नारी देह में सिमट गया है प्रेम

नारी देह में सिमट गया है प्रेम

प्यार जवानी का वह हसीन मोड़ है जो भावनाओं में बंधा होता है। उसे महसूस तो किया जा सकता है पर स्पर्श नहीं। प्यार पूजा है, एक इबादत है। उसमें राधा सी पवित्रता और मीरा सा मिलन या लगन होती है। प्रेम कोई दो धड़कते दिलों को शांत करने का औजार नहीं। यह तो जीने का एक मकसद है, एक प्रेरणा है।

आज प्रेम शरीर रूपी ढांचे में सिमट कर रह गया है जो वासना बनकर होंठों से शुरू होकर नेत्रों में समाप्त हो जाता है। आज प्रेम किस बेदर्दी से अपनी हदें लांघ रहा है, यह एक चिंतनीय विषय है। प्रेम के मायने खत्म होते जा रहे हैं। उसे समझने, जानने और महसूस करने की इच्छा भी आज मृतप्राय: होती जा रही है।

आजादी का तात्पर्य क्या है ? आप किसी से भी पूछेंगे तो यही जवाब मिलेगा, आजाद सोच, घूमना फिरना, हर व्यक्ति, हर युवा अपनी मर्जी का मालिक, अपनी मर्जी से निर्णय लेने की स्वतंत्रता। परिवर्तन संसार का नियम है। प्रेम के मायने भी बदल गये क्योंकि आज युवा पीढ़ी किसी भी प्रकार के बंधनों में नहीं जीना चाहती। आजाद सोच और प्यार के बढ़ते दायरे से भला वह कैसे दूर रह सकती है।

अब प्यार का आधार सेक्सुअल हो चला है जो जल्दी ही दम तोड़ देता है।

बारहवीं कक्षा की छात्र शिखा अपनी ही क्लास के एक लड़के से प्रेम कर बैठी। उसने फैसला कर लिया था कि प्यार तो ठीक पर इससे अधिक अभी वह कुछ नहीं करेगी। अपनी और परिवार की मान-मर्यादा का ख्याल भी था उसे। चुंबन और आलिंगन एक साधारण बात है क्योंकि प्यार की शुरूआत में आज हर प्रेमिका को अपने प्यार के सबूत के रूप में इतना तो पहले ही देना पड़ता है वरना प्रेमी को अपनी प्रेमिका पर संदेह बना रहता है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

शिखा जिससे प्रेम करती थी, उसने कई बार शिखा से शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश की लेकिन शिखा विवाह से पूर्व कौमार्य भंग नहीं करना चाहती थी पर एक दिन शिखा मजबूर हो गयी। प्रेमी ने कसमों से बांध दिया था उसे। वह सबूत चाहता था। शिखा विवश हो उठी थी और वह हसरत जिसे उसने संजोया था, धरी की धरी रह गयी। फिर जहां एक बार संबंध बने, मौका पड़ते ही हर रोज होने लगे। पहले असहमति और फिर सहमति से, फिर अच्छा लगने लगा। पहले एक-दो बार मन को लगा था कि हम गलत कर रहे हैं फिर सब सामान्य हो गया।

आज 90 प्रतिशत युवा वर्ग के लोग प्यार में सेक्सुअल रिलेशन में विश्वास करते हैं। उसके बिना विश्वास ही नहीं कर पाते कि उनका प्यार प्यार है या मजाक। युवाओं की यही सोच शादी के बाद बर्बादी का कारण बनती है क्योंकि उनका प्रेम मन से नहीं, तन से रहता है जो विवाह के बाद तनाव का कारण बनता है। मन का प्रेम कभी मैला या फीका नहीं पड़ता पर तन का प्रेम उम्र के साथ अपना असर कम कर देता है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

एक बार मुझसे मेरे मित्रों ने कहा-यार कैसे मर्द हो, एक साल हो गया प्यार को और अभी तक कुछ नहीं। यहां 'कुछ नहीं का तात्पर्य संबंध स्थापित करने से है। मैंने अपने मित्रों को हंसकर जवाब दिया-यार मैं इन सब पर विश्वास नहीं करता। मैं उसे चाहता हूं और वह मुझे, बस इससे अधिक कुछ नहीं। उन्होंने मेरा मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। कहीं ऐसा तो नहीं कि वह किसी और से टांका भिड़ाये हो। देख यार, समझदारी इसी में है कि लड़की को कभी गले की घंटी बनाकर मत टांगो। समय के साथ चलोगे तो फायदे में रहोगे।

आज जिसका किसी से प्रेम या प्रेम में यौन संबंध न हो, उसे पुरानी सोच या सोसायटी में उचित मान सम्मान भी नहीं मिलता। आज शादी से पूर्व हर युवा का सैंकड़ों बार सेक्स संबंध स्थापित हो जाता है और इसे वे फैशन का नाम देते हैं। आज बदली मानसिकता उसे अधूरी मोहब्बत का नाम देती है जिसमें दो जिस्म एक जान न हों। प्रेमिका को सबूत के तौर पर अपना जिस्म अर्पण करना पड़ता है।

मर्द तो सदियों से लुटेरा रहा है पर स्त्री को तो स्वयं की रक्षा करनी ही चाहिए। सच्चा प्यार मन से होता है, तन से नहीं। प्रेम जो हदें पार करता है, उसे लड़कियां शायद इसलिए रोकने में असमर्थ रहती हैं क्योंकि उन्हें दोस्ती टूट जाने का भय बना रहता है। यही भय एक बड़ी गलती को जन्म देता है जिसे सारा जीवन भुगतना पड़ता है।

कौन कहता है कि प्रेम शादी का कायल है। यह जरूरी नहीं कि प्यार के बाद शादी की ही जाए। आज के युवा बिना किसी निर्णय के इतना सब कुछ कर बैठते हैं कि बाद में सिवाय पछताने के कोई चारा नहीं रहता और जिसे वह सब कुछ न्यौछावर कर देती है, वही या तो जरा से वाद-विवाद पर उस लड़की से नाता तोड़ लेता है या कॉलेज की जिंदगी को छोड़ अपनी नई दुनियां बसा लेता है।

यह सच है कि समय के साथ सब बदलता है। युवाओं की सोच भी बदलती है। प्रेम विवाह आज इन्हीं कारणों से सफल नहीं है। देह से मोह टूटते ही बनाया गया घरौंदा भी रेत की दीवार की भांति ढह जाता है। आज युवा शारीरिक संबंधों के लिए शादी तक का इंतजार करना बेवकूफी समझता है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

पर प्यार के सही मायने तो जानने और समझने ही होंगे। जिस प्यार की कोई उम्र नहीं होती, वह जिस्म का कायल नहीं है। वह तो आत्माओं का सच्चा मिलन है। एक दूसरे के मन मन्दिर में झांककर बैठकर उसे समझने और पूजने की जरूरत है। जिस प्यार को खुदा का दूसरा रूप कहा जाता है, उसका बदलता स्वरूप क्या हमारे पतन को रोक पायेगा।

मोहब्बत के नाम पर शरीर की वासनारूपी भूख मिटाने वाले कभी सच्चा प्रेम नहीं कर सकते। यदि आपके दिल में भी ऐसा कोई भ्रम है तो उसे मिटा डालिए। सच्चा प्रेम सबूत नहीं मांगता। यदि मांगता है तो वह प्रेम नहीं, जवानी का उमड़ता सैलाब है जो आपको डुबो सकता है।

- राजू गुर्जर

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