परिवार के बीमार सदस्य की सेवा को फर्ज समझें

परिवार के बीमार सदस्य की सेवा को फर्ज समझें

व्यक्ति कितना भी खुशमिजाज हो, बीमारी अगर गंभीर और लंबी हो तो उसकी शक्ति निचोड़ के रख देती है। जिसका असर संपूर्ण परिवार पर पड़ता है।

परिवार में कई बार कोई अपंग, सदस्य होता है जिसे भावनात्मक सहारे की जरूरत ज्यादा होती है क्योंकि कोई भी छोटी सी बात उसके मन को दुखा सकती है जैसे बेचारा या बेचारी शब्द जो उसे बार-बार उसकी त्रसद स्थिति का अहसास कराते हुए उसे यह सोचने पर बाध्य करते हैं कि वह औरों से अलग है, भाग्यहीन है, नॉर्मल नहीं है।

आज के दौर में जब इंसान ज्यादा से ज्यादा खुदगर्ज और संवेदनहीन होता जा रहा है, बीमार व्यक्ति परिवार की रूखाई व उपेक्षा से टूट कर रह जाता है। अपने असहाय व लाचार होने का बोध उसे हर पल काटने लगता है। इससे उसके ठीक होने (रिकवरी) में भी ज्यादा समय लगता है। शारीरिक व्याधि का तन-मन से गहरा ताल्लुक है यह बात मेडिकल साइंस सिद्ध कर चुका है। इसे मेडिकल भाषा में सायकोसोमेटिक कहा जाता हैं " रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

कहते हैं, बुढ़ापा स्वयं में एक रोग है हालांकि यह सच नहीं है। कई लोग बुढ़ापे में भी अच्छे खासे तंदुरूस्त रहते हैं लेकिन यह जरूर है कि कुछ रोग हैं जो बुढ़ापे में अक्सर हो जाते हैं जैसे खांसी, घुटनों व जोड़ों का दर्द आदि। कभी-कभी दर्द इतना बढ़ जाता है कि रोगी बिस्तर पकड़ लेता है। उसका चलना-फिरना मुश्किल हो जाता हैं। यदि परिवार का वह सदस्य जो जीवन भर परिवार को पालने के लिए खटता रहा, अपनी इच्छाओं को मारकर अपनी मौज मस्ती के दिन बच्चों की सेवा में बिताए, आज अगर उसे परिवार के युवा सदस्यों की जरूरत है तो उनका फर्ज बनता है कि वे इसमें जरा भी कोताही न करें। उन्हें सोचना चाहिए कि आने वाले सालों में जब वे स्वयं उस स्थिति में होंगे अपराध बोध उन्हें चैन नहीं लेने देगा।

याद रखें, सेवा से बढ़कर पूजा नहीं। आप मंदिर मस्जिद जाएं या न जाएं, ईश्वर अल्लाह को याद करें या न करें लेकिन अगर अपने बुजुर्गों की खासकर बीमारी में सेवा करते हैं तो आप बहुत पुण्य के भागी होंगे। आज आप परिवार के बीमार की सेवा कर रहे हैं कल आप भी बीमार हो सकते हैं। तब आपकी भी सेवा उसी तरह होगी।

इंसान इसीलिए तो इंसान कहलाता है। उसमें प्यार, सेवा, करूणा, लगाव जैसे सकारात्मक गुण हैं। इन्हीं गुणों के कारण जीवन जीने लायक बनता है।

- उषा जैन 'शीरीं'

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