नया नाता जोडऩे से पहले पुराने संबंधों को कहिए अलविदा

नया नाता जोडऩे से पहले पुराने संबंधों को कहिए अलविदा

संबंध जितनी जल्दी जुड़ते हैं, शायद उतनी जल्दी टूट भी जाते हैं। इतने लंबे संबंध क्षण भर में समाप्त हो जाते हैं और आप पुन: अकेले हो जाते हैं। विवाह जैसे पवित्र रिश्ते का अंत तलाक में हो जाता है। विवाह या कोई रिलेशनशिप, जब टूटती है तो व्यक्ति अकेलेपन व डर का शिकार हो जाता है। उसका विश्वास खत्म हो जाता है पर ऐसा नहीं कि एक रिश्ते के टूटने से सब कुछ ठहर जाए। इस स्थिति से उबरने में हर किसी को थोड़ा समय चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब आप लंबे समय की रिलेशनशिप से अलग होते हैं तो एक नई रिलेशनशिप में इतनी जल्दी प्रवेश नहीं करना चाहिए। कुछ समय अकेले रहना सीखना चाहिए। यह ऐसा समय होता है, जब आप खुद अपने साथ होते हैं, खुद को समझते हैं। उस समय आप यह जानें कि आप अपनी रिलेशनशिप में चाहते क्या हैं क्योंकि जो रिलेशनशिप आप तोड़ चुके हैं, उसके टूटने के कुछ कारण रहे होंगे। आपकी नयी रिलेशनशिप उन कारणों से प्रभावित न हो,इसलिए अपने को समझें और इस दौर से ऐसे उबरें कि आपकी नयी रिलेशनशिप स्थायी रहे।

अपने पुराने संबंधों के दरवाजे धीरे से बंद करिए पर दृढ़ता से। अगर आप अपने पुराने संबंधों से कभी भी आमना-सामना नहीं करना चाहते और पीछे मुड़कर नहीं जाना चाहते तो उनसे पूरी तरह संबंध तोड़ दें। अपने साथी को फोन करना, ई-मेल मेसेज भेजना, उसे यह बोलना कि 'मैं तुम्हें मिस करती हूं' 'मैं तुम्हें अब भी प्यार करती हूं, कभी भी आपको आपकी पुरानी रिलेशनशिप से उबरने नहीं देगा, इसलिए अगर आप नई रिलेशनशिप की सार्थकता चाहती हैं तो अपने पुराने संबंध को अलविदा कर दें, तभी आप अपने नए संबंध के साथ न्याय कर पायेंगी। यह थोड़ा मुश्किल तो होगा पर अगर आपने आगे चलना है तो पीछे मुड़ कर न देखना ही बेहतर है। इसलिए आगे देखें, पीछे नहीं।

आप तब तक नए संबंध की ओर अग्रसर न हों, जब तक खुद को उसके लिए तैयार न पाएं। अगर आपके परिवार वाले आपको मजबूर भी करें तो उन्हें स्पष्ट तौर पर कह दें कि जिस दिन आप नए संबंधों को जोडऩे के लिए स्वयं को तैयार पाएंगी, स्वयं उन्हें बता देंगी।

कई बार पुराने संबंध टूटने पर व्यक्ति स्वयं को इतना दुखी पाता है कि शराब या अन्य नशों में डूब जाता है। ऐसा करने से उसका दुख तो दूर नहीं होता पर उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर अवश्य पड़ता है इसलिए ऐसे गम दूर भगाने वाले शौकों से दूर ही रहें। ऐसे शौक अपनाएं, जिनसे आपको संतुष्टि मिले। धीरे-धीरे आप अपना आत्मविश्वास वापस पाएंगी।

इस दौरान अगर आप किसी के प्रति आकर्षित हों तो यह नहीं कि एकदम से उससे संबंध जोड़ लें। उसे जानने का प्रयत्न करें। देखें कि आप जो चाहती हैं, उस पर वह कितना खरा उतरता है। जब आप उससे मिलें तो यह नहीं कि अपने पुराने संबंधों का बखान करने में लग जाएं। अगर वह आपके पुराने संबंध के बारे में पूछे तो यही कहें कि अब वे संबंध खत्म हो चुके हैं और आप उनका जिक्र करना भी पसंद नहीं करतीं।

यह मान कर चलें कि दुनियां में सभी व्यक्ति एक समान नहीं होते। अगर एक पुरूष से आपको दुख मिले हैं तो यह धारणा बना लेना कि सभी पुरूष खराब होते हैं, गलत है। यह भी मानना कि जो गुण आपके पहले वाले साथी में थे, वह दूसरे में होंगे, एकदम गलत है क्योंकि यह जरूरी नहीं है, इसलिए बेहतर यही है कि अपने अतीत की तुलना वर्तमान से न करें। हर व्यक्ति के कुछ गुण-अवगुण होते हैं। आपका नजरिया ऐसा हो कि आप उसके गुणों को जानने का प्रयत्न करें।

पुराने संबंध टूटने पर जब आप अकेले हो जाएं तो खुद को अकेलेपन के अंधेरे में न डुबोएं। नए लोगों से मेलजोल करें, अपने काम में व्यस्त रहें और खुद के बारे में अच्छा महसूस करें, यह आपको नया विश्वास देगा।

-सोनी मल्होत्रा

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