क्या विवाह महज समझौता है?

क्या विवाह महज समझौता है?

मध्यवर्ग में जहां पति पत्नी दोनों ही कामकाजी हैं, वहां पति पत्नी के मध्य तनावपूर्ण स्थिति आज आम बात होकर रह गई है। शक्की, कंजूस, फ्रस्टेट्रेड, कई प्रकार की ग्रंथियां पाले, प्रेजुडिस्ड पतियों की कमी नहीं।

प्रेम विवाह करने वालों के प्रति आम धारणा यह होती है कि वे एक दूसरे को बेहतर समझते हैं इसलिए उनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। प्यार करके विवाह करने वाले जोड़ों में जरूरी नहीं कि वे एक दूसरे की सभी आदतें पसंद करते हों। शिकायतों के पुंिलंदे और नापसंदगी के इजहार यहां भी अरेन्ज मैरिज की तरह ही रहते हैं। फर्क बस इतना होता है कि यहां लड़की का दुख दर्द बांटनेवाला कोई अपना नहंीं होता क्योंकि उसने अपनी मर्जी से शादी कर सबको नाराज कर दिया है।

उसके लिये कई बार शादी की स्थिरता प्यार न होकर मजबूरी बन जाती है क्योंकि पति की शिकायत अगर वह करती है तो वह स्वयं हंसी की पात्र बनती है इसलिए हर प्रकार से दबी कुचली जाने पर वह समझौतावादी नीति अपनाकर अपना वैवाहिक जीवन असंतुष्टि, अतृप्ति में गुजारती है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

आधुनिक और लिबरल माइंडेड होने का दावा करने के बावजूद भी पुरूष की मानसिकता आज भी नहीं बदली है जब कि सभी जानते हैं कि समय के साथ जीवन-शैली में भारी परिवर्तन आया है। स्त्री के नौकरीपेशा होने पर भी घर का काम उसी की जिम्मेदारी है।

अब चाहे डर से कहें या आर्थिक और सामाजिक दबावों के कारण या उसमें आरोपित संस्कारों की वजह से हमेशा झुककर उसे ही चलना पड़ा है।

उसे तो पग-पग पर समझौता करके चलना पड़ता है क्योंकि आज भी दुनियां पुरूषों की ही है। क्या यही है कि विवाह का असली रूप यानी कि महज एक समझौता।

मोटे व्यक्तियों को मोतियाबिंद होने की संभावना अधिक

एक शोध के अनुसार मोटे व्यक्तियों को सफेद मोतियाबिंद होने की संभावना अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार मोटे व्यक्तियों को साधारण व्यक्तियों की तुलना में गठिया होने की संभावना अधिक होती है। गठिया का कारण होता है यूरिक एसिड का रक्त में अधिक स्तर और यूरिक एसिड मोतियाबिंद के होने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मधुमेह के रोगियों को भी मोतियाबिंद होने की संभावना अधिक होती है इसलिए आंखों की सुरक्षा के लिए वजन पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है।

- उषा जैन शीरीं

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