बचिए और बचाइए बच्चों को गुनगुने जाड़े से!

बचिए और बचाइए बच्चों को गुनगुने जाड़े से!

जाड़़े के दिन शुरु हो चुके हैं। ऐसे मौसम में बड़े तो फिर भी अपने आप को संभाल लेते हैं पर जहां तक बच्चों की बात है, उनको काबू करना मां बाप के लिए बड़ा कठिन काम हो जाता है। न तो वे पर्याप्त कपड़े पहनने को तैयार होते हैं और न ही उन्हें सर्दी में बिना या कम कपड़ों में छोड़ कर उनके बीमार होने का खतरा मोल लिया जा सकता है।

सर्दियां अक्सर बच्चों के मामले में खतरनाक सिद्ध होती हैं। अब चूंकि बच्चे नाजुक होते हैं अत: वे सर्दी के प्रकोप को आसानी से सह नहीं पाते और जरा सी लापरवाही से ही बीमार पड़ जाते हैं, सो हर समझदार मां बाप का फर्ज बनता है कि वे अपने नन्हे मुन्नों का तो खास तौर पर ध्यान रखें अन्यथा उन्हें पूरी सर्दी परेशान रहने के लिये तैयार रहना चाहिये।

वैसे थोड़ी सी सावधानी रखने मात्र से ही नन्हे मुन्नों को आसानी से सर्दी की मार से बचाया जा सकता है। यहां ऐसे ही कुछ ऐसे टिप्स दिए जा रहे हैं जिनका उपयोग करके अपने बच्चों को दादी नानी तक सुरक्षित रखती आई हैं। बस, थोड़ा सा ध्यान रखिये और निश्ंिचत हो जाइए। सर्दी आपके लाडले का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी।

- सबसे पहला मूल सूत्र तो यही है कि यदि बच्चा मां का दूध पीता है तो सर्वप्रथम मां को खुद को सर्दी के प्रकोप से बचाना है । न केवल उसे खुद को खुली ठण्ड में एक्सपोज करने से बचना है वरन् खाने पीने में परहेज व संयम रखना होगा । कोई भी मां कदापि नहीं चाहेगी कि उसके थोड़े से खाने पीने के शौक से उसका नौनिहाल बीमार पड़ जाए तो पहला सबक यही कि स्वयं पर नियंत्रण रखना है ।

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- केवल खाने पीने के परहेज से ही बात नहीं बनेगी क्योंकि मां को ठण्ड लगनेे का दूसरा बड़ा कारण बनता है उसका अपना पहनावा । अत: हर उस मां को, जो अपने बच्चे से प्यार करती है, आती हुई सर्दी में अपने भी पहनने ओढऩे का पूरा पूरा ख्याल रखना लाजिमी है । अच्छा हो कि खास तौर पर छाती, सिर, पैर व कमर को ठण्ड से बचाया जाए क्योंकि ठण्ड लगने के यही सबसे संवेदनशील अंग माने जाते हैं ।

- अब बारी आती है बच्चे की सर्दी से रक्षा करने के लिए उसका ख्याल रखने की। ध्यान रखिए कि बच्चे ऊर्जा का बड़ा भण्डार होते हैं सो स्वाभाविक रूप से उन्हें ठण्ड का अहसास कम ही होता है।

दूसरा सच यह भी है कि वे ही सबसे ज्यादा कोमल भी होते हैं अत: ठण्ड सबसे आसानी से उन्हें ही अपना शिकार बनाती है। भले ही वे कहते रहें कि उन्हें ठण्ड नहीं लग रही है पर आप को उन्हें समझा बुझा कर गर्म कपड़े पहनाने ही हैं ।

- खास तौर पर स्कूल जाने वाले बच्चे एक दूसरे की देखा देखी , फैशन के कारण या फिर अपने साथियों पर रौब मारने के चक्कर में कम से कम कपड़े पहनने का प्रयास करते हैं पर आप को उन्हें समझाना है कि ताजी ताजी ठण्ड उन्हें बीमार करेगी तो वे न तो खेलने का मजा ले पाएंगे और न ही खाने का, अत: उचित मात्रा में कपड़े पहनना घाटे का सौदा कतई नहीं है। बच्चे ऐसे विचारों से प्राय: आसानी से सहमत हो जाते हैं ।

- खाने के मामले में भी सर्दियां बच्चों का खास ध्यान मांगती हैं। अच्छा हो कि प्रतिदिन हो सके तो उन्हें बादाम, अखरोट, काजू जैसे गर्म व पौष्टिक मेवे जरूर दें। ये एंटीआक्सिडेंट का काम भी करते हैं और सर्दी से बचाव भी करते हैं। यदि घर में अण्डे का उपयोग करते हैं तो प्रतिदिन एक अण्डा भी अच्छा है। आंवले दे सकें तो कहने ही क्या। बहुत ज्यादा चिंता न करके बस थोड़ा सा ख्याल रखेगी तो बच्चा स्वस्थ रहेगा और आपकी सर्दियां अच्छे से कट ही जाएंगी।

- घनश्याम बादल

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