यदि आप बनना चाहें आदर्श बहू

यदि आप बनना चाहें आदर्श बहू

विवाह के बाद हर लड़की को अपना मायका छोड़कर ससुराल जाना पड़ता है। यह नया घर तथा उसके सदस्य बिलकुल अजनबी होते हैं। अब आवश्यकता होती है ससुराल के लोगों सास, ससुर, पति, ननद, देवर, जेठानियों तथा जेठ आदि के बारे में उनकी पसंद नापसंद जानने की।

एक समझदार बहू वही कही जायेगी जो ससुराल में पैर रखते ही कुछ दिनों के अंदर धीरे धीरे अपने व्यवहार से सभी का मन जीत ले। सबसे पहले उसे अपने पति के दिल को जीतना होगा।

इसके लिए उसकी पसंद का खाना बनाना होगा। उसके मन पर अधिकार जमाने के लिए उसके पेट के रास्ते से जाना होगा। सुबह अपने पति को ऑफिस या दुकान आदि जाने के पहले नाश्ता कराना तथा टिफिन आदि देकर भेजना होगा। उसे सुबह सवेरे सबसे पहले जागना होगा। मायके में चाहे वह देर से उठती रही हो लेकिन ससुराल में उस आदत को छोडऩा होगा।

सुबह सवेरे उठकर सास ससुर तथा अन्य सदस्यों को समय पर चाय नाश्ता देना होगा। मुख्य द्वार पर पड़े दैनिक समाचार पत्र को अपने पति या ससुर को देना होगा। प्राथमिकता उसे देनी होगी जिसकी आदत सबसे पहले पढऩे की हो।

यदि उसके सास ससुर बीमार हैं तो उनकी ठीक से तीमारदारी करनी होगी तथा समय पर दवाई खिलानी होगी। यदि देवर या ननद विद्यार्थी हों तो उन्हें भी नाश्ता देकर स्कूल भेजना होगा। यदि ससुराल में कोई व्यापार होता है तो उसमें भी यथा संभव दिलचस्पी लेनी होगी।

यदि ननद देवर विवाह योग्य हैं तो उसके बारे में प्रयत्न करना चाहिए। इन सब बातों की ओर ध्यान देने से सास ससुर समझेंगे कि हमें कितनी समझदार बहू मिली है हमारी जिम्मेदारियों को पूरा करने में हमारा हाथ बटा रही है।

सास मां की जगह तो नहीं ले सकती लेकिन जहां तक संभव हो सके, उसे मां जैसा प्यार करना चाहिए। ससुराल के अन्य सदस्यों को वैसा ही प्यार व सम्मान देना चाहिए जैसा कि वह मायके में देती थी।

- एस.के. त्रिपाठी

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