कौन से बर्तन में क्या पकाएं

कौन से बर्तन में क्या पकाएं

अच्छा खाना पकाने के लिए सही बर्तन का चुनाव करना बहुत जरूरी है। पर बहुत से लोग सोचते हैं कि स्वादिष्ट भोजन ठीक होनी चाहिए। बर्तन का क्या है, कोई भी बर्तन चलेगा। बहुत पुराने समय में तो केवल मिट्टी के ही बर्तन होते थे लेकिन आज जब मनुष्य ने इतनी तरक्की कर ली है और तरह-तरह के बर्तनों का आविष्कार कर लिया है तो हमें यह जानना बहुत जरूरी है कि किस प्रकार का बर्तन किस प्रकार का भोजन पकाने के लिए अच्छा है और क्यों? आजकल हमारे पास अनेक किस्म के बर्तन उपलब्ध हैं जैसे मिट्टी, कांच, लोहा, तांबा, पीतल, स्टेनलेस स्टील, एल्यूमीनियम, हार्ड एल्यूमीनियम, नानस्टिक बर्तन आदि।

मिट्टी के बर्तन: मिट्टी के बर्तनों का प्रचलन अब बहुत कम हो गया है क्योंकि ये आसानी से टूट जाते हैं और ऊष्मा के अच्छे सुचालक न होने के कारण खाना देर से पकाते हैं और इन्हें अच्छी तरह से साफ भी नहीं किया जा सकता है।

कांच के बर्तन: कांच के बर्तन पका हुआ खाना रखने के लिए तो बहुत अच्छे हैं क्योंकि कांच खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले अम्ल, क्षार व लवण आदि से कोई प्रतिक्रिया नहीं करता लेकिन भोजन पकाने के लिए जो कांच के बर्तन उपलब्ध हैं जैसे आंच पर रखी जा सकने वाली केतली या ओवन में रखे जा सकने वाले डोंगे, वे बहुत महंगे होते हैं और टूट भी सकते हैं। कांच ऊष्मा का अच्छा सुचालक भी नहीं है। यही कारण है कि इन बर्तनों का उपयोग आम घरों में अधिक नहीं होता है।

लोहे के बर्तन: लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल अनेक वर्षों से चला आ रहा है। लोहा ऊष्मा को सारे बर्तन में आसानी से बराबर बांट देता है जिसके कारण इन बर्तनों में खाद्य पदार्थ सब ओर से बराबर पकता व सिंकता है। लोहे के तवे, कड़ाही आदि का इस्तेमाल लगभग हर घर में किया जाता है। चने, करेले, भिंडी या सूखी पत्तेदार सब्जियां बनाने के लिए तो खासतौर से लोहे की कड़ाही का प्रयोग किया जाता है। इससे ये पदार्थ न केवल आकर्षक और स्वादिष्ट बनते हैं बल्कि इनकी पौष्टिकता भी बढ़ जाती है क्योंकि खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले अम्ल लोहे से प्रतिक्रिया करते हैं और कुछ मात्र में लोहा भोजन में घुल जाता है जो हमारे शरीर में रक्त निर्माण में सहायक होता है। लोहे के बर्तन काफी सस्ते भी मिलते हैं लेकिन इन्हें साफ रखना बहुत कठिन होता है क्योंकि लोहे के बर्तनों में जल्दी ही जंग लग जाता है।

तांबे के बर्तन: तांबा एक ऐसी धातु है जो ऊष्मा के बहुत अच्छे सुचालकों में से है। यह धातु महंगी होने के साथ-साथ खाद्य पदार्थों के अम्ल के साथ प्रतिक्रिया करके एक बहुत ही विषैला पदार्थ (सी.यू.एस.ओ.ए.) बनाती है इसलिए तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल खट्टे खाद्य पदार्थों को पकाने के लिए तो बिलकुल नहीं करना चाहिए। पीतल के बर्तन: पीतल के बर्तन तांबे बर्तनों से कुछ बेहतर होते हैं। पीतल एक मिश्रित धातु है जो तांबे और जस्ते के मिश्रण से बनती है। यह गर्मी का अच्छा सुचालक है।

