कान भी मांगते हैं श्रृंगार

कान भी मांगते हैं श्रृंगार

आजकल पुराने जमाने की तर्ज पर कानों के ऊपरी हिस्से को छिदवा कर छोटी-छोटी बालियां व टॉप्स पहनने का फैशन नया रूप लेकर आया है। बस में आती, कार चलाती कामकाजी महिलाएं, घर बैठी बूढ़ी अम्मा व कॉलेज जाती लड़कियां, सभी के कान आपको कुछ कहते सुनाई देंगे। प्राय: स्त्रियां अपने चेहरे के श्रृंगार पर तो खूब ध्यान देती हैं लेकिन कानों की सुंदरता व उनके श्रृंगार की ओर कोई विशेष ध्यान नहीं देती और कानों में कुछ भी पहन लेती हैं। कई महिलाओं के तो कानों की बनावट और चेहरे के आकार भी अलग-अलग होते हैं। किसी के कान छोटे होते हैं तो किसी के बड़े, किसी के कान मोटे तो किसी के कान पतले होते हैं। इसी तरह किसी-किसी के कान खड़े या चपटे भी होते हैं। उपरोक्त बातों के साथ पोशाक, चेहरे के आकार और रंग-रूप का भी विशेष ध्यान रखते हुए ही कानों का श्रृंगार किया जाये तो बेहतर होगा, अन्यथा आपकी सुदंरता फीकी पड़ जाएगी-

- यदि आपको लहंगा, लांचा, साड़ी या सूट ऐसे ही भारी परिधानों को पहनना हो तो कानों में कुछ भी पहनने की बजाए झुमकी या जिनकी चेन बालों तक जाती हो, ऐसे टॉप्स पहनें।

- अगर आपके बाल बॉबकट हैं तो आप पर लंबे कांटे बिलकुल नहीं फबेंगे। आप छोटे टॉप्स ही पहनें।

- पश्चिमी परिधानों या जींस के साथ पतली छोटी बाली या छोटे टॉप्स खूब फबेंगे।

- यदि आपका चेहरा भारी और गोल है तो आप कानों में उनको पूर्णरूप से ढकने वाले और जिनकी डिजाइन ऊपर की तरफ हो, कदापि न पहनें।

- यदि आपका चेहरा अण्डाकार है तो किसी भी तरह के कर्णाभूषण आप पर अत्यंत आकर्षक लगेंगे।

ह्नपतले लंबे चेहरे पर लटकने वाले कर्ण आभूषणों को भूल कर भी न पहनें।

- छोटी लड़कियों पर भड़कीले कर्ण आभूषण नहीं जचंते।

- प्रौढ़ महिलाओं में टॉप्स जो न ज्यादा बड़े हों, न ही ज्यादा छोटे, खूब फबते हैं।

ह्नकानों में पहने जाने वाले आभूषणों को आप अवसरानुकूल ही पहनें।

- कर्मवीर अनुरागी

Share it
Share it
Share it
Top