क्या आप लड़की देखने जा रहे हैं?

क्या आप लड़की देखने जा रहे हैं?

लड़की देखने जाना विवाह आदि की बातचीत तय करते समय का सबसे संवेदनशील एवं महत्त्वपूर्ण चरण है। कन्या पक्ष वालों की जान तो वर पक्ष वालों की 'हाँ' या 'न' में ही अटकी रहती है। सो, लड़के के विषय में कन्या पक्ष वालों की रजामंदी के बाद यह वर - पक्ष वालों पर निर्भर करता है कि लड़के के लिए लड़की पसंद करते समय उनका रवैय्या और दृष्टिकोण किस प्रकार का है और यदि यह सही नहीं है तो फिर इसमें क्या - क्या सुधार अपेक्षित हैं। प्रस्तुत हैं वर-पक्ष वालों के लिए कुछ सुझाव।

सर्वप्रथम तो कहीं भी बात तय करने जाने से पहले अपने लड़के से खुलकर पूछें कि कहीं उसने पहले से ही तो अपने लिए कोई लड़की पसंद न कर रखी हो। यदि उसका गंभीरतापूर्वक किया गया जीवन साथी का चुनाव आपको भी उपयुक्त लगता है तो अपनी सहमति दे देने में ही भलाई है। ऐसा न हो कि आप सब कुछ जानते बूझते हुए भी उस पर अपनी मर्जी थोपने के इरादे से उसके लिए आगे लड़कियां देखते जाएँ।

ऐसे में किसी कारणवश स्थिति गंभीर हो जाने पर आपको लड़की वालों के समक्ष शर्मिन्दगी उठानी पड़ सकती है और अत्यधिक दबाव में आकर किए गए ऐसे विवाह यदि सम्पन्न भी हो जाएँ तो अधिक देर टिक नहीं पाते और टूटने के कगार पर खड़े हो जाते हैं। लड़की के लिए लड़का पसंद करते समय भी इस बात का खासा ध्यान रखा जाना चाहिए।

बेहतर होगा कि रिश्ता अपने जैसे स्तर के खानदान में ही तय करें। कई लड़के वाले सोचते हैं कि जितना अमीर खानदान होगा, उतना ही दहेज भी आएगा लेकिन अच्छी सुख सुविधाओं की आदी लड़कियाँ अक्सर अपने से काफी कम स्तर वाले परिवारों में खप नहीं पाती और ससुराल वालों के साथ उनका सही सामंजस्य नहीं बैठता जिससे तनाव बढ़ते हैं।

जहां कहीं भी लड़की देखने जाएँ, अपने लड़के को साथ अवश्य लेकर जाएँ। आपकी पसंद आपके बेटे की पसंद हो सकती है किन्तु ऐसा न सोचें कि केवल आपकी रजामंदी ही काफी है। आजकल की लड़कियाँ भी शिक्षित और जागरूक हैं। वे भी जाँच परख कर ही अपने जीवन साथी का चुनाव करना चाहती हैं।

लड़की और लड़के को खुलकर बातचीत करने का पूरा पूरा मौका दें। आखिर जिन लोगों ने पूरा जीवन साथ गुजारना है, उन्हें यह तो पता हो कि उनके विचार एक दूसरे से मेल भी खाते हैं या नहीं। आज भी कुछ संकीर्ण और रूढि़वादी मानसिकता वाले परिवारों में कुंडली मिलान पर तो पूरा पूरा जोर दिया जाता है किन्तु विवाह के इस सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू को अनदेखा कर दिया जाता है। परिणाम-बाद में वैचारिक तारतम्य न बैठने से अक्सर विवाह टूटते हैं।

भूल कर भी यह भावना मन में न लाएँ कि हम लड़के वाले हैं और हमें लड़की वालों के द्वारा अपनी सेवा खातिरदारी करवाने का पूरा-पूरा अधिकार है। ध्यान रखिए विवाह केवल दो व्यक्तियों का ही नहीं बल्कि दो परिवारों का भी मिलन है। यदि आप लड़की वालों पर अपना अनावश्यक रोब प्रकट करेंगे तो वे आपकी सेवा तो करेंगे मगर मात्र औपचारिकतावश, मन से नहीं, इसलिए आदर दें और आदर लें।

वधू का चुनाव अपने लड़के के रंग-रूप व कद-काठी को देखकर ही करें। असाधारण रूप से सुंदर वधू का चयन कर आप तो फूले नहीं समाएँगे किन्तु जान पहचान के लोग आते जाते जब जोड़ी को 'बेमेल' कहेंगे तो संभव है आपके बेटे के मन में हीन भावना घर कर जाए। यही बात वधू के लिए वर का चुनाव करते समय भी लागू होती है।

कुछ लड़के वाले हर हिसाब से लड़की पसंद आ जाने पर भी कोई न कोई मीन मेख निकाल कर आगे लड़कियाँ देखते जाते हैं और रिजेक्ट करते जाते हैं। उनका मानना होता है कि 'हमारे लड़के को लड़कियों की क्या कमी है।' ऐसे हद से ज्यादा असाधारण मांग रखने वाले 'चूजी' लोगों को कई बार पशोपेश में गलत निर्णय ले लेने की वजह से साधारण से भी कम में संतोष करना पड़ सकता है।

बातचीत के दौरान अपनापन बनाए रखें। लड़की वालों के सामने अपने घराने की दूसरी बहुओं के घरों से आए भारी भरकम दहेज के बारे में बढ़-चढ़ कर बातें न करें। इससे आपका हल्कापन ही झलकेगा।

कोशिश करें कि बातचीत के दौरान लड़की को भी सहज होने का मौका दें भले ही वह आपको पसंद हो अथवा नहीं। उसे आड़ी तिरछी पैनी नजरों से न घूरें जैसे कि आप कोई जेलर हों और उसका किसी कैदी की भांति मुआयना कर रहे हों।

आखिर में, सबसे महत्त्वपूर्ण बात, लड़की देख चुकने के बाद यह बहाना न लगाएँ कि हमारे अमुक रिश्तेेदार या संबधी ने भी अभी लड़की देखनी है। बेहतर होगा कि यह बात पहले से ही तय कर लें कि आप किस-किस महत्त्वपूर्ण संबधी, निकटतम रिश्तेदार या परिवारजन को लड़की देखने के लिए साथ लेकर जा रहे हैं मगर ज्यादा भीड़ भी एकत्र न करें ताकि लड़की वालों को कोई असुविधा न हो।

स्पष्ट है कि आजकल जिस प्रकार वधू के लिए सही वर का चुनाव सुगम नहीं है,उसी प्रकार वर के लिए योग्य वधू भी आसानी से नहीं मिलती, अत: यदि आप अपने मन से 'वर पक्ष' वाले होने का अहं त्याग देंगे और लड़की को दहेज के तराजू में न तोल कर उसके गुणों को ही प्रधानता देते हुए उसका चुनाव करेंगे तो निश्चित रूप से आपके परिवार को एक ऐसी बहू मिलेगी जो आपके घर आंगन की बगिया को अपने सदगुणों से महकाएगी।

-शिखा चौधरी

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