नियोजित परिवार ही होता है सुखी परिवार

नियोजित परिवार ही होता है सुखी परिवार

आज जहां हम इक्कीसवीं शताब्दी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं वहीं हम देखते हैं कि भारत के अधिकांश लोग न परिवार-नियोजन का अर्थ जानते हैं और न ही इसे अपनाने के इच्छुक हैं।

परिवार-नियोजन का अर्थ है नव विवाहित युगल द्वारा अपने परिवार का ढांचा इस तरह तैयार करना जिससे उनका परिवार सुनियोजित, शिष्ट, आरामदेह एवं स्वस्थ जीवन यापन कर सके। इन नवविवाहित युगलों को चाहिए कि वे एक आदर्श परिवार को अपनाएं जिसके अन्तर्गत वे केवल दो ही सन्तान को जन्म दें, अधिक नहीं।

इससे उनका जीवन न केवल सुखी, स्वस्थ एवं खुशहालीपूर्ण व्यतीत होगा अपितु रहन-सहन का स्तर ऊंचा होगा। परिवार-नियोजन से केवल एक व्यक्ति का और एक परिवार का ही कल्याण नहीं होता वरन उससे देश समाज और मानवता का हित संभव है। आज आम जनता के मध्य सन्तति निरोध की विधियां दो रूप से देखी जाती हैं।

अस्थाई विधि:- वे हैं जिससे पति पत्नी अपनी इच्छानुसार सन्तति निरोध कर सकते हैं जैसे गर्भनिरोध की गोलियां, कापर-टी, कंडोम, जैली आदि जो दवाई की दुकानों में उपलब्ध हैं तथा सब स्वास्थ्य कल्याण केन्द्रों में मुफ्त मिलती हैं।

स्थाई विधि:- स्थाई विधि वे हैं जिनके अन्तर्गत युगल स्थाई रूप से ऑपरेशन के द्वारा सन्तति निरोध कर सकते हैं।

भारतीय समाज में जब विवाह होता है तो लड़की की उम्र 19 तथा लड़के की उम्र 25 की अवश्य होनी चाहिए। नवविवाहितों को विवाह के तुरन्त पश्चात सन्तानोत्पत्ति के विषय में नहीं सोचना चाहिए। जब एक दो वर्ष पश्चात उपयुक्त एवं रूचिकर जीवन यापन कर लें, तब आर्थिक स्तर, मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य आदि को ध्यान रखते हुए अपनी संतान को

स्वस्थ वातावरण में जन्म दें। तब तक वे अस्थाई विधि द्वारा सन्तति निरोध कर सकते हैं।

पति-पत्नी अगर दूसरी सन्तान के इच्छुक हैं तो दूसरा बच्चा कब तक चाहिए, यह सोच लें। व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो हम देखते हैं पहले और दूसरे सन्तान के मध्य कम से कम तीन से पांच साल का फासला अवश्य हो। इस बीच वे अस्थाई विधि का प्रयोग कर सकते हैं।

यह बड़ा ही लज्जास्पद विषय है कि पति पत्नी दोनों के पढ़े लिखे होने के बावजूद लोग अनचाहा गर्भधारण कर लेते हैं तथा बार बार गर्भपात करवाते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए जबकि सभी स्थान पर सन्तति निरोध के विभिन्न साधन उपलब्ध हैं। ऐसा करने से वे स्वयं अपने भविष्य के लिए मुसीबत को बुलावा देते हैं।

पति एवं पत्नी को चाहिए कि एक या दो सन्तानों के पश्चात वे स्थायी विधि को अपना कर परिवार नियोजन अवश्य कर लें। ऐसा करने से ही जीवन का लक्ष्य पूरा होगा, साथ ही बच्चों को अच्छी शिक्षा व सुख-सुविधाएं प्रदान हो जाएंगी जो भावी जीवन के पथ का निर्माण कर देश का भविष्य बनेंगे।

- रूबी

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