क्या प्यार सीमाओं का मोहताज है?

क्या प्यार सीमाओं का मोहताज है?

प्यार एक अनोखा अहसास है जो दो दिलों को आपस में इस कदर जोड़ देता है कि दोनों कभी भी खुद को एक दूसरे से अलग कर के नहीं देख पाते। उन्हें हमेशा यह महसूस होता है कि वे अकेले नहीं हैं बल्कि एक शख्स ऐसा है जो हर कदम पर उनके साथ चल रहा है लेकिन वास्तव में प्यार क्या है, इसका विश्लेषण किस प्रकार किया जाना चाहिए, इन प्रश्नों का कोई सर्वमान्य उत्तर अब तक उपलब्ध नहीं है क्योंकि इस बारे में सबके अपने-अपने ख्यालात हैं। जितनी मुंह, उतनी बातें सामने आती हैं।

जिस तरह प्यार की परिभाषा हर आदमी अलग-अलग तरीके से पेश करता है, उसी तरह लोगों का अन्दाजे-इश्क भी अलग-अलग होता है। इश्क लड़ाने का हर आदमी का अपना अलग स्टाइल होता है। कुछ चाहने वाले सिर्फ नजरों के तीर चलाकर अपने प्यार की भूख मिटाते हैं तो कुछ कहीं तन्हाई में जाकर इश्क की गुफ्तगू करने के शौकीन होते हैं।

बहुत से प्यार करने वाले प्यार जताने के लिए अपने हाव-भाव और इशारे से काम चला लेते हैं तो कुछ लोग होंठों से होंठ और बांहों से बांहें मिलाकर अपनी चाहत का प्रमाण देते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो मर्यादा की सारी हदें तोड़कर शारीरिक संबंध भी बना लेते हैं। वैसे आजकल शहरों में संपन्न घरों के लड़के-लड़कियां डिस्को में जाकर एक दूसरे से चिपककर पाश्चात्य धुनों पर थिरकने की परंपरा विकसित कर चुके हैं।

कहने का अभिप्राय यह है कि प्यार जैसी पवित्र भावना को सही रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह विडम्बना ही है कि ज्यादातर प्रेमी प्यार के वास्तविक स्वरूप एवं इसकी मर्यादाओं से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं या फिर अपने कुत्सित स्वार्थों की पूर्ति के लिए सारी सीमाओं एवं मर्यादाओं को जानते हुए भी नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि प्यार का स्वरूप दिनों दिन विकृत होता जा रहा है।

यह प्रश्न अभी बरकरार है कि हकीकतन प्यार किसे माना जाए तथा इसकी सीमाओं का निर्धारण किस प्रकार हो?

यूं तो यह आदमी की समझ पर निर्भर करता है कि वह प्यार को किस रूप में और किस नजरिए से देखता है और अपने लिए क्या-क्या सीमाएं निर्धारित करता है लेकिन अगर बारीकी से देखें तो पाएंगे कि प्यार एक नशे की तरह है जो आदमी पर यकायक हावी होता है और फिर सर चढ़कर बोलने लगता है। इस नशे की जद में आने वाला आदमी दिल के हाथों का खिलौना बन कर रह जाता है। सपनों की दुनियां में जीना उसकी आदत बन जाती है क्योंकि उसकी आंखों पर भावनाओं का संगीन पर्दा पड़ जाता है।

जिसके प्रति आसक्ति हो, उसमें सिर्फ खूबियां ही नजर आती हैं। जज्बात के समंदर में उठा तूफान सोचने समझने की शक्ति को क्षीण कर देता है। इस नशे के प्रभाव में व्यक्ति वास्तविकताओं को भी नजरअंदाज कर देता है। सही-गलत, उचित-अनुचित का ज्ञान होते हुए भी उनमें भेद कर पाना मुश्किल होता है। यहां तक कि व्यक्ति अपने आप पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रख पाता क्योंकि इश्क का नशा उसे अत्यधिक संवेदनशील बना देता है।

