तन मन का रस भरा संगम है दांपत्य

तन मन का रस भरा संगम है दांपत्य

पति पत्नी के प्यार भरे रिश्ते में दोनों की पवित्र सांसों से निकली हुई हजारों फूलों के समान बिखरती सुगंध दांपत्य जीवन को ही नहीं बल्कि सारे वातावरण को सुगंधित कर देती है। दिल की गहराइयों से जुड़ा हुआ पति पत्नी का अथाह प्यार भर संबंध जिसमें प्यार, रोमांस, शरारत, नफरत, आकर्षण, छेड़छाड़ और रूठना मनाना, यूं समझो धरती पर ही जन्नत का संपूर्ण अहसास।

पति पत्नी का प्रेम इतना रस भरा होता है कि जिसके लिए जहां कुंआरे शादी के दिन का बेचैनी से इंतजार करते हैं वहीं प्रेमियों के प्यार की मंजिल होती है शादी। इस नाम को सुनते ही वानप्रस्थी भी यौवन में लौट आते हैं। एक गाड़ी के दो पहियों की तरह साथ-साथ चलने वाले दंपति एक दूसरे के बगैर अधूरे समझे जाते हैं। आखिर जिंदगी का लंबा सफर एक साथ तय करना मजाक की बात तो है नहीं। इस राह पर अगर कभी फूलों भरी सेज है तो कभी कांटों भरी पगडंडियां भी।

विवाह पूर्व पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे के लिए अजनबी होते हैं तथा अपने होने वाले हमसफर के विषय में सोचते रहते हैं। कल्पना में एक अच्छे इनसान की तस्वीर बसा कर भविष्य के सुंदर ही नहीं बल्कि अति सुंदर ख्वाब देखने लगते हैं। उसमें लड़ाई-झगड़े तो होते ही नहीं, बस प्यार ही प्यार होता है। शायद यह गृहस्थ रूपी गाड़ी की हकीकत से परे है। उसके सपनों के अतिरिक्त उसमें हैं आटे दाल के भाव से लेकर बच्चों की जिम्मेदारियां व परिवार के अंदर होने वाली नित्य की परेशानियां।

हकीकत तो यह है कि विवाहित जिन्दगी जोर शोर से शुरू होती है बैंड बाजों के साथ। कुछ दिन पति पत्नी हवाओं में तैरते हैं, आसमान की ओर भागते तथा चांद सितारे तोडऩे की बातें होती हैं। धरती पर पांव टिकते ही नहीं लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता जाता है वैसे-वैसे प्यार भरी मीठी बातें कम होने लगती हैं। एक दूसरे के गुणों का बखान कम और अवगुणों का जिक्र ज्यादा होने लगता है।

यही नहीं, एक छोटा सा अवगुण बहुत है अपने प्यारे से हमसफर पर छींटाकशी करने के लिए। फिर शुरू हो जाता है दांपत्य में रोज का कलह जिसके कारण दोनों के दिल की गहराइयों से छलकने वाला अथाह प्यार भी अतीत बनता चला जाता है।

जहां पतियों ने हमेशा ही खूबसूरत, पढ़ीलिखी, सुशील, विनम्र, गृहलक्ष्मी आदि सर्वगुण संपन्न पत्नी की कामना की है, वहीं पत्नियों ने पति के गुणों को लेकर इतनी बड़ी गलतफहमी कभी नहीं रखी। उनकी कल्पना में तो सदैव ऐसा पति रहा है जो सिर्फ उन्हें प्यार करे। सपनों में भी उसके अलावा किसी और को न रखे। उनकी नजरों में पति का सारा ऐश्वर्य नगण्य है। वे तो सिर्फ पति के दिल की दौलत पर राज करना चाहती हैं।

जहां पति के स्पर्श मात्र से ही पत्नी की सारी मुश्किलें दूर हो जाती हैं, वहीं उसके दो मीठे बोल पत्नी को संपूर्ण प्यार का अनुभव करा जाते हैं। यकीनन दांपत्य जीवन प्यार का गहरा सागर है लेकिन इसमें थोड़ी सी भी कड़वाहट पैदा हो गई तो बात बिगड़ भी जाती है एवं हल्की सी नोक झोंक भी लड़ाई झगड़ों का रूप ले लेती है। माना कि पत्नियों का अपने जीवन साथी पर लगाया गया आरोप हकीकत दर्शाता है लेकिन जीवन संगिनी का भी कुछ कर्तव्य जरूर बनता है जैसे-आफिस से आये थके हारे पति को घर में बोरियत का अहसास न हो या भूलकर भी इस तरह के तीखे शब्दबाण पत्नी की ओर से नहीं चलाए जाने चाहिए जो पति के दिल को चुभ जाएं।

एक आदर्श पत्नी का कर्तव्य निहित स्वार्थों के लिए सोचना उचित नहीं। यद्यपि विवाह के कुछ वर्षों उपरान्त पतियों में बदलाव आता है तो कहीं न कहीं आपकी भी भूल जरूर होती होगी। आखिर तन मन का रस भरा संगम है दांपत्य। इसलिए खुद को रोजमर्रा के कार्यों में इतना व्यस्त नहीं रखना चाहिए कि उसके लिए आपके पास वक्त ही न हो।

यह भी जरूरी नहीं कि पत्नी रूठे और पति मनाते फिरें। कभी-कभी रूठने का अधिकार उन्हें भी मिलना चाहिए। अगर धर्मपत्नी मनायें तो पति महोदय को भी आनन्द का अहसास मिलेगा। आखिर कुदरत ने भी दोनों को एक दूसरे के लिए बनाया है। वैसे भी कुछ वक्त का नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन का बंधन होता है। दांपत्य। जिंदगी के इस पथ पर अगर प्यार ही प्यार हो तो खट्टे मीठे अनुभव कैसे मिलेंगे।

- पुष्पा डिमरी

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