ये जोरू के गुलाम नहीं

ये जोरू के गुलाम नहीं

अक्सर पतियों में यह अहम् होता है कि यदि किसी ने उन्हें घर काम करते हुए देख लिया तो वे जोरू के गुलाम कहलाएंगे। शादी से पहले जब वे अपनी मम्मी या अपनी बहन तक के साथ घर के काम, यहां तक कि किचन में भी काम करवाते हैं, तब उन्हें कोई शर्म महसूस नहीं होती लेकिन जहां शादी हुई, वे घर के कामों से बचने लगते हैं। कहीं कोई उन्हें 'जोरू का गुलाम' या 'बीवी का नौकर' न कह दे।

उन्हें अपने ही घर का काम करने में शर्म आती है जबकि अपना घर छोड़कर आयी उनकी बीवी उनके घर में नौकरानी की तरह काम में लगी रहती है। पत्नी पर हुक्म चलाने में वे अपनी शान समझते हैं।

कुछ समझदार पति भी होते हैं। वे परवाह नहीं करते कि कोई क्या कहेगा। उन्हें पता है कि उनका काम उनकी पत्नी से ही चलेगा, कमेन्ट करने वालों से नहीं। वे पत्नी के न चाहते हुए भी उसका काम आसान करने के लिए तैयार रहते हैं। घर के काम वे पत्नी के हिस्से और बाहर का काम अपने ऊपर ले लेते है। अपने काम भी वे स्वयं ही निपटाने की कोशिश करते हैं। कुछ भार तो पत्नी के ऊपर कम हो।

अगर वह भी नौकरीपेशा है तो गृहस्थी का आधा काम पति अपने ऊपर ले लेता है। इससे दोनों में कभी काम को लेकर मतभेद नहीं होता बल्कि पत्नी स्वयं ही ज्यादा से ज्यादा काम निपटाने की कोशिश करती है। यदि ऑफिस की छुट्टी हो तो भी दोनों मिलजुल कर काम निपटा लेते हैं। घर में एक स्वस्थ माहौल बना रहता है।

नजर डालें उन कमेंट कर्ताओं पर जो आपके पति को जोरू का गुलाम कहते हैं। घर-गृहस्थी के काम हर आदमी को करने पड़ते हैं। खुशी से न सही लड़ाई-झगड़े में तो करने ही पड़ते हैं जरा झांककर देखिये उन परिवारों में जो आपके पति को चिढ़ाते हैं। जरूर अपने घर के लिए भाजी लाते, पत्नी को शॉपिंग कराते, बच्चों को स्कूल ले जाते, अपने कपड़ों पर प्रेस चलाते, खुद खाना डालकर खाते, क्यारियां बनाते, और न जाने क्या-क्या करते हुए मिल जायेंगे। जो खुद अपने घर में भीगी बिल्ली हैं, वे बाहर शेर की तरह नहीं दहाडंगे तो खुद को क्या कहलवायेंगे?

घर का काम पत्नी के नाम नहीं होता। उसकी हां में हां मिलाने वाला जोरू का गुलाम नहीं होता। साथ चलकर ही गाड़ी पटरी पर दौड़ सकती है। यदि दोनों ही अपनी मनमर्जी करने लगेंगे तो गृहस्थी नहीं चल पायेगी।

यदि कोई काम पत्नी से नहीं होता तो पति उसका हाथ बंटाये। आप एक काम करेंगे तो उसे लगेगा कि आप उसका ख्याल रखते हैं और वह सारा दिन इसी खुशी में लगी रहेगी। यह पति की जिम्मेदारी है कि अपनी पत्नी के सुख-दुख व घरेलू कामों में उसका साथ निभाये। फिर वे गुलाम नहीं, दोस्त कहलायेंगे।

-शिखा चौधरी

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