बढ़ते जा रहे हैं विवाहपूर्ण यौन संबंध

बढ़ते जा रहे हैं विवाहपूर्ण यौन संबंध

युवावस्था एक तपती दुपहरिया की भांति होती है जहां तपन के अतिरिक्त और कुछ नहीं होता। इस अवस्था में शरीर के अंगों का विकास निरन्तर होता रहता है और शरीर के आकर्षण एवं सुन्दरता में वृद्धि होने लगती है। विपरीत लिंगी परस्पर एक-दूसरे की ओर आकर्षित होने लगते हैं और इस आकर्षण को मन का प्रेम समझ कर एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं। 'हाय', 'हेलो' से बात आगे बढ़कर मित्रता में परिवर्तित हो जाती है।

कंप्यूटर, इंटरनेट व मोबाइल के युग में आज के समय बचपन से ही बच्चे यह जानने लगते हैं कि स्त्री के साथ पुरूष क्या करते हैं और प्यार क्यों करते हैं? उनके युवा मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है और वे 'नेह' से 'देह' की ओर बढऩे का प्रयास करने लगते हैं।

'ना-ना करते-करते 'हां-हां' तक के दौर में पहुंचकर युवक-युवतियां विवाह पूर्व सैक्स के बंधन में बंध जाते हैं। प्रकृति ने पुरूष की अपेक्षा स्त्रियों के शरीर का ढांचा इस प्रकार बनाया है कि वह अवैध संबंधों को अधिक दिनों तक छिपा कर नहीं रख सकती। युवक जब 'देह' की चाहत को पा लेता है तो उसको वह युवती 'बदचलन' की भांति लगने लगती है और वह किसी दूसरी 'पवित्र' युवती की तलाश शुरू कर देता है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

जब तक युवक को दूसरी युवती नहीं मिल जाती, तब तक वह पहली को अपना शिकार बनाता रहता है। शिकार बनने वाली युवती इसे युवक का प्रेम समझती रहती है और युवक के झूठे आश्वासनों पर अपने कल्पना लोक में विचरण करती हुई उसकी अंकशायिका बनती रहती है।

जब 'भंवर' को दूसरी 'कुसुम' मिल जाती है तब जाकर युवती को यह एहसास होता है कि वह छली जा चुकी है और अपनी 'अस्मिता' को नीलाम कर चुकी है।

गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम आदि की बाजार में खुली उपलब्धता और इनसे संबंधित विज्ञापनों के कारण विवाह पूर्व सैक्स को हरी झंडी मिल चुकी है। एक पत्रिका में प्रकाशित एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार लगभग 55 प्रतिशत युवक-युवतियां विवाह पूर्व सैक्स संबंध स्थापित कर चुके होते हैं क्योंकि गर्भनिरोधक साम़ग्रियों ने उन्हें गर्भधारण के भय से मुक्त कर रखा है।

कॉलेज की पढ़ाई और कैरियर निर्माण में लगे युवक-युवतियों की शादी लगभग 30-35 वर्ष की उम्र में जाकर होती है जबकि 18 से 25 वर्ष की आयु में युवक-युवतियां शादी करने योग्य हो जाते हैं। अश्लील कार्यक्रमों, विज्ञापनों एवं पुस्तकों को देखकर व पढ़कर युवक-युवतियों में हार्मोन इसी उम्र में सक्रिय हो उठते हैं। परिणाम स्वरूप लड़कियां कम उम्र में ही मासिक स्राव के शुरू होने के चक्र में आ घिरती हैं। हार्मोन के स्रावित युवक-युवतियां विवाह पूर्व सैक्स संबंध बनाने की ओर बढ़ जाते हैं।

युवक-युवतियों में विवाह पूर्व सैक्स का एक और कारण पाश्चात्य संस्कृति के अनुरूप फैशन भी है। भारतीय सभ्यता के अनुसार युवतियों का पहनावा ऐसा होता था जिससे उनका सम्पूर्ण शरीर गुडिय़ा की तरह ढका एवं सुन्दर लगता था लेकिन आज के फैशन ने शरीर पर नाम मात्र के कपड़ों को ही रहने दिया है।

युवतियों के अद्र्धनग्न शरीर को देखकर कोई भी युवक आसानी से यह अनुमान लगा लेता है कि जिसने स्वयं ही अपनी 'लज्जा' को उतार फेंका है, उसे अपने पक्ष में आसानी से किया जा सकता है और युवकों की यह धारणा बहुत हद तक निशाने पर जाकर सही साबित होती है।

जब संतान सयानी हो जाये तो मां-बाप विशेषकर मां को अपनी बेटी के क्रिया-कलापों पर विशेष रूप से ध्यान देते रहना चाहिए। थोड़ी सी सतर्कता आपको एवं आपकी बेटी को भयंकर परेशानियों के आने से बचा सकती है।

- पूनम दिनकर

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