बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि कैसे बनाएं

बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि कैसे बनाएं

भागदौड़ के इस युग में सभी माता-पिता बच्चों के प्रति चिंताग्रस्त रहते हैं कि उनके बच्चे का पढऩे में मन नहीं लगता। ये बातें ज्यादातर पांच साल से दस साल की उम्र वाले बच्चों में ही होती हैं। एक ओर माता-पिता इस समस्या को लेकर परेशान हैं तो दूसरी ओर शिक्षक भी इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि बच्चे जो स्कूल में पढ़ाया जाता है, उसे याद नहीं करते। इस समस्या के कारण माता पिता बच्चों को लेकर बहुत तनावपूर्ण व चिंताग्रस्त रहते हैं। यह समस्या कई परिस्थितियों के कारण होती हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सभी बच्चों की समझ तकरीबन एक जैसी ही होती है। बच्चों का पढ़ाई में पिछडऩे का कारण मुख्यत: अभिभावकों व स्कूल, दोनों की लापरवाही से होता है। माता-पिता को बच्चों को स्कूल भेजने की अत्यंत जल्दी रहती है। आजकल सभी माता पिता पब्लिक स्कूल में ही अपने बच्चे को पढ़ाना चाहते हैं। जब बच्चा पहली बार घर के वातावरण से बाहर निकलता है तो उसे अपनी भाषा के बजाय दूसरी भाषा का प्रयोग करना पड़ता है जिससे उसके दिमाग पर काफी जोर पड़ता है और उसमें पढ़ाई के प्रति अरुचि उत्पन्न हो जाती है। बच्चे का आत्मविश्वास घटने लगता है। इस समस्या से बच्चे को बचाने का एकमात्र उपाय यही है कि प्राथमिक शिक्षा बच्चे को उसकी अपनी भाषा में मिले। अभिभावकों व अध्यापकों को चाहिए कि वे बच्चे पर अंग्रेजी नहीं थोपें वरन् बच्चे को छोटे-छोटे शब्दों का ज्ञान दें। बच्चों में अध्यापक के प्रति डर पैदा न करें। जरा सी बात पर उससे यह न कहें कि उसने यदि काम नहीं किया या उनका कहना नहीं माना तो वह उसकी मैडम या सर से शिकायत करेंगे। बच्चों को समझाने का एक तरीका यह भी है कि उससे कहा जाए कि वह अच्छा काम करेगा तो उससे उसकी मैडम खुश होगी तो बच्चा आसानी से मान जाएगा और उसके मानसिक विकास के साथ साथ उसमें पढऩे के प्रति लगन उत्पन्न होगी। बच्चे का शारीरिक और मानसिक तौर पर ठीक होना भी आवश्यक है, तभी वह पढ़ाई ठीक तरह से कर पाएगा। इसलिए उसे खेलकूद के अलावा टी. वी. पर मनोरंजन के कार्यक्रम भी देखने दिए जाने चाहिए। बच्चों के मन में तरह तरह के प्रश्न उठते हैं। उनका आपको सही-सही व सरल उत्तर देना चाहिए जो बच्चों को आसानी से समझ में आ जाए। किसी प्रश्न का उत्तर न आने पर बच्चे पर झल्लाने की बजाय चतुराई से प्रश्न को बदल दें या बच्चे का ध्यान दूसरी ओर आकर्षित कर दें।

बच्चों पर मां-बाप का प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है, इसलिए बच्चों के साथ बुद्धिमता, सहनशीलता सद्व्यवहार बनाए रखें।

- शैली माथुर

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