रजोनिवृत्ति के समय जरूरी है उचित आहार व व्यायाम

रजोनिवृत्ति के समय जरूरी है उचित आहार व व्यायाम

मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति का समय एक ऐसी अवस्था है जिसका सामना उम्र के साथ हर महिला को करना पड़ता है। यह एक स्त्री के जीवन की वह अवस्था होती है जब उसका मासिक धर्म बंद हो जाता है। रजोनिवृत्ति का यह समय 40-45 वर्ष के बीच आता है।

उम्र के इस पड़ाव में स्त्री के शरीर में बहुत से परिवर्तन आते हैं। रजोनिवृत्ति के समय स्त्री के शरीर में कई हार्मोन्स के स्तर में परिवर्तन आते हैं पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन के स्तर में। इन दोनों हार्मोन्स के स्तर में कमी आती है।

रजोनिवृत्ति के समय बहुत-सी तकलीफें जैसे हड्डियों का क्षय, पसीना अधिक आना, मानसिक संतुलन का गड़बड़ा जाना, झुर्रियां पडऩा, बदन दर्द होना, डिप्रेशन और एकाग्रता में कमी आना आदि का सामना करना पड़ सकता है इसलिए इन तकलीफों का सामना करने के लिए बहुत जरूरी है स्वस्थ आहार लेना।

स्वस्थ व उचित आहार में संतुलित भोजन होना तो आवश्यक है ही, साथ ही पोषण विशेषज्ञों के अनुसार इस समय मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन बी, ई के उत्तम स्रोतों का सेवन करना चाहिए व डिप्रेशन होने पर विटामिन सी और ई युक्त आहार लेना चाहिए। इन तत्वों युक्त आहार का सेवन अधिक करें ताकि आपको इस समय अधिक तकलीफों का सामना न करना पड़े।

रजोनिवृत्ति के समय एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आती है। हाल ही में किए गए नवीनतम शोध के अनुसार अगर इस समय महिलाएं नियमित व्यायाम करती हैं तो इस कमी को दूर किया जा सकता है। व्यायाम न करने वाली महिलाओं की तुलना में व्यायाम करने वाली महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्तर में बढ़ोतरी पायी गयी।

यही नहीं, इस शोध में यह भी पाया गया कि जो महिलाएं नियमित व्यायाम करती हैं, उन्हें रजोनिवृत्ति के समय कम तकलीफों का सामना करना पड़ता है, अन्य महिलाओं की तुलना में, जो शारीरिक श्रम नहीं करतीं, इसलिए परिवर्तन के इस दौर में नियमित व्यायाम करके चुस्त रहें और अपने वजन पर भी नियंत्रण रखें।

नवीनतम शोधों से यह भी पता चला है कि इस समय स्त्री को सोया उत्पादों का सेवन अधिक करना चाहिए क्योंकि यह हड्डियों के क्षय होने की संभावना को कम करता है और इस अवस्था में यह ओस्टिओपोरोसिस रोग से भी सुरक्षा प्रदान करता है।

सोया में एक प्लांट कैमिकल फाइटोएस्ट्रोजन पाया जाता है जो हड्डियों के क्षय को होने से रोकता है पर यह रसायन शरीर पर तभी प्रभाव डालता है अगर सोया उत्पादों का सेवन अधिक समय तक किया जाए। सोयाबीन में आइसोफ्लेवोनस नामक कम्पाउंड पाया जाता है, जो एस्ट्रोजन के लाभदायक प्रभाव देता है, कैंसर के खतरे के बिना।

- सोनी मल्होत्रा

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