अल्यूमीनियम के बर्तन: अल्यूमीनियम एक ऐसी धातु है जो सस्ती होने के साथ-साथ गरमी को भी बहुत अच्छी तरह से बांटती है। यह धातु जल, क्षार, नमक और तेजाब आदि से रासायनिक प्रतिक्रिया करती है। नमक युक्त खाद्य पदार्थों के अधिक देर तक संपर्क में आने से यह धातु गलने लगती है और इसमें छोटे-छोटे गड्ढे या छिद्र होने शुरू हो जाते हैं लेकिन दूध उबालने के लिए या कार्बोजयुक्त खाद्य पदार्थ पकाने के लिए ये बर्तन काफी अच्छे रहते हैं, खासतौर पर भारी तले वाले। अल्यूमीनियम का ही एक बेहतर रूप है हार्ड अल्यूमीनियम। इसका प्रयोग प्रेशर कुकर, प्रेशर पैन आदि के लिए किया जाता है। इसमें अधिक दबाव सहने की क्षमता होती है और क्षारमय वस्तुओं का इस पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। प्रेशर कुकर में खाना पकाने में समय, श्रम, धन और ईंधन की बचत तो होती ही है, भोजन के पौष्टिक तत्व भी अधिक मात्र में सुरक्षित रहते हैं।

नानस्टिक बर्तन: आजकल नान स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल भी काफी होने लगा है। ये बर्तन डोसा, पूड़े, टोस्ट, आमलेट आदि बनाने के लिए बहुत अच्छे हैं क्योंकि इनमें खाद्य पदार्थ बर्तन के साथ चिपकता नहीं है। इन बर्तनों में धातु के आधार पर 'टेफलान' नामक एक विशेष पालीमर की परत चढ़ाई जाती है जिसके कारण खाद्य पदार्थों के लवण, अम्ल या क्षार धातु से प्रतिक्रिया नहीं कर सकते और भोजन सुरक्षित रहता है। कम चिकनाई के प्रयोग से भी इन बर्तनों में व्यंजन आसानी से पक सकते हैं जिसके कारण चिकनाई से परहेज करने वाले व्यक्तियों को हल्का भोजन देने के लिए ये बर्तन बहुत उपयोगी होते हैं लेकिन ये काफी महंगे होते हैं और धातु की कड़छी, चम्मच आदि से इसकी परत में खरोंच आ सकती है या खाली बर्तन को आंच पर रख देने से यह परत पूरी तरह नष्ट हो सकती है। इस प्रकार हर किस्म के बर्तन की अपनी अलग विशेषताएं हैं। वैसे प्रेशर कुकर या प्रेशर पैन का इस्तेमाल सबसे उत्तम है, फिर भी अलग-अलग कामों के लिए हमें अलग-अलग किस्म के बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए। भारी तले के भगौने, कड़ाही आदि भोजन पकाने के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं लेकिन पीतल के पतीलों में खट्टे या अम्लीय पदार्थ नहीं पकाने या रखने चाहिए क्योंकि ऐसा करने से ये धातु खाद्य पदार्थ में घुलकर उसे विषैला बना देती है। ऐसे भोजन का सेवन करने से पेट दर्द, अत्यधिक दस्त, उल्टी, चक्कर आना जैसे लक्षण उभर सकते हैं। इस तरह की विषाक्तता से बचने के लिए एक उपाय है ऐसे बर्तनों पर कलई करवाना लेकिन आजकल की महंगाई के जमाने में पहले तो महंगे पीतल के बर्तन खरीदो, फिर समय- समय पर कलई करवाओ और साफ करने के लिए भी अधिक मेहनत करो। फिर भी कभीकभार विषाक्तता का डर हो ही जाता है।

स्टेनलेस स्टील के बर्तन: स्टेनलेस स्टील भी क्या गजब की चीज है। इसके बर्तन साफ करने कितने आसान हैं और काफी सस्ते भी मिल जाते हैं। स्टेनलेस स्टील एक मिश्रित धातु है जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु में न तो लोहे की तरह जंग लगता है और न ही पीतल की तरह यह अम्ल आदि से प्रतिक्रिया करती है परंतु स्टेनलेस स्टील में ताप का संचरण बराबर नहीं होता। कहीं से ज्यादा गरम तो कहीं से कम गरम होता है जिसके कारण भोजन कहीं-कहीं से जल जाता है। इस त्रुटि को दूर करने के लिए स्टेनलेस स्टील के बर्तनों के नीचे तांबे या एल्यूमीनियम की तह लगा दी जाती है जो ताप का संचालन ठीक कर देती है। ये बर्तन अपेक्षाकृत महंगे तो होते हैं लेकिन इनके गुणों के कारण इनका प्रचलन बढ़ता जा रहा है परंतु खरीदते समय यह अच्छी कंपनी के ही लेने चाहिए अन्यथा इनके नीचे लगी मोटी प्लेट कई बार अलग भी हो जाती है।

- नरेंद्र देवांगन

Share it
Top