महिलाओं की मुसीबत बनी बीमारियां

महिलाओं की मुसीबत बनी बीमारियां

जो जीव इस धरा पर आया है उसकी एक न एक दिन मृत्यु निश्चित है चाहे वह बीमारी से मरे या किसी आपदा से। मृत्यु सबसे बड़ा सत्य है। यह कटु व अकाट्य है। इसे टाला नहीं जा सकता किन्तु बीमारी और आपदा से कुछ सीमा तक बचा जा सकता है।

स्त्री और पुरूष दो रूप हैं। इनमें से स्त्री को अपनी नारीगत शारीरिक संरचना के कारण कुछ बीमारियां अधिक होती हैं। कुछ ऐसे गंभीर रोग हैं जो औरतों की ज्यादा परेशान करते हैं जो इन्हें पुरूषों की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत अधिक होने की संभावना रहती है। इन बीमारियों के लक्षणों को जान समझकर नारी कुछ सीमा तक इनसे बची रह सकती है।

इन्हें कैंसर, हड्डी रोग, हृदय रोग, गर्भाशय रोग, शुगर, टी.बी. होने की आशंका पुरूषों की तुलना में 12 से 20 प्रतिशत अधिक रहती है। प्राथमिक चरण में इन बीमारियों का पता चल जाने पर इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है और त्रासद स्थिति से कुछ सीमा तक बचा जा सकता है। वर्तमान समय में बीमारियां अधिक हैं, उनके कारण अधिक हैं, उनकी जटिलताएं अधिक हैं, फिर भी सबका दवा द्वारा उपचार संभव है।

कैंसर:- महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, हेड एण्ड नेक कैंसर तथा वल्वर कैंसर होने की आशंका ज्यादा रहती है। ब्रेस्ट कैंसर स्तन की कोशिकाओं में होता है। ये अनियंत्रित तरीके से बढ़ती है। इसमें स्तन या बगल में गांठ पड़ती है। इससे स्तन की त्वचा के आकार प्रकार में बदलाव आता है। इसमें स्तन की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ती एवं गांठ, ट्यूमर बनाती हैं जो कैंसर का रूप ले लेती है। इससे बचने के लिए वजन नियंत्रित रखें। शराब नहीं पिएं। अपने बच्चे को स्तनपान कराएं। निष्क्रिय जीवन की बजाय लगातार सक्रिय रहें।

सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के नीचे वाले भाग गर्भाशय ग्रीवा में घातक कोशिकाओं की वृद्धि होती है। इसमें कैंसर की स्थिति में रजोनिवृत्ति के बाद भी खून बहता रहता हैं। यह लम्बे समय तक गर्भ निरोधक गोली खाने एवं वायरस संक्रमण के कारण होता है। बचाव के लिए गर्भ निरोधक गोली खाने से बचें। एच.पी.वी. वैक्सीन लें। पैप स्मीयर टेस्ट कराएं। इससे दुनियां में प्रति वर्ष पौने तीन लाख महिलाएं मरती हैं जिनमें से 27 प्रतिशत मौतें भारत में होती हैं। भारत में प्रतिवर्ष 1.32 लाख महिलाओं को इस बीमारी का पता चलता है। प्रारंभिक जांच से पता चल जाने पर निदान हो जाता है।

हेड एंड नेक कैंसर में मुंह, नाक, लार, ग्रंथि, गले व कंठ में कैंसर होता है। इनमें गांठ या घाव हो जाता है जो ठीक नहीं होता। इससे आवाज बदल जाती है एवं कुछ भी निगलने में असुविधा होती है। यह शराब व तंबाकू सेवन के कारण होता है। इससे बचने के लिए दांतों का परीक्षण कराते रहना चाहिए। एच.पी. वी. टीका लगवाना चाहिए।

वल्वर कैंसर महिलाओं के जननांग के बाहरी भाग में होता है। इससे पेशाब में जलन एवं खुजली होती है। खून निकलता है। किडनी, ट्रांसप्लांट, यौन बीमारियों या एच.पी.वी. से पीडि़त महिलाओं में होने की संभावना अधिक रहती है। बचाव के लिए एच.पी.वी. टीका लगवाएं।

