महकती सांसें

महकती सांसें

अनेक टूथपेस्ट के विज्ञापनों में महकती सांसें सबको पास लाएं कहकर प्रचारित किया जाता है किन्तु ऐसा कदापि नहीं होता। टूथपेस्ट से अधिक व्यक्तिगत साफ-सफाई महत्त्व रखती है। दांत, मसूड़े, मुंह एवं पेट के साफ रहने से मुंह एवं सांसें महकती रहती हैं।

इनकी ठीक प्रकार से सफाई नहीं करने से, इनमें सडऩ से एवं इनकी बीमारियों के कारण मुंह व सांसों से दुर्गंध आती है। यही दूसरों को परेशान करती है एवं पास आने से रोकती है इसीलिए मित्र एवं प्रियजन पास नहीं आते। मुंह एवं सांसों की दुर्गंन्ध व्यक्ति को असहज बना देती है।

यह गंध ही दूसरे को हमारे पास लाती है या दूर ले जाती है। यह संबंधों को बनाती, बिगाड़ती भी है। विपरीत लिंगी आकर्षण अर्थात् लड़का-लड़की, स्त्री-पुरूष के बीच संबंध को तय करने एवं निर्वाह करने में यही गंध महत्त्व रखती है। जिसकी गंध अच्छी लगती है, उसका सामीप्य हमें अच्छा अनुभव कराता है। यह है शरीर, मुंह एवं सांसों की गंध का महत्त्व। यह संबंध को प्रगाढ़ बनाती है या कमजोर करती है। यह दूरगामी प्रभाव डालती है।

दुर्गंध के कारण:-

- शरीर का भीतरी भाग ठीक प्रकार से साफ नहीं होना।

- दांत, मसूड़े, जीभ एवं मुंह का भीतरी भाग ठीक प्रकार से साफ न होना।

- दांत, मसूड़े एवं मुंह की भीतरी बीमारियां।

- पेट की भीतरी बीमारियां, कब्ज, अपच, बदहजमी आदि।

- लहसुन, प्याज, मांसाहार की अधिकता।

- चीनी व मीठी पदार्थों का अधिक सेवन।

- तली, भुनी वस्तुएं ज्यादा खाना।

- अधिक उपवास रखना, डायटिंग करना।

- नशीले पदार्थ, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी, मंदिरा, तंबाकू, गुड़ाखू आदि का उपयोग।

- शुगर, डायरिया, दस्त आदि की बीमारी।

दुर्गंध से बचने के उपाय:-

- दैनिक दो बार दांत, जीभ, मसूड़े एवं मुंह की सफाई करें।

- शौच को न रोकें। नित्य एक या दो बार जाएं।

- नहाते समय शरीर की पूर्णत: सफाई करें।

- अधिक मीठी वस्तुएं न खाएं।

- अधिक तली, भुनी वस्तुएं न खाएं।

- मांसाहार त्याग दें या अत्यन्त कम कर दें।

- प्याज, लहसुन कम खाएं।

- सभी प्रकार के नशों से दूर रहें।

- दांत, मसूड़े, जीभ एवं मुंह को बीमारियों से बचाएं।

- सीमित उपयुक्त हल्का भोजन करें। पेट को बीमारियों से बचाएं।

- अधिक उपवास एवं अधिक डायटिंग न करें।

- फल, सब्जी, सलाद, सूखे मेवे खाएं। रेशेदार चीजें खाएं।

- दो तीन बार उंगली से दांत, मसूड़े, जीभ व मुंह की सफाई करें।

- तीन-चार बार कुल्ला करें।

- नमक के पानी से भी कुल्ला करें।

- रात को सोने से पूर्व ब्रश करें। मुंह साफ रखें।

- गुटखा, गुड़ाखू, तम्बाकू, सुपारी, पान सेवन न करें।

- नींबू या पुदीना पानी पिएं।

- भुनी हुई लौंग, सौंफ, जीरा, धनिया, इलायची, तुलसी पत्ता, पुदीना पत्ती आदि समय-समय समय पर लें।

- पर्याप्त पानी पिएं।

- त्रिफला पानी का सेवन करें।

- माउथवाश का उपयोग करें।

- समय-समय पर दांतों के डॉक्टर के पास जा कर दांतों का चेकअप करवायें।

- नीलिमा द्विवेदी

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