अगर ऑफिस में हो महिला बॉस

अगर ऑफिस में हो महिला बॉस

आधुनिक दौर में महिलाओं ने हर क्षेत्र में खुद को साबित किया है। अगर आपके ऑफिस में बॉस महिला है तो वह आपको हर काम में प्रोत्साहित करती हुई नजर आएगी। अनुभव बताते हैं कि महिलाएं अपने काम को लेकर बेहद संजीदा होती हैं। इसीलिए वे ऑफिस वर्क और टारगेट्स को पूरा करने में भी बहुत मेहनत करती हैं। काम के दौरान होने वाली छोटी-मोटी परेशानियों में भी वे आपकी बहुत मदद करती हैं।

सदियों से महिलाओं की आलोचना होती आ रही है और उन्हें पुरूष वर्ग से कम समझा गया है लेकिन पिछले कुछ दशकों में महिला बॉसेज की तारीफ भी हुई है। कई बार एक महिला बॉस का रूप सभी पुरूषों को डरा भी देता है।

महिला बॉस हर काम को सामान्य तरीके से पूरा करने में विश्वास करती है। अगर आप किसी काम में गलती कर देते हैं, वे सीधे भड़कने की बजाय आपसे बात करना पसंद करेंगी। कई बार आप पारिवारिक या दूसरे कारणों से अपना सौ फीसदी समय नहीं दे पाते, ऐसे में महिला बॉस आपको सपोर्ट करेंगी।

वर्कप्लेस पर आपकी बॉस महिला हो या पुरूष, सबकी अपेक्षा आपके काम से होती है। अगर आप काम में हमेशा बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो आपको डरने की जरूरत नहीं है कि आपकी बॉस महिला है या पुरूष। महिला बॉस हो तो आपको थोड़ी ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

एक शोध के मुताबिक पुरूषों की तुलना में महिलाएं मल्टीटास्किंग आसानी से कर सकती हैं और किसी भी समस्या का समाधान निकालने में ज्यादा मुस्तैदी से काम करती हैं। ऐसे में उन्हें भी आपके काम से उसी परफेक्शन की चाहत रहती है।

महिलाएं बॉस होने के बाद भी ऑफिस और घर में सामंजस्य बिठाती हैं। हमेशा उन पर काम का दबाव थोड़ा अधिक होता है, फिर भी उनके काम में परफेक्शन को देखा जा सकता है। ऐसे में अपनी महिला बॉस की आलोचना के बजाय उनसे आप समय का पाबंद होने का गुण सीख सकते हैं।

इसके साथ ही उनसे घर और परिवार दोनों को एक साथ ऊर्जावान रहकर मैनेज करने की कला को भी सीखने की कोशिश कर सकते हैं। महिला बॉस है तो अपने इस भाव को बाहर निकाल दें कि महिलाएं काबिल नहीं होतीं या उन्हें जो मिला है वे उसे डिजर्व नहीं करतीं।

महिलाएं पुरूषों की तुलना में अधिक भावुक होती हैं और इसलिए उन्हें काम और वास्तविक जीवन में तालमेल बिठाने में पुरूषों की तुलना में थोड़ा अधिक समय लगता है। पुरूषों की तुलना में महिलाएं दोतरफा जीवन जीती हैं। घर पर वह पत्नी और मां होती हैं और ऑफिस में वो सिर्फ एक एम्प्लॉइ या बॉस होती हैं। काम पर आते समय उनके दिमाग में ये बातें होती हैं कि उनके बच्चे ने खाना खाया है या नहीं लेकिन ऑफिस में वो काम को ही प्राथमिकता देती हैं।

-नरेंद्र देवांगन

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