क्या आपके अच्छेपन का इस्तेमाल हो रहा है

क्या आपके अच्छेपन का इस्तेमाल हो रहा है

मानव स्वभाव है जो करता है उसका इस्तेमाल सब कोई करता है। जिसका इस्तेमाल होता है उसे कुछ समय बाद बोध होता है कि मेरे भलामनसाहत का प्रयोग कुछ ज्यादा ही हो रहा है। ऐसे में वह स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है। झुंझलाहट होने लगती है और अंदर ही अंदर कुढ़ता रहता है और सोचता है मैं क्यों इस्तेमाल होता हूं। यह भी स्वाभाविक है क्योंकि हर किसी का स्वभाव अलग होता है, उसे बदलना आसान नहीं होता। वैसे तो अच्छा स्वभाव, सबकी मदद करना, सबकी इज्जत करना, प्यार देना, तमीज से पेश आना, धोखा न देना, आभार व्यक्त करना अच्छे गुण हैं। समस्या ऐसे स्वभाव वाले को तब आती है जब इतनी सी अच्छाई आपको दुखी करने लगती है, इसका नुकसान भी आपको ही होता है। आइए कुछ बातों पर ध्यान देकर हम अपने आप को थोड़ा बदल सकें और अपना सम्मान बचा सकें।

ईमानदार रहें:- ईमानदार रहें पर स्वयं को ठगा न महसूस करें। इस बात को समझें कि दूसरे मात्र आपका फायदा ही उठा रहे हैं या उन्हें सच में आपकी मदद की आवश्यकता है। उतनी मदद करें जितनी उन्हें वास्तव में जरूरत हो। स्वयं को थकाएं नहीं क्योंकि थकने से आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है और आपको क्रोध अधिक आ सकता है। जब ऐसा लगने लगे तो शांत स्वभाव से अपनी बात रखें। भलाई न छोड़ें, नुकसान न उठाएं, शांत रहें आरै अपने प्रति ईमानदार रहें।

स्वयं को कमजोर न समझें:-स्वयं को कमजोर मानने पर लोग आसानी से आपका इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। स्वयं को कमजोर न समझें, स्वयं को मजबूत और समझदार बनाने का प्रयास करें। अपने अंदर के गुणों को बाहर लाएं और मन में विश्वास जगाएं कि मैं किसी से कम नहीं हूं। मेरी एक मित्र जब विवाह कर बड़े परिवार में आई, परिवार काफी बड़़ा था और वह छोटे और मध्यम स्तर के परिवार से आई थी। स्वयं को प्रारंभ में दबा हुआ महसूस करती थी क्योंकि वह काम में इतनी चुस्त नहीं थी जितनी कि सास। बस फिर क्या, परिवार के सभी सदस्य आजतक उसका प्रयोग करते हैं क्योंकि वह किसी को न नहीं कह सकती और इसी के चलते वह अपने पति और परिवार के लिए उतना नहीं कर पाती जितना करना चाहिए। मन ही मन उसे घुटन होती है। ऐसी परिस्थिति में अपनी हैसियत अनुसार अपना बेस्ट दे कर जरूरत पडऩे पर मदद करें पर स्वयं को मजबूत बनाकर रखें।

कुछ इन्हें भी अपनाएं:-

- अपनी प्राथमिकताएं तय करें।

- अगर आपने किसी काम की जिम्मेदारी ली है तो अपने मन को शुरू से समझा कर जिम्मेदारी लें। अगर दूसरा मदद कर दें तो ठीक, नहीं तो मुझे ही करना है। तभी मन शांत रहेगा।

- धैर्य बना कर रखें, हक की बात करें। शांत स्वभाव से बोलने पर शायद जो आप चाहते हैं मिल जाए, अगर क्रोध करेंगे तो कुछ भी हासिल नहीं होगा बल्कि सब किया कराया भी बेकार हो जाएगा।

- स्वयं को न हीन समझें, न ही दूसरों की हमेशा शिकायत करते रहें।

- स्वयं को बदलने का प्रयास करें दूसरे को बदलने की उम्मीद न रखें तभी आप शांत रह पाएंगे। सोचने का नजरिया स्वयं को ही बदलना पड़ता है।

- कठिन रास्तों पर स्वयं चलने का प्रयास करें, किसी और पर निर्भर न रहें तभी आप आपका आत्मसम्मान बचा रह सकता है।

- जो लोग आपके साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं उनसे सीमित व्यवहार रखें।

- कामों को योजनाबद्ध तरीके से करें पहले कौन सा, फिर कौन सा। अपने लिए समय निकालें ताकि आप अपने शौक भी पूरे कर सकें।

- नीतू गुप्ता

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