क्यों बनते हैं विवाहेत्तर संबंध

क्यों बनते हैं विवाहेत्तर संबंध

पुरूष की प्रवृत्ति उस भंवरे की तरह होती है जो आकर्षक व सुंदर फूलों के चारों ओर बराबर चक्कर लगाता रहता है। पुरूष को हमेशा दूसरी औरतें अधिक गुणवती व रूपवती दिखाई देती हैं। अपनी खूबसूरत पत्नी को छोड़कर दूसरी औरत के पास जाकर आसरा खोजना पुरूष का एक स्वभाव बनकर रह गया है।

यूं तो विवाह भावनात्मक व मानसिक सुरक्षा का सर्वोत्तम विकल्प होता है परन्तु कभी-कभी इस सुरक्षा को तब ग्रहण लग जाया करता है जब पति-पत्नी के बीच तीसरा 'कोई आ जाता है। पुरूष प्रधान समाज होने के कारण सामाजिक वर्जनाएं अधिकतर स्त्रियों पर ही लादी जाती हैं " रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

और पुरूष प्राय: इनसे साफ बच जाया करते हैं।

भारतीय समाज में पत्नी की स्थिति आमतौर पर अत्यन्त ही नाजुक होती है। पति को मोहपाश में बांधे रखने की जिम्मेदारी, पति को पूर्ण यौन संतुष्टि देने की जिम्मेदारी, पति को वारिस के रूप में संतान देने की जिम्मेदारी, घर के काम-काजों को निबटाने की जिम्मेदारी आदि न जाने कितनी ही जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी पत्नी को अपने पति के आगे परास्त होकर अपनी भावनाओं की आहुति देनी होती है।

दुर्भाग्य से पत्नी से पूर्ण संतुष्टि पाकर भी कभी-कभी पति बाहर की ओर भटक जाता है। ऐसी स्थिति में पत्नी को विवेक, धैर्य और संयम से काम लेने की आवश्यकता होती है। पहले तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही न हो, इतनी सतर्कता पत्नी को बरतनी ही चाहिए। अगर दुर्भाग्य से ऐसा हो भी जाता है तो पत्नी को प्यार और सूझबूझ से इस स्थिति से निबटना चाहिए।

विवाह एक धार्मिक व सामाजिक संस्कार है। इसके ठीक विपरीत एक दूसरा सत्य यह भी है कि स्त्री-पुरूष का आकर्षण प्राकृतिक व सहज होता है। विवाह के बाद मनपसंद साथी का साथ न मिल पाने के बाद पुरूष के इर्द-गिर्द कोई भी मनपसंद छवि वाली स्त्री सम्पर्क में आ जाती है तो वैसी स्थिति में पुरूष का झुकाव सहज ही उस स्त्री की ओर हो जाता है। " रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

कुछ पुरूष ऐसे भी होते हैं जो नित्य नये-नये रसों का सुख भोगने के लिए भी अन्य स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। जब कोई स्त्री अपने पति से यौन संतुष्टि नहीं पाती तो वह ऐसे अन्य पुरूष के झांसे में शीघ्र ही आ टूटती है और इसे यौन-संतुष्टि का साधन मानकर बराबर खेल-खेलती रहती है। पुरूष जो अपनी प्रवृत्तियों से लाचार होता है, वह सहज ही दूसरी स्त्री से संपर्क साधता रहता है।

पति का बाहरी संबंध जब दफ्तर की सहयोगी से बनता है तो उसके मूल में पत्नी की लापरवाही ही होती है। घर के कामों और बच्चों के पालन-पोषण के बीच पति की उपेक्षा होती जाती है। जब वह रात को पति के साथ सोने जाती है तो शारीरिक और मानसिक रूप से इतनी अधिक थकी होती है कि अपने पति की यौन इच्छाओं की ओर समुचित ध्यान नहीं दे पाती। पति इसे अपनी उपेक्षा समझने लगता है।

यही उपेक्षा उसे 'दूसरी' से जोड़ती है और वह उस 'दूसरी' के लिए लालायित रहकर घर से अधिक देर तक गायब रहने लगता है। शादी के बाद जो पत्नी संवरने में और पति को मोहने के प्रयास में लगी रहती थी, वही पत्नी बच्चे हो जाने के बाद पति की ओर से धीरे-धीरे जब कटने लगती है तो पति को अखरने लगता है। पत्नी की खुद के प्रति लापरवाही से ऊबा पति ऑफिस में काम करने वाली चुस्त और आकर्षक सहयोगिनी के आकर्षण में बंधने लगता है।

कई बार यौन संबंधों की उपेक्षा भी पति को पत्नी से विमुख कर देती है। शयन कक्ष में आनंद बिखेरने वाली पत्नी पति का मन जीतने में समर्थ होती है। शयन कक्ष में ना नुकर को ही जो पत्नी अपनी अदा बना लेती है, वह रूपसी होते हुए भी पति को अपने प्रेम-पाश में नहीं बांध पाती।

शयनकक्ष में ऊबी, खीझी पत्नी, पति के बहकते कदमों की पूर्ण जिम्मेदार होती है। यूं तो यह गलती कई पत्नियां अपनी नादानी में ही कर जाती हैं परन्तु यही गलती पति से विलगाव का कारण भी बन जाया करती है। शयनकक्ष कटुस्थली न होकर ठिठोली व जीवन रस को प्राप्त करने वाली क्रीड़ास्थली होनी चाहिए। " रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

नवीनता की चाहत में भी पति के कदम बहकने लगते हैं। पति हमेशा अपनी पत्नी को जोश व उमंगों से भरी हुई सेक्स की प्रतिमूर्ति की तरह चुस्त देखना चाहता है जो समर्पण की कला की जानकार हो। आपसी संबंधों में नवीनता का संचार करते रहने की कला भी आनी चाहिए।

पति से रूखा व्यवहार करने वाली पत्नी भी अपने लिए समस्याओं का जाल बुन लेती है। पत्नी का यह दायित्व बनता है कि वह घर में फैली हुई ऊब और नीरसता को दूर करे। इसके लिए पति से लिपटना, मुस्कुराहटों से उसका स्वागत करना तथा समर्पण हेतु तत्पर रहने की भावना को बनाए रखना चाहिए।

कभी भी सुनी-सुनायी बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। हो सकता है कि ऐसी बातों में सार तनिक भी न हो और पति आपके शक्की स्वभाव के कारण ही आप से दूर होता चला जाये। अगर पति के संबंध अन्य स्त्री से भी हों तो उसे अपने व्यवहार से अपना बनाने का सत्त प्रयास करें। इस पर विचार करना आवश्यक है कि आखिर किस कारण से पति दूसरी स्त्री से संबंध बना रहा है। उस विशेषता को अपने अंदर उतारने की कोशिश करनी चाहिए।

पति-पत्नी को इस सच से कभी भी दूर नहीं जाना चाहिए कि दूसरी औरत या दूसरा पुरूष समाज में किसी भी प्रकार से सम्मानजनक दर्जा नहीं दिला सकता। कानूनी तौर पर नाजायज संबंध मान्य नहीं होते। नाजायज संबंध अनेक गुप्त रोगों को भी जन्म देते हैं अत: क्षणिक आनंद के चक्कर में अपने दांपत्य जीवन में घुन लगा लेना बुद्धिमानी नहीं हो सकती। अपने आत्मविश्वास को जागृत कर आने वाली छोटी-छोटी समस्याओं का मुकाबला करना चाहिए।

- पूनम दिनकर

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