बेहतर शादी शुदा जिंदगी के लिये....

बेहतर शादी शुदा जिंदगी के लिये....

अक्सर देखने और सुनने में आता है कि शादी वो लड्डू है जो खाये वो पछताए, जो न खाये वो भी पछताए। दरअसल प्यार उमंग की वजह से शादी शुदा जिंदगी में कदम रखने वाले जोड़े शादी के बाद की जिम्मेदारियां अच्छी तरह से न निभा पाने की वजह से कुछ ही दिनों में परेशान हो उठते हैं जिस का असर नये शादी शुदा रिश्ते पर पड़ता है क्योंकि शादी का दूसरा नाम है जिम्मेदारी।

शादी से पहले जिस जीवन को लड़का लड़की जी कर आते हैं, दोनों में जमीन आसमान का फर्क होता है। शादी के पहले की दुनियां आसमान से चांद तारे तोड़ कर लाने की होती है, वहीं शादी के बाद दोनों का जमीनी हकीकत से सामना होता है तो छोटी बातों और छोटी मोटी फरमाइशों पर दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो जाता है और आपसी बहस और तकरारों का सिलसिला चल पड़ता है।

तमाम चीजों के बीच रिश्तों में तालमेल के साथ खुशहाली बनाए रखने के लिये आर्थिक मजबूती के लिये पैसा ही जरूरी नहीं होता, प्यार और स्नेह भी काम आता है।

बेहतर और खुशनुमा शादी शुदा जिंदगी के लिये यह भी बेहद जरूरी है कि पति पत्नी एक दूसरे की भावनाओं और इच्छाओं को खुले दिल से समझने के साथ ही उनका आदर सम्मान करें और एक दूसरे को महत्त्व दें।

ज्यादातर देखने में आता है कि हम रोजमर्रा के जीवन में गुजरते वक्त के साथ ही अपने लाइफ पाटर्नर के साथ सामान्य शिष्टाचार भी भूल जाते हैं जबकि आप के द्वारा आफिस या घर से बाहर जाते वक्त पत्नी को 'आई लव यू' या आफिस से आने के बाद प्यार से चूमने के बाद 'आई मिस्ड यू' कहना आप की शादी शुदा जिंदगी में कितनी खुशहाली और मजबूती ला सकता है। इस का आप प्रयोग कर के देख सकते हैं।

अपनी शादी के शुरू के दिनों की बातें सोचता हूं और फिर अपने आज को देखता हूं तो संतुष्टि का अहसास होता है। ऐसा नहीं कि हमारी शादी शुदा जिंदगी में परेशानियां नहीं आई। आम लोगों की तरह हमारे सामने भी आर्थिक परेशानियां थीं जिस की वजह से कई बार हम दोनों में आपस में छोटे मोटे हल्के फुल्के विवाद भी हुए। कई बार मुझे उलझन का अहसास भी हुआ मगर धीरज और आपसी समझदारी से हम दोनों ने वो सब कुछ पा लिया जो हम पाना चाहते थे।

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आज मान सम्मान, पैसा, एक बेटा व एक बेटी और सुंदर, सुशील समझदार मेरी लाइफ पार्टनर, मेरी बीवी, खुदा का दिया मेरे पास सब कुछ है।

शादी के शुरूआती दिनों में हम दोनों पति पत्नी के बीच पैसे और खर्च को लेकर बहस हो जाती थी। एक दिन बैठकर हम दोनों ने इस बात पर चर्चा की कि हमारी और बच्चों की क्या क्या जरूरतें हैं। उन्हें किस तरह से पूरा किया जा सकता है। हम दोनों ने एक तरफ घर गृहस्थी की चीजों की खरीदारी के लिये ऐसी जगहों की तलाश की जहां उचित कीमत पर अच्छा सामान मिलता था।

दूसरी तरफ आमदनी बढ़ाने के जरिये भी तलाश किये। मैं समाचार पत्र-पत्रिकाओं एवं फीचर एजेंसियों के लिये फीचर, कहानियां, संस्मरण आदि लिखने लगा। वहीं शायरी के ताल्लुक से देश भर में आल इंडिया मुशायरों में शिरकत होने लगी। आकाशवाणी नजीबाबाद, दूरदर्शन दिल्ली, लखनऊ, जी टीवी, ईटीवी उर्दू आदि टीवी चैनलों से बुलावे आने लगे और थोड़े ही दिनों में सब कुछ सामान्य हो गया।

जब आप को लगे कि पैसा आप के प्यार पर हावी हो रहा है और आप की शादी शुदा जिंदगी में हल्के हल्के दाखिल होने लगा है, आप के प्यार के बीच पैसा ही आपकी लड़ाइयों की वजह बनता चला जा रहा है तब आप अपने भविष्य के लक्ष्यों पर फोकस करते हुए अपने जीवन साथी के साथ मनी मैटर्स पर खुलकर चर्चा करें। सारे खर्चे मिल बांटकर करने में ही समझदारी है। ऐसा करने से अपने शादी शुदा रिश्तों पर इस का रिटर्न आप को तुरंत मिलता नजर आयेगा लेकिन यह सब किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है।

जरूरी है कि पति पत्नी दोनों अपनी शादी शुदा जिंदगी की बेहतरी के लिये बराबरी का प्रयास करें। एक दूसरे से जुड़े रिश्तों और रिश्तेदारों का मान सम्मान करें। छुटटी वाले दिन पत्नी और बच्चों को घर के माहौल से बाहर सैर कराने, चाट, बर्गर, आइस्क्रीम या डिनर कराने ले जायें। शादी शुदा जिंदगी से जुड़ी उम्मीदों के बारे में गहराई से आपस में बातें करें। बच्चों के कैरियर, संयुक्त परिवार, इन्वेस्टमेंट, बूढ़े मां बाप आदि जरूरी मुद्दों पर कोई गंभीर असहमति तो नहीं। जरूरी है ऐसे तमाम मसलों पर घर में बैठकर ही आपस में बात साफ कर ले। यदि किसी मुद्दे पर असहमति है तो उसे दोनों आपस में ही सुलझा लें। तीसरे व्यक्ति के पास बात जाने से घर

के भेद खुलने और बदनामी का डर रहता है।

ऐसे में हमें 'हम' की भावना से बाहर आ कर एक दूसरे को अपने अनुसार जीवन जीने के लिये भी प्रोत्साहित करना चाहिये। सोच समझ कर फैसला करने से शादी शुदा जिंदगी की नींव सदैव मजबूत रहने के साथ ही आपस का प्यार भी बुढ़ापे तक जवां और तरो ताजा रहता है।

- शादाब जफर ' शादाब'

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