चुरा सकती हैं आप अपनी उम्र

चुरा सकती हैं आप अपनी उम्र

अगर जीव वैज्ञानिकों की दृष्टि से देखें तो उम्र का बढऩा एक जैविक परिवर्तन है जिसे रोका जा सकता है। यह प्रकृति की एक सामान्य और परिवर्तनीय प्रक्रिया है। सामान्यत: शारीरिक और मानसिक शक्ति का कमजोर होना, संवेदनशीलता कम होना, भार घटना, नजर कमजोर होना, त्वचा में झुर्रियां पडऩा, बाल सफेद होना, ढीलापन आदि उम्र बढऩे के लक्षण माने जाते हैं।

यह सच है कि उम्र को बढऩे से रोका नहीं जा सकता लेकिन थोड़ा सा समय और मेहनत लगाकर आप अपने एक जन्मदिन से दूसरे जन्मदिन को आसानी से मिला सकते हैं और जरा सा भी परिवर्तन नजर नहीं आयेगा। दुख की बात तो तब होती है जब उम्र बढऩे से पहले लक्षण प्रकट होने लगते हैं।

ये सभी लक्षण स्वास्थ्य के प्रति हमारी लापरवाही का परिणाम हैं। हमारे रहन-सहन के गलत तरीकों का अंजाम हैं। यदि आप शरीर में पैदा हुए अधिक उम्र के लक्षण दबाना चाहते हैं और उनका तेजी से उभरना रोकना चाहते हैं तो आज से ही आप स्वास्थ्य और सौन्दर्य का रचनात्मक कार्य आरंभ कर दीजिए।

सबसे पहले तो अपनी त्वचा पर ध्यान दीजिए। त्वचा को चिकनी और चमकदार रखकर आप भीतरी और बाहरी दबावों से निपट सकते हैं। आपको मालूम होना चाहिए कि त्वचा में झुर्रियां कोलाजेन की कमी के कारण आती हैं। कोलाजेन की कमी को रोकने के लिए जरूरी है, त्वचा को सूर्य की तेज किरणों से बचाया जाए। तेज किरणों से कोलाजेन को नुकसान पहुंचता है। साथ ही खाने-पीने से भी कोलाजेन की मात्र बढ़ाई जा सकती है जैसे-खाने में विटामिन 'ए' की मात्रा रोज रोज लेनी चाहिए। फल, सलाद, ताजा जूस और दूध जरूर लें।

त्वचा को चिकनी और चमकदार बनाये रखने के लिए पानी का प्रयोग अधिक मात्रा करना चाहिए अर्थात् अधिक पानी पीना चाहिए। विटामिन 'ई' का प्रयोग अधिक करें। विटामिन 'ई' सबसे महत्त्वपूर्ण स्किन टानिक है। अत: वनस्पति तेलों, गेहूं व साबुत अन्नों का पर्याप्त सेवन करें। विटामिन्स आपको अधिक समय तक युवा रखते हैं। इसके अलावा विटामिन 'बी' और 'सी' भी बुढ़ापा रोकने में सहायक हैं।

ढलती उम्र का प्रभाव आंखों पर भी पड़ता है। अत: आंखों के प्रति सतर्क रहिए। जरा सी भी परेशानी होने पर डॉक्टरी परामर्श लीजिए।

बालों पर ध्यान दें। बालों को सफेद होने पर झडऩे से रोकें। बालों से उम्र का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। हमेशा प्रसन्नचित रहिए। तनाव से दूर रहिए। हां, यदि आप दिखने में युवा लगना चाहती हैं तो आपको बदले परिवेश में जीना होगा और स्वयं को युवा ही सोचना होगा।

- विजय कुमारी पाण्डेय

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