घर परिवार: बचें सुबह की हड़बड़ी और तनाव से

घर परिवार: बचें सुबह की हड़बड़ी और तनाव से

जिस घर में पति-पत्नी दोनों या दोनों में से एक ऑफिस जाते हों और साथ ही बच्चे भी स्कूल जाते हों, उस घर में सुबह-सुबह बहुत काम रहता है। इतनी जल्दी और हड़बड़ी रहती है कि बहुत कुछ उल्टा-पुलटा हो जाता है, कुछ चीजें छूट जाती हैं। कभी नाश्ता बनने में देर तो कभी बच्चे तैयार नहीं हो पाते और कभी कोई चीज ढूंढे नहीं मिलती। ऐसे में अक्सर मूड खराब, नोक-झोंक और घर से निकलने में देरी।

सुबह-सुबह के इस अत्यधिक वर्कलोड का सर्वाधिक शिकार गृहस्वामिनी को होना पड़ता है। काम भी अधिकतर वही करती है, फिर भी उसी में कमियां ढूंढी जाती हैं। जो महिलाएं सूझ-बूझ से काम लेती हैं, उनके घर में सुबह प्राय: शांति से सब कुछ सम्पन्न हो जाता है। आप भी ऐसा कर सकती हैं। करना सिर्फ इतना है कि सुबह के कुछ काम रात को ही करके रख दें।

- सात वर्ष तक के बच्चे प्राय: स्वयं तैयार नहीं होते। वे दिन में अपनी स्कूल की चीजें मसलन कॉपी-किताबें, पेन, पेंसिल, पेंसिल कटर आदि इधर उधर रखकर भूल जाते हैं। आप रात को सोने से पहले उनका एक-एक सामान जांच लें अर्थात बस्ता पूर्ण करके रख दें। सुबह बस्ते की चीजें ढूंढने में लगने वाला वक्त बचेगा और कोई तनाव भी नहीं होगा।

- बच्चे का टिफिन धोकर रात को यथास्थान रखें। सुबह कौन सी ड्रेस पहनकर जाना है, उस डे्रस को भी कंपलीट करके रखें।

- 'सुबह की सुबह देखेंगे' यह मानसिकता छोड़ दें। सुबह जल्दबाजी और हड़बड़ी में कुछ काम छूट सकते हैं। समय पर कुछ चीजें याद नहीं आती। सुबह क्या बनना है, सोने से पहले ही तय कर लें और नोट करके रख लें।

- सुबह के कुछ काम पति से भी कराएं जैसे बच्चे को नहलाना और तैयार करना आदि।

- यदि सुबह दाल, चावल इत्यादि बनाने हैं तो रात को ही बीन कर रख दें।

- अगर सुबह आलू से कुछ बनाना है तो रात को उबालकर रख दें।

- रात को सोने और प्रात: जागने का समय निर्धारित करें। प्रात: सर्वाधिक काम खराब होते हैं देर से उठने के कारण। यह तय करें कि नाश्ते और लंच का सामान बनाने, नहाने-खाने और तैयार होने में कितना समय लगता है। जितना समय लगता है उससे थोड़ा और ज्यादा पहले उठें। यदि आपका सुबह घर में काम तीन घंटे का है और आपको नौ बजे घर से निकलना हो तो साढ़े पांच बजे उठें ताकि सारे काम तसल्लीबख्श और समय पर हो जाएं।

- बच्चों को भी समय से रात को सो जाने और प्रात: समय पर उठ जाने की आदत डालें। 2 से 8 वर्ष तक के बच्चों को तो आपको ही तैयार करना है मगर 10 से अधिक उम्र के बच्चों को अपने पर निर्भर न रखें। उन्हें स्वयं तैयार होने के लिए प्रेरित, प्रशिक्षित और निर्देशित करें। उन्हें स्पष्ट निर्देशित करें कि होम वर्क के बाद कॉपी, किताबें आदि बस्ते का सारा सामान इधर-उधर न रख कर बस्ते में रखें। सोने से पूर्व बस्ता खुद चैक कर लें। इसी तरह जो डे्रस प्रात:काल पहनानी है, उसमें रात को ही बच्चे का स्कूल परिचय पत्र और रूमाल आदि रख दें।

- सुबह का मैन्यू रात को तय कर तदनुरूप कुछ तैयारी कर लें जैसे आटा गूंथ कर और सब्जी काटकर रात को ही फ्रिज में रख दें। सुबह ब्रेड नाश्ते में लेनी हो तो शाम को ही खरीद कर फ्रिज में रख दें।

- बच्चे के जूते पालिश वाले हों और कपड़ों पर प्रेस होनी हो तो सुबह हो जाएगी वाले ढर्रे को छोड़ यह काम रात को ही कर लें।

- प्रयास करें कि बच्चा अपना होमवर्क रात को पूरा कर ले। न कर पाए तो आप उसकी मदद करें। अगर बकाया होमवर्क सुबह पर छोड़ दिया तो संभव है कि होमवर्क पूरा न हो पाए और होमवर्क पूरा भी हुआ तो किसी और काम के खराब होने का खतरा है।

- बच्चे के अतिरिक्त पति-पत्नी की अपनी भी तैयारी होनी चाहिए। पर्स, बैग व्यवस्थित हो, बिजली या टेलीफोन बिल कल जमा करना हो तो पर्स-बैग में रख लें। अपनी-अपनी पोशाकें ठीक कर लें आदि।

- प्रात: सिर्फ व्यायाम/मार्निंग वाक, स्नान, खाना बनाना, पेपर पढऩा और तैयार होकर चल पडऩा जैसे काम ही हों। फालतू के काम जैसे पोंछा लगाना रात को भी हो सकते हैं। सुबह काम कम होंगे तो आराम से निपट जाएंगे और दिन भी अच्छा कटेगा।

-ए. पी. भारती

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