घर परिवार: बच्चों का पालन पोषण कैसे करें

घर परिवार: बच्चों का पालन पोषण कैसे करें

जीवन की महत्त्वाकांक्षाएं बालकों के रूप में आती हैं। प्रत्येक बालक यह संदेश लेकर संसार से आता है कि ईश्वर अभी मनुष्यों से निराश नहीं हुआ। आज का बालक कल के मनुष्य का पिता और जनक बनकर आता है।

माताओं को अपने बच्चों के संस्कार से पहले बचपन में उनके पालन पोषण एवं स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि शुद्ध विचारों से ओत प्रोत बच्चा सदैव प्रेम का पात्र बनेगा। शिशु की दिनचर्या में आप निम्नलिखित बातों पर ध्यान रख कर अपने बच्चे को उज्ज्वल भविष्य दे सकती हैं।

शिशु को नियत समय पर विभिन्न रोगों के टीके अवश्य लगवायें। बिना डॉक्टर की सलाह से उसे कोई टानिक, दवाएं मत दें और न ही सर्दी के दिनों में ब्रांडी, जायफल, सोये का पानी और अन्य पदार्थ किसी के परामर्श पर दें। बच्चों को एक दूसरे की दवा देना भी गलत है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

बच्चों के शरीर में कमी वाले विटामिन निश्चित दें ताकि स्वास्थ्य की वृद्धि और विकास होता रहे। बच्चों को कभी अधिक आहार मत दें।

आहार और दूध से सम्बन्धित बर्तन स्वच्छ रखें। बच्चे के दूध की बोतल दिन में चार बार गर्म पानी में उबालें और जब शिशु दूध पी ले तो बोतल का ढक्कन खोल कर धोकर रखें।

बच्चों को प्रतिदिन स्नान अवश्य करायें और उनके नाक, कान, आंख और गुप्त अंगों की सफाई भी अवश्य करें। ऋतु के अनुसार कपड़े पहनाएं। गंदा करने की स्थिति में तुरन्त बिस्तर एवं वस्त्र बदल दें।

बच्चों को नियमित समय पर हवादार प्रकाश वाले कमरों में सुलायें। नींद में बच्चे के पास चीखना या तेज आवाज करना गलत है। बच्चे को तेज प्रकाश की ओर मत देखने दें।

बच्चों को गोद में उठाने, कूदाने से उनकी शारीरिक कसरत हो जाती है मगर बच्चे को ऊंचा-इधर-उधर न उछालें। इससे उसके मस्तिष्क पर कुप्रभाव पड़ सकता है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

बच्चों को समय समय पर फलों का जूस, हरी सब्जियां और उबले आलू आदि दें। बच्चों को अण्डा, आइसक्रीम, चाकलेट आदि अधिकता में देना बेहद हानिकारक है।

बुखार, दस्त या सर्दी लग जाने पर बच्चों का तुरन्त उपचार करें। बीमारी के समय भी बच्चों को हल्का आहार अवश्य दीजिए ताकि शरीर की मांसपेशियां कमजोर न हों।

बच्चों की तोतली, अस्पष्ट बातों को अनदेखा न करें बल्कि उनके बोलने, चलने, हंसने और खेलने को प्रोत्साहन दें।

बच्चों के पाउडर, तेल, साबुन, तौलिया और अन्य वस्तुओं को घर के अन्य लोगों से अलग रखें।

जब बच्चा हर बात को समझने लगे तो उसके सामने अपशब्द न कहें और न ही पारिवारिक मन मुटाव करें। आज्ञा पालन न करने की स्थिति में बच्चे को धमकायें नहीं बल्कि प्यार से समझाएं।

बच्चे को सोते समय महापुरूषों और वीर बच्चों की कहानियां सुनायें। बच्चों के सामने गलत हरकतें न करें एवं अश्लील चित्रों वाला साहित्य न पढ़ें। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

स्कूल में प्रवेश के बाद अपने कर्तव्य की इतिश्री मत समझें। बच्चों को स्वच्छ वस्त्रों में स्कूल भेजें और रोज उनके होम वर्क की जांच करें। पेरेंटस टीचर मीटिंग पर बच्चे के स्कूल अवश्य जाएं ताकि शिक्षक बच्चे पर विशेष ध्यान दें और बच्चा भी पढ़ाई के प्रति सजग रहे।

बच्चे की शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं की अवहेलना मत करें। जेब खर्च देने के बजाए अच्छा पौष्टिक भोजन और खेलने की सामग्री दें। बच्चों को कभी-कभी पिकनिक या मनमोहक स्थान पर घुमाने ले जाएं।

बच्चों की हर शंका का उचित समाधान अवश्य करें और जब बच्चे स्कूल से वापस घर लौटें तो मां अवश्य उपस्थित रहे। रविवार के दिन बच्चों को धार्मिक सत्संग में भी ले जाना उनके चरित्र को सुदृढ़ करेगा।

परीक्षा में विशेष सफलता प्राप्त करने पर बच्चे को पुरस्कार देना अच्छा गुण है। सीनियर सेकेंडरी के बाद बच्चे का लक्ष्य निर्धारित कर उसे कड़ी मेहनत का पाठ दें। आपका बच्चा राष्ट्र का मेहनती पुरूष बन कर आपके और समाज के भविष्य को नई दिशा देगा।

- ओमदत्त आर्य

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