खूबसूरती के लिए अपनाइए ब्यूटी मास्क

खूबसूरती के लिए अपनाइए ब्यूटी मास्क

मौसम एवं जलवायु प्राय: बदलते रहते हैं। इस बदलते मौसम एवं जलवायु का त्वचा पर विशेष हानिकारक प्रभाव पड़ता है। सर्दियों के मौसम में त्वचा प्राय: शुष्क हो जाती है। हाथों में झुर्रियां पडऩे लगती हैं, खुजली होने लगती है तथा त्वचा भी फटने लगती है। त्वचा को अत्यधिक ठण्ड से बचाने के उपायों से ही त्वचा के रोगों से निजात पायी जा सकती है तथा त्वचा की कमनीयता को बरकरार रखा जा सकता है।

नशीली वस्तुओं के सेवन से त्वचा का रंग फीका पडऩे लगता है तथा त्वचा के लोच में भी कमी आ जाती है। धूम्रपान, गुटके का सेवन, जर्दा व तम्बाकू के निकोटिन व कार्बन मोनोक्साइड न सिर्फ असमय बुढ़ापा लाने वाले होते हैं बल्कि हानिकारक तत्वों के कारण वे त्वचा की रक्तवाही शिराओं की क्रिया में भी बाधा उत्पन्न करते हैं। नशीली वस्तुओं के सेवन से त्वचा में स्थित जलीय अंश नष्ट हो जाते हैं एवं झुर्रियां पडऩे लगती हैं।

वातावरण के प्रदूषित कण चेहरे पर पड़ते रहते हैं और पसीना या अन्य नमी को पाकर वे त्वचा से चिपक जाया करते हैं। पर्यावरण प्रदूषण की विकरालता त्वचा को विशेष रूप से प्रभावित करती है और त्वचा के अनेक दोषों के साथ-साथ त्वचा के कैंसर तक की संभावना को बढ़ा डालती है।

गहरा श्रृंगार करना भी त्वचा के लिए हानिकारक होता है क्योंकि त्वचा भी सांस लेती है। गहरा श्रृंगार त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देता है जिससे कील-मुंहासे निकलने लगते हैं। कभी-कभी अधिक गर्म अथवा अधिक ठंडे जल का प्रयोग कर त्वचा को साफ करने का प्रयत्न किया जाता है। दोनों ही रूपों में ये त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। अत्यधिक गर्म जल के उपयोग से त्वचा की संवेदना समाप्त हो जाती है, जबकि अत्यधिक ठंडा जल त्वचा को ऑक्सीजन पहुंचाने में बाधा उत्पन्न करता है। इससे त्वचा रूखी हो जाती है और झुर्रियां पडऩी शुरू हो जाती हैं। " रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

सौंदर्य को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मौसम के अनुरूप ही अपनी त्वचा की देखभाल की जाए। घर पर बनाए गए सौन्दर्यवर्धक नुस्खे न केवल सस्ते होते हैं बल्कि बाजारु सौन्दर्य-प्रसाधनों की अपेक्षा अधिक विश्वसनीय और बिना कोई कुप्रभाव छोड़े सुन्दरता में चार-चांद लगाने वाले होते हैं।

आयुर्वेद सबसे प्राचीन उपचार प्रक्रिया रही है। हमारे देश के आयुर्वेद में प्रयोग में आने वाली वस्तुएं जैसे मेहंदी, चंदन, गुलाब, पुदीना, खीरा, अदरक जैसे अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियां प्रचुर मात्र में आसानी से जगह-जगह पायी जाती हैं। हमारे देशी उपचार सौन्दर्य और त्वचा को बिना किसी नुकसान के प्राकृतिक रूप प्रदान करते हैं।

मुखचन्द्र की चमकीली छटा को बरकरार रखने के लिये नीचे कुछ उपयोगी ब्यूटी मास्क बताए जा रहे हैं, जो बनने में भी सरल हैं। जरा इन्हें अपनाकर तो देखिए।

हल्दी का मास्क:- हल्दी में उबले हुए दूध को डाल कर एक पेस्ट-सा बना लें। इसे पूरे चेहरे पर लगा कर कम-से-कम 20 मिनट तक सूखने दें। फिर गुनगुने पानी से त्वचा को साफ करें। इस मास्क के प्रयोग से त्वचा चमकीली व सुनहरी हो जाएगी।

पुदीने का मास्क:- रात को पुदीने की पत्तियों और जैसमीन के फूल (जो शाम में तोड़े गए हों) को भिगोकर रख दें। इन दोनों को सुबह पीस लें तथा इसे पेस्ट जैसा तैयार कर लें। इस लेप को पूरे चेहरे पर नीचे से-ऊपर तक लगाकर इस मास्क को कम-से-कम आधे घंटे तक रखें। फिर सूखने के बाद गुनगुनेे पानी से धो लें। इस मास्क को लगाने से त्वचा में कसाव आएगा।

आटे का मास्क:- इस मास्क के लिए दो चम्मच चोकरयुक्त गेहूं का आटा, आधा कटा हुआ नींबू का रस तथा एक चम्मच दही का इस्तेमाल किया जाता है। इन सबको मिलाकर एक लेप तैयार कर लें। स्नान से पूर्व इसे चेहरे तथा हाथ-पैर में लगा लें। लगभग 20 मिनट तक सूखने के बाद यह मास्क सख्त हो जाता है। त्वचा को साफ करने तथा चमकीला बनाने का सर्वोत्तम उपाय है।

मसूर दाल का मास्क:- त्वचा को स्निग्ध एवं चमकीली बनाने हेतु मसूर की दाल को दही में भिगोकर थोड़ी देर तक छोड़ दें। जब मसूर दाल फूल जाए तो उसे पीसकर थोड़ा-सा मक्खन एवं चुटकी भर हल्दी मिलाकर उबटन तैयार कर लें। इस उबटन को त्वचा 15 मिनट तक लगा रहने दें और तत्पश्चात् उसे धो लें। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा की सारी मैल साफ हो जाएगी तथा त्वचा मुलायम व स्निग्ध प्रतीत होगी।

- पूनम दिनकर

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