कहीं मुसीबत न बन जाए परपुरूष प्रशंसा

कहीं मुसीबत न बन जाए परपुरूष प्रशंसा

पुरूष स्वभाव से ही शक्की होते हैं। विवाहित पुरूष पराई स्त्री को घूर कर देख लें, उससे हंसकर बातें कर लें, उसके रंग रूप की प्रशंसा कर ले या उससे शारीरिक सम्पर्क जोड़ ले, तब भी पत्नी पति को छोडऩे की बात नहीं सोच पाती परन्तु पत्नी यदि किसी और पुरूष से हंस बोल ले या उसकी जरा सी प्रशंसा कर दे तो पति झट अपनी पत्नी पर शक करने लगता है।

शक आज के जमाने की उपज नहीं है। शक आदमी की जन्मजात प्रवृत्ति है। शक से छोटा ही नहीं, बड़ा आदमी भी नहीं बचा है। शक बहुत बुरी चीज है। शक पति पत्नी के रिश्ते में दरार डाल सकता है। शक रिश्तों में कड़वाहट लाता है। शक की वजह से तलाक की नौबत आ जाती है।

पति-पत्नी के बीच शक पैदा नहीं होना चाहिए। पत्नी को भी चाहिए वह अपने पति से पराये पुरूष की प्रशंसा न करे। न ही किसी से बात करे भले ही आपके पति को आप पर विश्वास हो, आपकी नजर में आपके पति कितने ही समझदार हों। आप भी पराये मर्द से हंसने, बोलने, उसकी प्रशंसा करने से बचें। हमेशा याद रखिये आदमी जन्म से शक्की होता है। न जाने कब आपकी किस बात से आपके पति को शक हो जाए और नौबत तलाक तक आ जाए।

आप तलाक से बचना चाहती हैं, दांपत्य संबंध में दरार नहीं पडऩे देना चाहती तो याद रखिये, पराये मर्द से हंसने बोलने, उसकी प्रशंसा करने से अपने को बचाइये।

-किशन लाल शर्मा

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