हड्डी रोग:- महिलाओं को खानपान में पौष्टिकता की कमी एवं नारी शरीर के कारण मेनोपाज के उपरान्त हड्डियों से संबंधित परेशानियां होती हैं। उन्हें आस्टियोपोरोसिस की बीमारी हो जाती है जिससे उनकी हड्डियां बहुत कमजोर होकर टूटने लगती हैं जिससे तेज दर्द होता है। हड्डियां दुर्बल रहती हैं। शराब एवं सिगरेट पीने वाली महिलाओं को यह बीमारी होने की संभावना ज्यादा रहती है। अपरिपक्व मेनोपाज के कारण भी यह होता है।

इससे बचाव के लिए कैल्शियम वाली एवं पौष्टिक चीजें खाएं। नशापान न करें। वजन नियंत्रित रखें। महिलाओं को आर्थराइटिस की परेशानी भी ज्यादा होती है। इससे जोड़ व मांसपेशियां प्रभावित होती हैं। चलने में तकलीफ होती है। मोटापा एवं हड्डियों के घिसने पर यह परेशानी होती है। इससे बचने के लिए कैल्शियम वाला पौष्टिक भोजन लें। व्यायाम करें। महिलाओं में ऐसे केस 2.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहे हैं।

हृदय रोग:- महिलाओं को अब कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज होने की संभावना ज्यादा रहती है। इससे दिल व धमनियां प्रभावित होती हैं और हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। इससे छाती, पीठ, जबड़े आदि में बाई ओर दर्द होता है। उल्टियां होना, तेज पसीना आना, चक्कर आना भी इसके लक्षण होते हैं। यह बीमारी बी पी व कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, डायबिटीज और मानसिक तनाव की स्थिति में होती है। इससे बचने के लिए भोजन में वसा कम लें। नियमित व्यायाम करें। वजन, मोटापा, बी.पी. कोलेस्ट्राल नियंत्रित रखें। तनाव मुक्त रहें। 65 वर्ष से ऊपर की महिलाएं इसका ज्यादा शिकार होती हैं।

टी.बी.:- टी.बी. संक्रामक बीमारी है। इससे फेफड़ों के अलावा शरीर का कोई भी भाग प्रभावित होता है। इससे वजन कम हो जाता है। कमजोरी अनुभव होती है। अनिच्छा हावी हो जाती है। खांसी आती है। रात में पसीना आता है। यह बीमारी एक से दूसरे में सांस के द्वारा फैलती है। बच्चों को इससे बचाने हेतु टी.बी. का टीका लगवाएं। प्रदूषण वाले स्थान के रहवासी समय-समय पर अपनी जांच कराएं। दुनियां में 90 करोड़ महिलाएं इससे प्रभावित हैं। इनमें से 15 से 44 वर्ष की 87 लाख महिलाएं प्रतिवर्ष इस रोग से जान गंवा देती हैं।

शुगर:- खून में शुगर का लेवल बढ़ जाने से यह होता है। यह पेन्क्रियाज की निर्बलता के कारण भी होता है। इससे पीडि़त व्यक्ति थका-थका सा रहता है। उसे प्यास ज्यादा लगती है। लगातार पेशाब आता है। आंखों में धुंधला दिखता है। वजन अचानक कम हो जाता है। मोटापा, अनियमित जीवनशैली, पाचक ग्रंथि, पेन्क्रियाज के ठीक से काम नहीं करने के कारण यह होता है। इससे जननांग में खराबी आ जाती है। इससे बचने हेतु पौष्टिक भोजन करें। नियमित व्यायाम करें। मोटापा एवं वजन अधिक हो तो उसे नियंत्रित करें। संयमित जीवनशैली अपनाएं। महिलाओं में इसके मामले 8० प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

- सीतेश कुमार द्विवेदी

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