सेक्स अज्ञानता किशोरियों की मुसीबत का कारण

सेक्स अज्ञानता किशोरियों की मुसीबत का कारण

पुष्पलता गांव की सीधी-सादी लड़की थी। अभी वह पंद्रह बरस भी पूरे नहीं कर पाई थी कि पड़ोस के एक युवक के प्रेम में पड़कर अज्ञानवश गर्भवती हो गई। मां को जब पता चला तो लड़की को मारने पीटने और अपना सर धुनने के बाद वह उसे गांव की ही कजरी दाई के पास ले गई। उसने न जाने कैसी तेज-तेज दवाएं लड़की को खिलवाई कि पुष्पलता की जान पर बन आई। जब तक उसे शहर ले जाते, वह दम तोड़ चुकी थी। बाद में युवक ने भी अपने सच्चे प्यार की खातिर आत्महत्या कर ली। तो देखिए, अज्ञानता के कारण दो हंसती खेलती जिन्दगियों का क्या हश्र हुआ।

यह समस्या केवल गांवों की ही नहीं है। शहरों में भी लड़कियां इस उम्र में नादान ही होती हैं। उचित यौनशिक्षा के अभाव में वे गलतियां कर बैठती हैं जिसका खमियाजा उन्हें कई बार जटिल बीमारियों से या जान तक देकर चुकाना पड़ता है।

सेक्स के बारे में अनभिज्ञता के कारण ही किशोरियां न केवल गर्भवती हो जाती हैं बल्कि सेक्स जनित कई प्रकार के रोगों से भी घिर जाती हैं या फिर एड्स जैसी भयंकर त्रासदी मोल ले लेती हैं।

किशोर वय में यौन शिक्षा दी जानी चाहिए या नहीं, इस बात को लेकर काफी मतभेद रहा है। हमारी संस्कृति इस बात को लज्जाहीनता मानती है। सेक्स शब्द ही जहां अश्लील समझा जाता है, वहां सेक्स को लेकर बच्चों को शिक्षित करने की बात सोचना ही मुश्किल है।

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हर तरफ से इस का विरोध होता है। माता पिता, गुरूजन सभी इस विषय पर बात करने से कतराते हैं। उनका मानना है कि उम्र के साथ सभी जानकारी स्वत: ही हासिल हो जाती है। यौन शिक्षा किशोरवय में देने से स्वच्छंद सेक्स में वृद्धि होगी, सेक्स के बारे में जानकारी को प्रायोगिक रूप में लिया जाने लगेगा लेकिन आज का युवा वर्ग चाहता है कि यौन शिक्षा स्कूल के स्तर से कंपलसरी तौर पर दी जानी चाहिए।

समय के साथ जहां इतना कुछ बदला है, सेक्स को लेकर भी हमें अपनी विचारधारा में परिवर्तन लाना होगा। बच्चों के मन में सेक्स को लेकर एक पाप, गुनाह, अपराध या हौव्वा जैसी बात को निकालकर उन्हें एक साथ स्वस्थ वैज्ञानिक दृष्टिकोण देना होगा।

सबसे पहले तो बड़ों को सेक्स को लेकर एक स्वस्थ, विस्तृत वैज्ञानिक नजरिया अपनाना होगा। तभी वे बच्चों के लिए भी सही सोच निर्धारित कर पाएंगे। सेक्स को लेकर उत्सुकता एक कुदरती जज्बा है जिसमें बुरा कुछ नहीं।

बच्चे की सेक्स को लेकर शंकाओं को डांट डपटकर, चुप कराके या गलत सलत कुछ कहकर या उसे अवॉयड करने से बच्चा कभी भी स्वस्थ सोच विकसित नहीं कर पाएगा। आगे जाकर यही अज्ञानता घर परिवार के लिए मुसीबत और शर्मनाक हादसा बन सकती है।

-उषा जैन 'शीरीं'

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