ससुराल को स्वर्ग बनाएं

ससुराल को स्वर्ग बनाएं

प्रत्येक कुंवारी लड़की कामना करती है कि उसे सुंदर व सुसंस्कृत युवक पति के रूप में तथा सब तरह से सम्पन्न परिवार ससुराल के रूप में मिले, ससुराल में उसे सबका भरपूर प्यार भी मिले।

जिस परिवार में जन्म लेकर तथा पल-बढ़कर लड़की बड़ी होती है, वही मायका विवाह के बाद उसके लिए पराया घर हो जाता है तथा विवाह के पश्चात् वह जिस अनजाने ससुराल में वधू बनकर जाती है वही उसका अपना घर हो जाता है। यदि नववधू चाहे तो अपने व्यवहार व कुशलता से अपने ससुराल में सभी लोगों का दिल जीतकर ससुराल को स्वर्ग बना सकती है या चाहे तो कलह पैदा करके स्वर्ग जैसे ससुराल को नरक बना सकती है।

ये बातें प्राय: सुनने को मिल ही जाती हैं कि अमुक लड़की की उसके ससुराल में किसी से नहीं पटती। हमारे पड़ोस की लड़की विवाह के बाद एक सप्ताह भी ससुराल में नहीं टिक पाई और वापस मायके आ गई।

वह चाहती थी कि उसका पति परिवार से अलग रहे। पति के नहीं तैयार होने पर वह मायके चली आई। मां-बाप के समझाने पर भी वह ससुराल जाने के लिए तैयार नहीं हुई। वह ससुराल तभी गई जब उसका पति परिवार से अलग एक कमरा किराए पर लेकर उसे बुलाने आया।

आज भी पढ़ी-लिखी और समझदार समझी जाने वाली लड़कियां अधिकांशत: ससुराल में नहीं टिक पाती। ऐसी लड़कियां मानती हैं कि पति के साथ अधिकांश समय व्यतीत करने, घूमने-फिरने व मौज मस्ती करने के लिए ही विवाह किया जाता है।

शादी के बाद वधू के रूप में लड़की की जिम्मेदारी बढ़ जाती है लेकिन वे इसे स्वीकार नहीं करती। उनकी नजर में सास-ससुर, ननद-देवर की सेवा करना गुलामी है जिसे वे पसंद नहीं करती। उन्हें सास-ससुर व ननद-देवरों वाला परिवार भी पसंद नहीं आता क्योंकि ऐसे परिवार में उन्हें पति से प्यार करने की स्वतंत्रता नहीं होती। ऐसी स्थिति में उन्हें परिवार पसंद नहीं आता।

प्यार पाने के लिए प्यार लुटाना भी पड़ता है। नववधुएं ससुराल जाते ही परिवार से अलग रहने के लिए क्यों सोचती हैं?

उन्हें सदा याद रखना चाहिए कि उनका पति विवाह से पहले किसी का बेटा और भाई भी है। पति तो बाद में है। जितना अधिकार उसका पति पर है उससे कहीं अधिक अधिकार पिता, माता और बहन का भी है, इसलिए पति को अपना बनाने के लिए सर्वप्रथम परिवार के सभी सदस्यों को अपना बनाना जरूरी होता है।

आप अपने शालीन एवं नम्र व्यवहार से ससुराल की विषम परिस्थितियों को भी अनुकूल बना सकती हैं।

जिस तरह कुंवारी लड़की के मन में सास-ससुर के प्रति आतंक भरा होता है, उसी प्रकार सास-ससुर के मन में भी बहू को लेकर आशंकाएं हो सकती हैं। इन्हें नववधू अपने शालीन व्यवहार और नम्रता से दूर कर सकती है। इस प्रकार नववधू चाहे तो ससुराल को स्वर्ग समान बना सकती है।

- राजा तालुकदार

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