आपसी रिश्तों में मिठास बनाए रखें

आपसी रिश्तों में मिठास बनाए रखें

परिवार की एकता और खुशहाली, पारिवारिक रिश्तों की मिठास से ही कायम रह पाती है। ऐसे कितने ही सामाजिक एवं पारिवारिक रिश्ते होते हैं जिन्हें मधुर बनाये रखने के लिए एक दूसरे के हित-अहित, मान-सम्मान को ध्यान में रखना पड़ता है। 'अहम' के मामले में रिश्ते कभी-कभी टूटने के कगार पर पहुंच जाते हैं। अहम् से ही रिश्तों में हर्ष, ईष्र्या, कुंठा की भावना घर कर जाती है और अहम के चलते कई मधुर, नाजुक रिश्ते टूट जाते हैं।

वैसे देखा जाए तो अह्म प्राय: सभी रिश्तों में पाया जाता है चाहे वह सास-बहू, देवरानी-जेठानी, देवर-भाभी, ननद-भौजाई या मित्र वर्ग का ही रिश्ता क्यों न हो।

विनोद की शादी एक संभ्रांत परिवार की लड़की के साथ हुई। शादी के समय से ही ससुराल वालों के साथ टकराव शुरू हो गया जो अहम् के चलते आज भी कायम है।

न ही विनोद और न ही ससुराल वालों ने एक दूसरे को समझने का प्रयत्न किया, न मनाने का। अहम् के चलते दोनों परिवारों में कटुता की भावना भर गयी है। यदि विनोद या उसके ससुराल वाले दोनों में से कोई एक पक्ष भी अपने अहम् को त्याग कर दूसरे के अहम् का सम्मान करते तो जाहिर है दोनों परिवारों में खुशियां और भी बढ़ जाती।

पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्तों की मिठास को बनाए रखने के लिए चाहिए कि हर छोटी बात को तूल न दें। एक दूसरे पर दोषारोपण करने से बचें। किसी की भी उपेक्षा या उसे तिरस्कृत न करें, एक दूसरे से सहानुभूति जतायें, सराहना करें। दूसरों के अह्म के प्रति सम्मान दर्शायें। ऐसा करने से निश्चित रूप से सहजता से रिश्तों की मिठास और भी बढ़ायी जा सकती है।

- सुमित्रा यादव

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