गर मंगेतर साथ हो तो

गर मंगेतर साथ हो तो

सगाई होने के बाद तो लाइसेंस मिल जाता है साथ घूमने फिरने का। अगर आप एक ही शहर में हैं तो फिर बात ही क्या। सगाई से शादी तक के अंतराल में कई बार घूमना हो जाता है। अगर आप दूर शहर में हैं तो फिर घूमना मुमकिन नहीं होता।

अगर आप अपने मंगेतर के साथ बाहर हैं तो शिष्टता दिखाना भी जरूरी है ताकि आप शिष्ट मंगेतर बन सकें पर ध्यान दें शिष्टता के चक्कर में इतना दिखावा न करें कि वो बनावटी लगे। फिर भी मंगेतर पर अच्छा प्रभाव बना रहे, इतना ध्यान अवश्य रखें।

लड़कियों को भी अपनी रिस्पेक्ट करवाना अच्छा लगता है तो इस पर विशेष ध्यान दें। जैसे लिफ्ट पर जा रहे हैं तो पहले उन्हें आगे जाने दें। बिल्डिंग या गेट के अंदर जाना है तो पहले उन्हें प्रवेश करवाएं। कार में भी बैठते समय पहले कार का दरवाजा खोलकर उन्हें बैठने दें। फिर स्वयं ड्राइविंग सीट पर बैठें।

अगर शापिंग के लिए साथ जा रहे हैं तो शापिंग बैग स्वयं पकड़ें। मंगेतर को न पकडऩे दें। इससे उसे लगेगा कि आप काफी केयरिंग हैं।

मंगेतर को घर तक छोडऩे जा रहे हैं तो उसे कॉलोनी के बाहर छोडऩे के बजाय घर के गेट तक छोड़कर आएं ताकि वह सुरक्षित अपने घर पहुंच जाएं।

प्रयास कर मंगेतर को फ्रेंडस पार्टी पर साथ न ले जाएं क्योंकि उस पर आप उतना ध्यान नहीं दे पाएंगे, न ही स्वयं पूरा आनंद ले सकेंगे।

अगर किसी पार्टी में मंगेतर भी है और कुछ पुराने मित्र मिल जाएं तो दोस्तों से जान पहचान करवा कर बाकी समय अपनी मंगेतर के साथ ही बिताएं।

अगर आप लंच या डिनर पर बाहर अपनी मंगेतर के साथ जा रहे हैं तो पहले उसे कुर्सी ऑफर करें, फिर स्वयं बैठें और अपनी कुर्सी थोड़ी दूरी पर रखें ताकि वो खाते समय कंफर्टेबल फील करें और बात भी आराम से हो सके।

अगर आप वैसे ही घूमने फिरने जा रहे हैं तो उसे भी बोलने का पूरा अवसर दें ताकि वो आपके साथ सहजता महसूस कर सके।

कुछ भी खाने से पूर्व अपनी मंगेतर की पसंद जरूर पूछें, तभी आर्डर करें।

- सुनीता गाबा

Share it
Top