क्या पति अच्छे होममेकर्स बन सकते हैं?

क्या पति अच्छे होममेकर्स बन सकते हैं?

आधुनिक भारत ने स्त्री पुरूष की समानता को लेकर भले ही कितनी क्रांतियां देखी हों लेकिन क्या वास्तव में स्त्री पुरूष बराबर हो पाये हैं, यह बहस का ही विषय है।

आज भी अगर कोई पति अपने को हाउस हजबैंड कहता है तो लोग उसे नीची नजरों से देखते हुए हंसी का पात्र मान बैठते हैं। बावजूद इसके कई पति पत्नी जिन्हें यह सूट करता है कि पत्नी नौकरी करे और पति घर व बच्चों को संभाले तो वे इसी तरह का लाइफ स्टाइल अपना कर चलते हैं। अनिकेत भल्ला अपने को प्राउडली 'हाउस हजबैंड' बताते हैं। उनका कहना है कि डिविजन ऑफ लेबर करते हुए आदमी औरत की बात बीच में नहीं आनी चाहिए।

खुशबू के पति भी होममेकर हैं। उसका कहना है-यह कहां का न्याय है कि औरत घर बाहर दोनों फ्रंट पर अकेली ही खटे। पति को भी घर चलाने में सहयोग देना ही चाहिए। मेरे पति घर और बच्चे संभाल लेते हैं, इसी से मैं ऑफिस का काम मन लगाकर कर पाती हूं। उनके घर संभालने में जो एक्सपर्टीज है, इससे तो मैं उनकी मुरीद बन गई हूं।

खुशबू इस मामले में खुशकिस्मत है लेकिन सभी पत्नियां पति को लेकर इतनी लकी नहीं होती। राजगोपाल की पत्नी निहारिका एक एम.एन.सी में कार्य करती है। राजगोपाल घर से ही मार्केटिंग का कार्य करते हैं। घर में रहते हुए भी उन्हें घर के किसी काम से मतलब नहीं रहता, न अपने दोनों बच्चों की कोई चिंता रहती है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

निहारिका का कहना है 'केवल शारीरिक रूप से मौजूद होने भर से किसी की ड्यूटी पूरी नहीं हो जाती। घर चलाने की जिम्मेदारी घर में मौजूद रहनेवाले को ही उठानी चाहिए। आखिर मैं भी ऑफिस काम करने जाती हूं, कोई मौज मस्ती करने नहीं।'

सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मेघा माथुर बात को अच्छे से समझाते हुए कहती हैं-यह एक तरह का 'रोल रिवर्सल' है जिसे स्वीकार पाना इतना आसान नहीं। जब बीवी ही कमाकर लाती हो तो घर खर्च के लिये उससे पैसे मांगते पति का ईगो हर्ट होता है। यहां सहनशक्ति की परीक्षा होती है। मर्दों में वैसे भी औरत के जितनी सहनशक्ति नहीं होती।

पुरूष अपने करियर को दांव पर लगाकर घर और बच्चों की देखभाल ज्यादा समय तक नहीं कर सकते। आज भी पितृसत्तात्मक परंपरा पूरी तरह नष्ट नहीं हुई है।

सरबजीत विरदी एक मीडिया प्रोफेशनल इस बात को सिरे से नकारते हैं कि केवल पुरूष को ही ब्रेडविनर होना चाहिए। उनका कहना है कि मैंने अपनी मां को बगैर माथे पर शिकन लाये सारे गृहकार्य प्लस बच्चों की देखभाल और परवरिश पूरे डिवोशन से करते देखा है। मेरी पत्नी ओला जो कि विदेशी है, अगर मोटी तनख्वाह कमाकर लाती है तो मुझे घर संभालने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेरी मां का आदर्श जो मेरे आगे है।

शादी को एक खुशनुमा सफर बनाने के लिये आपसी समझ जरूरी है। यह अहम नहीं कि कौन क्या करता है। मकसद है घर बढिय़ा तरीके से चलता रहे और परिवार में सुख शांति रहे। पति पत्नी दोनों अपना रोल अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाते रहें।

अब औरत ने अपने रोल का विस्तार कर लिया है और पुरूष को उसमें कोई ऑबजेक्शन नहीं, फिर वो चाहे परफेक्ट होममेकर बनने की दिशा में ही क्यों न हों।

- उषा जैन 'शीरीं'

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