पुरूष स्त्री पर हावी क्यों

पुरूष स्त्री पर हावी क्यों

हमारे समाज में यह देखा गया है कि प्राय: महिलाएं गृहिणी ही होती हैं। वे घर से निकलकर नौकरी, व्यवसाय कम करती हैं। उनमें यह मान्यता होती है कि घर का खर्च चलाना केवल पति की जिम्मेदारी होती है। पुरूष यह भूल जाता है कि बेचारी स्त्री सुबह से शाम तक घर में चक्की की तरह पिसती रहती है। खाना-बनाना, बच्चों का ख्याल रखना, झाडू़ पोछा करना, बर्तन और कपड़े धोना आदि गृहस्थी के सारे दिन प्रतिदिन के काम निबटाती है। उसे दिन में पल भर विश्राम नहीं मिलता। दिन भर घर का हर छोटा बड़ा सदस्य अपने हुक्म चलाता रहता है ठीक उसी प्रकार जैसे ऑफिस में बॉस अपने मातहतों पर चलाता रहता है। घर के पुरूष को घर चलाने में स्त्री के अमूल्य योगदान को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उसको सिर्फ इस बात पर घमंड नहीं करना चाहिए कि वह महान है क्योंकि घर का सारा खर्च उसी की कमाई के कारण चलता है। घर चलाने में स्त्री तथा पुरूष दोनों का बराबर का योगदान है। अगर ध्यान से देखा जाए तो स्त्री का योगदान ज्यादा मालूम पड़ेगा। अगर महिला कामकाजी हुई तो उस पर पुरूष ज्यादा हावी नहीं हो पाता। पुरूषों को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि हाउसवाइफ घर में दिनभर रहती है तो उसका योगदान रत्ती भर कम नहीं होता। उसकी कुर्बानी को एक कामकाजी महिला के योगदान से कम नहीं आंका जा सकता।

कामकाजी महिलाओं की अपेक्षा एक घरेलू महिला (हाउसवाइफ) का गृहस्थी की गाड़ी चलाने में अधिक योगदान है। हमें उसके निस्स्वार्थ योगदान को नहीं भूलना चाहिए तथा पुरूषों को अपनी पत्नियों पर हावी नहीं होना चाहिए। जिस देश में महिला राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री तथा लोकसभा सदस्य के पदों पर काम कर रही हैं वहां स्त्री शक्ति का सम्मान करना चाहिए।

-एस. के. त्रिपाठी

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