छरहरी काया की दीवानगी

छरहरी काया की दीवानगी

फिल्म एवं टीवी आज मनोरंजन के सबसे प्रमुख माध्यम बन गए हैं। इनके नायक नायिका एवं कलाकार सबको प्रभावित कर रहे हैं। इनकी नायिकाओं से नारी वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। ये नायिकाओं की छरहरी काया को आदर्श मानकर उसकी दीवानी हो गई हैं और अपनी काया को छरहरी करने के लिए अविवेकपूर्ण डायटिंग कर रही हैं। दैनिक आवश्यकता से भी कम मात्रा में भोजन कर रही हैं। अपना मन मारकर भूखी रह रही हैं। देश के महानगरों में जीरो फिगर का जोरदार आकर्षण है। वहां की नारियां वजन एवं शरीर घटाने की भूख में भूखी रह रही हैं। ये ऐसा कर जरूरी पोषण तत्व के अभाव में अपने को बीमार कर रही हैं। डायटिंग करने वाले शहरों में से मायानगरी मुम्बई को शिखर स्थान मिला है। यहां की 55 प्रतिशत लड़कियां रोजाना डायटिंग कर रही हैं। वैसे देश की 40 प्रतिशत युवतियां ऐसा स्लिम शरीर पाने हेतु सामूहिक भोज के आयोजनों में भोजन करने से बीच-बीच में बचती हैं किंतु मुम्बई की 40 प्रतिशत लड़कियां रोज डायटिंग करती हैं। जीरो फिगर का क्रेज 12 वर्ष की लड़कियों में भी देखा जा रहा है।

अविवेक पूर्ण डायटिंग के नुकसान

शरीर को व्यक्ति की उम्र एवं उसके कार्य के अनुसार दैनिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। यह ऊर्जा एवं पौष्टिक तत्व हमें भोजन से मिलता है। स्लिम होने, जीरो फिगर पाने अविवेकपूर्ण भोजन कम करने या त्यागने से वजन व मोटापे से मुक्ति जरूर मिलती है किंतु शरीर व स्वास्थ्य दोनों गड़बड़ा जाते हैं। स्लिम होने, जीरो फिगर पाने एवं डायटिंग करने वाली को अपने आहार का युक्तिसंगत नियोजन करना चाहिए। किसी भी स्थिति में ऊर्जा एवं पौष्टिक तत्व जरूरी है। इसके लिए संतुलित आहार जरूरी है। अवैज्ञानिक डायटिंग से सिरदर्द, आलस्य, अनिद्रा, त्वचा रूखी होना, बाल कमजोर होना, अनीमिया, दिल की धड़कन बढऩा, हड्डी कमजोर होना, शरीर निर्बल होना, प्रजनन प्रभावित होना जैसी परेशानी भविष्य में आ सकती है। वजन कम करने हेतु डायटिंग से बेहतर है खाने में संतुलित आहार का उपयोग किया जाए। विशेषज्ञों की सलाह के बिना ही लड़कियां कैलोरी और वसा से परहेज करती हैं जबकि इनकी शरीर को जरूरत भी होती हैं

जीरो फिगर के लिए सेहत जीरो न कीजिए

कोमलांगी स्लिम बनिए, फिगर जीरो कीजिए किंतु बेतुकी डायटिंग कर सेहत न बिगाडि़ए। उम्र एवं कार्य के अनुसार भोजन जरूर कीजिए। भोजन में फल, सब्जी सलाद, सूप, जूस, दूध दही, अनाज, दाल की मात्र जरूर हो वसा अर्थात तेल घी एवं नमक शक्कर की मात्रा ज्यादा कदापि न हो। एक बारगी ज्यादा न खाएं। थोड़ा-थोड़ा कर अंतराल में 3-4 बार खाइए। भोजन संतुलित एवं पौष्टिक हो। तभी आप स्वस्थ व कमनीय रहेंगी।

- नीलिमा सीतेश

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