अहं का टकराव है तलाक

अहं का टकराव है तलाक

तलाक के बढ़ते मामलों के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण से जो तथ्य उभर कर आते हैं उसके अनुसार आधुनिक समाज में सब अपनी जिम्मेदारी से भागना चाहते हैं। सब अपने लिए जीना चाहते हैं। संबंधों में कोई समर्पण नहीं रह गया है। तलाक होने की बहुत सी वजहों में प्रमुख वजह है संबंधों के प्रति लापरवाह हो जाना। सब अपने झूठे अभिमान के लिए जीते हैं। थोड़ा सा मनमुटाव होने पर तलाक के ताने बाने बुनने लगते हैं। हालत यह है कि महिलाएं भी इसमें पीछे नहीं हैं।

तलाक का फैशन लोगों के सिर पर चढ़ कर बोल रहा है। यह पश्चिम की ही देन है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। जब तलवार गर्दन पर चलती है तो दोष सिर्फ तलवार का ही नहीं होता, गर्दन का भी होता है जो कट जाती है। क्यों कटती है? कहना होगा गर्दन कमजोर होती है, इसलिए कट जाती है। तो दोष गर्दन का है न कि वह तलवार से कट जाती है।

बैंक आफिसर अशोक शर्मा कहते हैं कि आज आर्थिक रूप से सम्पन्न होने के बावजूद वह अपनी पत्नी की बेवफाई झेल रहे हैं। वजह उनकी पत्नी पूरे परिवार के साथ एडस्ट नहीं करना चाहती थी। वह उन्हें परिवार से अलग रहने को कहती थी लेकिन अशोक को अलग रहना मंजूर नहीं था। स्वाभाविक है जिस मां बाप ने पूरा खून पसीना एक करके पुत्र को लायक बनाया और आज जब उनकी जरूरत मां-बाप को है तो ऐसे में बूढ़े मां बाप को छोड़ कर कैसे जा सकते हैं। यह बात उनकी पत्नी को नहीं भायी। नौबत यहां तक आ गई कि दोनों का छुटकारा तलाक के बाद ही हुआ।

दूसरा उदाहरण सीमा चौधरी का है जो 35 साल की महिला है। सीमा पूरा दिन प्राइवेट जॉब करके अपना घर भी संभालती थी, दो बच्चों की भी जिम्मेदारी सीमा पर ही थी। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से सीमा को काम करना पड़ता था। सीमा का पति शराबी था। रोज शाम को वह पी कर आता था और सीमा को बेवजह पीटता था। सुबह शराब का नशा उतरते ही सामान्य हो जाता। सीमा ने संबंध सुधारने के लिए बहुत कोशिश की पर सब बेकार हुआ। अंत में परेशान होकर सीमा को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा क्योंकि सीमा की अपनी जिन्दगी के साथ सबसे ज्यादा बच्चों के कैरियर का भी सवाल था।

इस तरह हजारों अशोक व सीमा अपने उजड़े हुए दांपत्य को याद करके रोते हैं। ऐसी कहानी लाखों जोड़ों की है। सवाल है साथ मरने जीने की कसमें खाने वाले जोड़े आखिर क्यों एक दूसरे को जिन्दगी की मझधार में छोड़ कर जीवन के अलग किनारे पर खड़े हो जाते हैं जो सारी जिन्दगी दु:खदायी याद बन जाती है। इस समस्या का एक मात्र समाधान है कि अपने अहं को नजर अंदाज करके एक दूसरे के प्रति समर्पण से प्यार बांटें और विश्वास पर नींव रखें तो निश्चित रूपेण दांपत्य जीवन की नैया कदापि नहीं डगमगाएगी।

- निरंजन कुमार राणु

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