गलती स्वीकारने में बुराई नहीं

गलती स्वीकारने में बुराई नहीं

हम एक आम इंसान हैं, कोई देवी-देवता या परफेक्शनिस्ट नहीं कि हम कुछ गलत कर ही नहीं सकते। कहीं न कहीं जाने अनजाने में कुछ गलत हों जाए तो उसे स्वीकारने में झिझक न करें। गलती स्वीकार कर आप कितनी बड़ी मुसीबत से उबर सकती हैं और तनावमुक्त रह सकती हैं।

- बात करते हुए हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आप जिस से बात कर रही हैं कहीं उनकी भावनाओं को ठेस तो नहीं पहुंच रही, कहीं आप उनकी इज्जत को दर किनार तो नहीं कर रही। यदि कभी ऐसा लगे तो उसी समय अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगे। ऐसे में आप में दुर्भावना जन्म नहीं लेगी और बात आसानी से आई गई हो जाएगी।

- घर में काम करते समय या दफ्तर में काम करते समय कभी कभी जल्दी में कुछ गलती किसी से भी हो सकती है। कोई दूसरा यदि ध्यान दिलाए तो उस बात का बुरा न मानें, न ही बहाना बनाएं बल्कि सहज स्वभाव से अपनी गलती मान लें।

- कोई जिम्मेदारी वाला काम आप गु्रप में निभा रही हैं और कभी कुछ गलत हो जाए तो दूसरों पर दोष न लगाएं। सहजता से अपनी गलती स्वीकार करें क्योंकि सही काम की जिम्मेदारी आपकी थी।

गलती स्वीकारते समय अहं अक्सर आड़े आता है। अहं को एक किनारे पर रख गलती स्वीकारें। यदि कभी गलती से बच्चों को कुछ कह दिया और बाद में लगे कि कुछ गलत था तो बेझिझक सॉरी बोल दें। बच्चे आपकी इज्जत करेंगे। अपने से छोटों को सॉरी कहने से आप छोटे नहीं होंगे बल्कि आपकी इज्जत बढ़ेगी।

- सुदर्शन चौधरी

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