कैसे बिताएं दोपहर घरेलू महिलायें

कैसे बिताएं दोपहर घरेलू महिलायें

अल्हड़, अलमस्त बचपन तथा स्फूर्तिदायक यौवन का सफर बीत जाने के बाद आता है बुढ़ापा। यह जीवन का निर्गम तथा अहम पड़ाव है जहां व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण करके अकेलेपन पर आश्रित हो जाता है। आमतौर पर व्यक्ति के लिए समय काटना आसान रहता है किन्तु औरतों के लिए यह बड़ा कठिन समय होता है। समय का उपयोग इस दहलीज पर कैसे करें, यह सवाल बड़ा पेचीदा है।
पुराने जमाने में गांवों में औरतें सारा दिन कार्यों में व्यस्त रहती थी। पानी लाने के लिए दो से तीन किलोमीटर तक जाना पड़ता था। उसके बाद घर में 15 से 20 लोगों का खाना बनाना तथा उसके बाद खेतों में परिवार का सहयोग करना पड़ता था। शाम को वापिस आकर चूल्हा-चौका करना पड़ता था। रात को बड़े बूढ़ों के पैर दबाना आदि कार्यों में वक्त बीत जाता था किन्तु आज वैसी परिस्थितियां मौजूद जरूर हैं किन्तु उनमें भी बदलाव आ चुका है। घर-घर नल-कूप आ गए हैं। जमीन पर खेती करने के लिए मजदूर रखे जाने लगे हैं। संयुक्त परिवार का अभाव हो गया है। अकेले चलने की प्रवृत्ति बढ़ चुकी है। परिवार के पढ़े-लिखे व्यक्ति नौकरी के लिए शहरों की तरफ रूख कर चुके हैं।
लेकिन शहरों की औरतों के लिए एकाकीपन का अहसास गहरा हो चला है अत: आधुनिक समाज में गृह-कार्य नौकरों की मदद से जहां एक से दो घटों के बीच हो जाता है वहीं पर बाकी समय गुजरना कठिन हो जाता है हालांकि घर में टी. वी. रेडियो व केबल की सुविधा होने पर भी मन को बराबर काम में लगाए रखना सरल कार्य नहीं है।
ऐसे में खाली मन शैतान का घर बन जाने का डर बना रहता है। समय का सदुपयोग ऐसे करें जिससे मन को आत्मसंतुष्टि मिले। आप निम्न कार्यों में से अपनी रूचि का कार्य करके आप अपने को व्यस्त रख सकती हैं।
पढ़ाना:- सबसे पहले आप पड़ोस के छोटे बच्चों को पढ़ाकर समय का सदुपयोग कर सकती हैं। बच्चों को सामान्य बातों की जानकारी भी दे सकती हैं। बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित करने की कोशिश करें।
सिलाई कढ़ाई व बुनाई को अपनाएं:- घर में खुद मशीन लगाएं। आधुनिक समाज की आवश्यकतानुसार सिलाई, कढ़ाई व बुनाई का कार्य कर खाली समय का सदुपयोग कर सकती हैं। इससे घर की आय में आप वृद्धि भी कर सकती हैं। इसे व्यापार के रूप में भी ले सकती है।
चित्रकला:. यह एक और माध्यम है जिसे आप आजमा सकती हैं। अपनी रूचि की तस्वीरें बना सकती हैं। व्यापारिक दृष्टि से भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों को भी सिखा सकती हैं।
पाक-कला:- आप तरह-तरह के व्यंजन बना सकती हैं। उन का अनुभव हासिल करके युवतियों को इसका प्रशिक्षण दे सकती हैं। आजकल किताबों में विभिन्न प्रकार की विधियां प्रकाशित होती रहती हैं। उन्हें घर में बनाकर उनका आनंद ले सकती हैं।
खिलौने बनाने में रूचि पैदा करें:- समाज में इसका महत्त्व बढ़ता जा रहा है, पार्कों तथा मैदानों की कमी से बच्चे ज्यादा समय घर में व्यतीत करते हैं। ऐसे में बच्चों को घर में रहना पड़ता है और खिलौने ही मनोरंजन का साधन बन जाते हैं। इनका निर्माण करें तथा व्यापार के रूप में भी इसका उपयोग करें। समय भी सरलता से कट जायेगा तथा मन को खुशी भी मिलेगी।
गृह सजावट:- आज जमाने में इसका महत्त्व बढ़ गया है। सभ्य घर की पहचान में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप में आ रहा है। घर की साज-सजावट गमलों, फूलों तथा परदों के रख-रखाव व बदलाव के साथ बनाए रखें ताकि घर में आने वाला व्यक्ति इससे प्रभावित हो व सुंदरता की तारीफ भी करें।
खाली समय में मनोरंजक किताबें पढ़ें:- आधुनिक युग में बहुत सी किताबें प्रकाशित होती रहती हैं जो महिलाओं की समस्याओं से संबंधित होती हैं। उन्हें पढं़े तथा निदान पाएं। लिखने की रूचि हो तो इसे शौक के तौर पर आजमाएं। हो सके तो पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन हेतु भेजें।
बागवानी:- सुबह-शाम घर के साथ बने गार्डन में पौधों को पानी दें। घर में भी गमले लगाएं। तरह-तरह के फूल व सब्जियां लगाएं, उनकी देखभाल उचित तरीके से करें तथा मन को प्रकृति के साथ जोड़ें। प्रकृति के सानिध्य में मन अति प्रसन्न रहता है।
अत: स्पष्ट है कि ग्रामीण महिलाओं को आज भी फुर्सत नहीं है किन्तु शहरी महिलाओं के लिये खाली समय व्यतीत करना कठिन है। फिर भी इस लेख से महिलाएं समय का सदुपयोग करना सीखें तो परिवार, देश व समाज को उन्नत बना पायेंगी।
- आर. पी. भारद्वाज

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