जहां तक प्यार की सीमाओं का प्रश्न है तो यह भी प्रेमियों के विवेक पर ही निर्भर है। यह फैसला उन्हें ही करना है कि उनकी सीमाएं कहां जाकर खत्म होती हैं। कहते हैं प्यार में दो जिस्मों का नहीं बल्कि दो आत्माओं का मिलन होता है। वैसे यदि प्यार सच्चा हो तो सीमाएं स्वत: निर्धारित हो जाती हैं क्योंकि सच्चे प्रेमी पाने के नहीं, खोने के अभिलाषी होते हैं। वे हमेशा अपने साथी के लिए बड़े-से बड़ा त्याग करने को तत्पर रहते हैं। इसीलिए कहा गया है कि प्यार कुरबानी का दूसरा नाम है।

सच्चे आशिकों के मन में प्यार की प्यास होती है, जिस्म की भूख नहीं। जाहिर सी बात है कि जो लोग प्यार को इबादत समझते हैं वे ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे प्यार की मर्यादा को ठेस लगती हो लेकिन यह तथ्य दुखदायक है कि आज प्रेम के यथार्थ अथवा वास्तविक स्वरूप को समझने वाले प्रेमियों की तादाद काफी घट चुकी है।

आज के ज्यादातर प्रेमी-प्रेमिका इतने उच्छंृखल होते हैं कि वे इश्क के नाम पर अश्लीलता और फूहड़पन की सारी हदें पार कर जाते हैं। इनके लिए कोई सीमा-सरहद नहीं होती। इनका प्यार पूरी तरह अनलिमिटेड होता है। प्यार को महज मजा मानने वाले ये आशिक सही मायनों में प्यार की पवित्र भावना से कोसों दूर होते हैं।

ये तो दरअसल प्यार के नाम पर अपने बदन की भूख मिटाने के तलबगार होते हैं। यही वजह है कि अनलिमिटेड स्टाइल वाले लवर्स की संख्या भी अनलिमिटेड होती है। ये एक के बाद अनेक के साथ प्यार का ढोंग कर अपने नापाक इरादों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। दरअसल ये अनलिमिटेड लवर प्यार करने वाले नहीं, शिकार करने वाले होते हैं, अत: इन्हें प्रेमी के बजाए शिकारी कहना ज्यादा उपयुक्त होगा।

ऐसा नहीं है कि प्रेम में शारीरिक स्पर्श पूर्णत: वर्जित है। एक हद तक इजहारे-इश्क में शारीरिक स्पर्श की भूमिका हो सकती है बशर्ते उसके पीछे कोई यौन-आकांक्षा न छिपी हो। प्यार में चुंबन की अपनी महत्ता है क्योंकि कभी-कभी किसी विशेष मौके पर प्यार जताने के लिए अथवा तोहफे के तौर पर चुंबन का इस्तेमाल किया जा सकता है मगर पूर्ण शालीनता के साथ क्योंकि प्यार में वासना के लिए कोई स्थान नहीं है लेकिन अनलिमिटेड स्टाइल वाले शिकारी प्रेमी इन बातों से बिलकुल इत्तफाक नहीं रखते। उनके पास हमेशा यही एक घिसा-पिटा तर्क होता है कि 'इश्क और जंग में सब जायज है' लेकिन सच तो यह है कि वे इस उक्ति का भी सही अर्थ नहीं जानते। इस उक्ति में सच्चे इश्क को जिन्दा रखने के लिए कुछ भी कर गुजरने को जायज बताया गया है न कि हवस की भूख मिटाने के लिए।

बहरहाल, दुनियां बदल रही है, दस्तूर बदल रहे हैं, मान्यताएं बदल रही हैं, ऐसे में अंदाजे-इश्क का बदलना भी स्वाभाविक है। इक्कीसवीं सदी के इस भौतिकवादी युग में सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों की परवाह किसे है लेकिन जितनी तेजी से हमारे देश का युवा वर्ग पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण की होड़ में अपनी विशिष्ट सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से दूर होता जा रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है।

- संतोष कुमार 'मधुप'

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