महिलाओं के भी होते हैं विशिष्ट अधिकार

महिलाओं के भी होते हैं विशिष्ट अधिकार

जैसे-जैसे समाज में स्वतंत्रता और आधुनिकीकरण बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे आदमी और अधिक पाशविक होता जा रहा है उसकी नजर मात्र औरत पर है चाहे वह मासूम, अबोध बच्ची हो या असहाय वृद्धा। आदमी, मां, बहन, चाची, दादी आदि जैसे रिश्तों को भुलाकर उसे सिर्फ एक ही नजर से देखता है और उसे अपनी हवस का शिकार बनाना चाहता है।

एक पीडि़त महिला के ऊपर क्या बीतती है? यह वही समझ सकती है, जो इसका शिकार बनती है। एक हत्यारा तो आदमी को केवल जान से मारता है पर एक बलात्कारी एक महिला की आत्मा को कुचल देता है और वह रोज थोड़ा-थोड़ा किस्तों में मरती रहती है।

औरतों के साथ इतने सारे कानून तथा अधिकार होने के बावजूद भी वह लाचार क्यों हैं क्योंकि केवल कानून और अधिकार ही उनकी मदद नहीं कर सकते। भारत में पचास करोड़ से भी ज्यादा महिलाओं की संख्या है लेकिन केवल .०1 प्रतिशत महिलाएं ही यह जानती हैं कि उनकी मदद के लिए कौन-कौन से कानून व अधिकार हैं क्योंकि शायद वे सोचती हैं कि ऐसी घटनाएं तो हमारे साथ नहीं होती, फिर हमें कानून या अधिकार से क्या वास्ता?

औरतों के लिए चूल्हा-चौका, बच्चे, सजना-संवरना ही महत्त्वपूर्ण नहीं होना चाहिए, बल्कि उनको कानून व अधिकार के प्रति भी जागरूक होना चाहिए।

आज भले ही लड़का व लड़की में समानता का झूठा दावा किया जाता हो परन्तु यह शाश्वत सच है कि आज भी लड़का लड़की के लालन-पालन में अंतर रखा जाता है। लड़के को जहां बचपन से बहादुर, ताकतवर बनने की शिक्षा दी जाती है वहीं लड़कियों को दुबक कर रहना सिखाया जाता है। लोगों की घूरती नजरों से गुजरकर जब वो बड़ी होती है, तब तक वो मानसिक रूप से पंगु हो चुकी होती हैं। उसके पर कट गये होते हैं और वह असहाय पक्षी की तरह हो जाती है, जिस पर समाज की खौफऩाक नजर तुरन्त पड़ जाती है।

स्त्री को अपने शील की सुरक्षा का अधिकार है। यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री का हाथ जबरन उसकी इच्छा के विरूद्ध पकड़ता है, उसके वस्त्र हटाता है तथा उसके शरीर के अंगों का स्पर्श करता है तो ऐसे अपराध के लिए अपराधी को दो साल के कारावास की सजा या जुर्माना अथवा दोनों तरह की सजा का प्रावधान है।

यदि कोई व्यक्ति स्त्री को अपमानित करने के उद्देश्य से अपशब्द कहता है, अंगों का प्रदर्शन करता है तो इसके लिए उसे एक साल की कारावास या जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री के साथ दुष्कर्म करता है तो इसके लिए उसे आजीवन कारावास या कम से कम सात साल की सजा हो सकती हैं।

इस तरह की छोटी-छोटी घटनाओं से निपट लिया जाय तो निश्चय ही बड़ी घटना को रोका जा सकता है। कानून का साथ हम देंगे तो ही कानून हमारे साथ होगा। कानून के अधिकारों का प्रयोग कर दुष्ट व्यक्तियों में अपराध के प्रति कानून के प्रति खौफ पैदा किया जा सकता है जिससे एक सुरक्षित समाज की कल्पना की जा सकती है। दूसरी बात यह कि हम पुरूषों पर भी पाबंदी लगायें, उनके घर आने का टाइम निश्चित करें, उन्हें औरतों की इज्जत करना सिखायें ताकि हमारे घर के लड़के व मर्द दूसरे घर की बगिया न उजाड़ें।

- प्रियंका कुमारी

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