जरूरी है कामकाजी महिलाओं के लिए सौंदर्य समीकरण

जरूरी है कामकाजी महिलाओं के लिए सौंदर्य समीकरण

चंचल चितवन, निर्मल त्वचा और स्वस्थ तथा सुदृढ़ शरीर और उस पर सलीकेदार वस्त्र विन्यास ही स्त्री के सौंदर्य की पहचान है। आज के भौतिकवादी युग में हर कोई सुन्दर दिखना चाहता है लेकिन सही अर्थों में सुंदरता क्या है, इसकी कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है।

फिर भी, यदि हम सुंदरता के मापदंडों को सरसरी तौर पर देखें तो नाक-नक्श व गोरी त्वचा के समन्वित रूप को ही शरीर का आकर्षण मान लिया जाता है लेकिन यदि थोड़ी गहराई में जायें तो सुंदरता का सही मायने में अर्थ-अच्छा स्वास्थ्य, चमकदार पानी सी आंखें और अपने जीवन के प्रति सार्थक दृष्टिकोण का होना है।

यूं देखा जाय तो व्यक्ति के सौन्दर्य में उसका स्वभाव, आदतें, आचार-विचार, व्यवहार व बोलचाल का सलीका तो चार-चांद लगाता ही है, वहीं चेहरे पर अच्छी अभिव्यक्ति का भी प्रभाव होता है। आज जब जीवन के हर क्षेत्र में पढ़ी-लिखी स्त्रियां पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कामकाज करने में पीछे नहीं हैं तो ऐसी महिलाओं के लिए सौंदर्य का भी विशेष महत्त्व होता है।

कामकाजी महिलाएं और सौंदर्य के मिले-जुले समीकरणों से महिलाओं को काफी हद तक जीवन में लाभ भी मिलता है। आप कैसी दिखती हैं? यह बात नौकरी पेशे से जुड़ी महिलाओं के लिए महत्त्वपूर्ण है, अत: कामकाजी महिलाएं जो नौकरी पर जाती हैं, उनके लिए चुस्त-दुरूस्त, सौम्य तथा सुरूचिपूर्णं होना नितान्त आवश्यक है। आप जब भी नौकरी पर जाने हेतु तैयार हों तो अपने परिधान, जूते, हैण्डबैग आदि का इतना ख्याल रखें कि वे आपकी पोशाक से मेल खायें।

आपके परिधान में कपड़ों का रंग भी बहुत महत्त्व रखता है। इससे आपकी रूचि और व्यवहार के साथ-साथ व्यक्तित्व का भी पता चलता है। ऑफिस इत्यादि जगहों में तो कपड़े व आपके मेकअप विशेष चर्चा का विषय बनते हैं। कपड़ों के अलावा सुन्दर व आकर्षक दिखने हेतु अन्य उपयोगी वस्तुओं का भी ध्यान रखा जाये ताकि आपकी डे्रस में विशिष्टता लाने हेतु असामान्य डिजायन व आकार के आभूषणों का भी चयन हो सके।

सुन्दर व प्रभावी दिखने के लिए जरूरी है कि आप स्वयं को पहचानें व विशेषकर अपने शरीर सौष्ठव को भी समझें। सुंदरता के संबंध में यह कहना काफी उचित है कि-'ए थिंग ऑफ ब्यूटी, इज ए ज्वाय फॉर ऐवरÓ। कामकाजी महिलाओं की नौकरी तथा प्रोन्नति में उनकी चंचल चितवन का हमराज उनकी आंखें होती हैं, इसलिए आंखों का विशेषकर ध्यान रखें। आंखों को स्वस्थ रखने हेतु उनकी मालिश अवश्य करें।

पल-पल ढलती उम्र के साथ मांसपेशियों तथा गले की त्वचा के ढीलेपन का एहसास तो उम्र करवाती ही है लेकिन इससे बचने के लिए प्रतिदिन हल्का-फुल्का व्यायाम भी करना चाहिए। शारीरिक अंगों की सफाई का ध्यान जरूर रखें। चेहरे को सदैव तरोताजा रखने के लिए हो सके तो मलाई, नींबू, केसर को मिलाकर उबटन बनाकर लेप लगाएं व कुछ देर बाद गुनगुने पानी से धो लें।

आप जहां तक हो सके, हंसमुख बनें। गुस्सा कम करें व अनावश्यक तनाव से बचें। इससे आपके चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ेंगी। आपका स्वस्थ मजाक व सौम्य स्वभाव आपके सहकर्मियों को प्रभावित करने वाला होना चाहिए जिससे आपकी अलग पहचान व लोकप्रियता भी बनी रहे। आप जहां अपने बाह्य आकर्षण का ध्यान रखें, वहीं आंतरिक सौंदर्य को भी महत्त्वपूर्ण समझें।

हर दृष्टि से सुंदर दिखने के लिए आप जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी अपनायें। जब भी आप दफ्तर में हों तो अपनी मुद्रा का अवश्य ख्याल रखें। सीधी मुद्रा में चलना व बैठना निश्चय ही आपके सौंदर्य में वृद्धि करता है। यदि आप नेचुरली सुन्दर हैं तो ज्यादा मेकअप न करें। उसे कुदरती ही बना रहने दें।

हां,एक बात पर विशेष ध्यान दें और वह है-न काहू से दोस्ती और न काहू से बैर। जब भी किसी से बातचीत करें तो अत्यन्त ही मधुरता व शालीनता बरतें। भले ही बातचीत करने वाले का कार्य हो या न हो लेकिन उसे आपके व्यवहार से संतुष्टि अवश्य ही मिलनी चाहिए।

यदि आप वास्तव में कामकाजी महिला हैं तो निश्चय ही इन बातों पर गौर करें। यूं भी स्त्रियां गुणों की खान होती हैं। फिर जरा सा शारीरिक व व्यावहारिक परिवर्तन करने से आप और भी ज्यादा आकर्षक लगेंगी, इसमें कोई शक नहीं।

- चेतन चौहान

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