकायत के बदले में शिकायत समस्या का हल नहीं बल्कि उसे और पेचीदा बना देती है। जिन नाराजगियों का हल निकल सकता है उनके कारण संबंध विच्छेद की धमकी वैवाहिक संबंध को ओछा बनाती है। अपने रिश्ते में जितनी ताजगी ला सकती हैं, लाएं। कोशिश करें कि जब भी लड़ें, एकांत में लड़ें, दूसरों के सामने नहीं। पति हो या पत्नी, एक दूसरे को कठिन परिस्थितियों से उबारने का प्रयास करें न कि एक दूसरे को ताने देकर एक दूसरे के अंहम को चोट पहुंचाएं।

एक दूसरे को अधिक से अधिक समय दें। यह मानकर चलें कि एक्स्ट्रामेरिटल अफेयर चाहे आपके पति का हो या स्वयं आपका, इसका प्रभाव आप पर चाहे अच्छा पड़ रहा हों पर आपके बच्चों के भविष्य पर इसका बहुत ही गलत प्रभाव पड़ता है और ऐसे वातावरण में वे भी भटक सकते हैं।

-सोनी मल्होत्रा

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